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Mahendragarh-Narnaul News: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर फ्रॉड करने वालों से रहें सावधान
Mon, 25 Nov 2024 03:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 25 Nov 2024 03:32 AM IST
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नारनौल। पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ के निर्देश पर पुलिस ने साइबर अपराधों से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
साइबर ठग प्रभावशाली लोगों, पुलिस अधिकारियों के फोटो का इस्तेमाल कर रुपये की मांग करते हैं। साइबर ठग व्हाट्स एप, फेसबुक और इंस्टाग्राम से उनका फोटो व्हाट्स एप डीपी पर लगाकर लोगों से रुपये मांगते हैं। इसलिए अगर कोई परिचित मैसेज भेजकर रुपये मांगता है तो विश्वास न करें। जागरूक होकर साइबर जालसाजों से सावधान रहें।
पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ ने कहा कि तकनीकी युग में प्रत्येक व्यक्ति इंटरनेट पर निर्भर हो गया है। यूजर्स की नासमझी और लापरवाही के कारण लोग अक्सर साइबर ठगों के जाल में फंसकर अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी गंवा बैठते हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए डिजिटल अरेस्ट को अपना हथियार बना रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट व्हाट्स एप कॉल पर की जाने वाली ब्लैकमेलिंग है। इसमें पुलिस की वर्दी पहनकर या सरकारी विभाग का अधिकारी जैसा बैकग्राउंड तैयार कर साइबर ठग लोगों को इमोशनली और मेंटली टॉर्चर करते हैं। साइबर ठग लोगों को व्हाट्स एप के जरिए यकिन दिलाते हैं, कि उनके परिचित के साथ कुछ बुरा हो चुका है या होने वाला है। चूंकि सामने बैठा शख्स पुलिस की वर्दी में होता है तो अधिकांश लोग डर जाते हैं। इसके बाद उनके पैसों की डिमांड जाल में फंसते चले जाते हैं।
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साइबर ठग प्रभावशाली लोगों, पुलिस अधिकारियों के फोटो का इस्तेमाल कर रुपये की मांग करते हैं। साइबर ठग व्हाट्स एप, फेसबुक और इंस्टाग्राम से उनका फोटो व्हाट्स एप डीपी पर लगाकर लोगों से रुपये मांगते हैं। इसलिए अगर कोई परिचित मैसेज भेजकर रुपये मांगता है तो विश्वास न करें। जागरूक होकर साइबर जालसाजों से सावधान रहें।
पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ ने कहा कि तकनीकी युग में प्रत्येक व्यक्ति इंटरनेट पर निर्भर हो गया है। यूजर्स की नासमझी और लापरवाही के कारण लोग अक्सर साइबर ठगों के जाल में फंसकर अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी गंवा बैठते हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए डिजिटल अरेस्ट को अपना हथियार बना रहे हैं।
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पुलिस अधीक्षक ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट व्हाट्स एप कॉल पर की जाने वाली ब्लैकमेलिंग है। इसमें पुलिस की वर्दी पहनकर या सरकारी विभाग का अधिकारी जैसा बैकग्राउंड तैयार कर साइबर ठग लोगों को इमोशनली और मेंटली टॉर्चर करते हैं। साइबर ठग लोगों को व्हाट्स एप के जरिए यकिन दिलाते हैं, कि उनके परिचित के साथ कुछ बुरा हो चुका है या होने वाला है। चूंकि सामने बैठा शख्स पुलिस की वर्दी में होता है तो अधिकांश लोग डर जाते हैं। इसके बाद उनके पैसों की डिमांड जाल में फंसते चले जाते हैं।
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