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Mahendragarh-Narnaul News: गंभीर कुपोषण से जूझ रहे 1913 बच्चों के घर पहुंचेगा बाकली-चूरमा

Tue, 21 Jul 2026 11:30 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 21 Jul 2026 11:30 PM IST
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'Bakli-Churma' to reach the homes of 1,913 children battling severe malnutrition.
नारनौल। जिले में गंभीर और मध्यम कुपोषण से जूझ रहे 1913 बच्चों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग चार दिन बाकली व दो दिन चूरमा घर पहुंचाएगा। इनमें अति कुपोषित (सैम) के 101 और कुपोषित (मैम) के 1117 और 695 अंडरवेट बच्चों को योजना का लाभ मिलेगा। विभाग का उद्देश्य बच्चों को समय पर संतुलित पोषण देकर उन्हें सामान्य श्रेणी में लाना और कुपोषण की समस्या को कम करना है।
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योजना के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुपोषित बच्चों के घर प्रत्येक सप्ताह दो दिन चूरमा और चार दिन बाकली (पोषण मिश्रण) पहुंचाएंगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के स्वास्थ्य, वजन और विकास की नियमित निगरानी भी करेंगी। जरूरत पड़ने पर अभिभावकों को बच्चों के खान-पान और देखभाल के संबंध में परामर्श भी दिया जाएगा।
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यह अभियान पूरे प्रदेश में शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य कुपोषित बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना है, ताकि उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
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क्यों बढ़ रहे हैं सैम और मैम के मामले
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में कुपोषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। जन्म के बाद पर्याप्त स्तनपान न मिलना, समय पर ऊपरी आहार शुरू न करना, संतुलित भोजन का अभाव, बार-बार संक्रमण या दस्त, स्वच्छता की कमी और पोषण संबंधी जागरूकता का अभाव प्रमुख वजहें हैं। कई परिवारों में बच्चों के भोजन में प्रोटीन, विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी कुपोषण को बढ़ावा देती है।

सैम और मैम के प्रमुख लक्षण
सैम श्रेणी के बच्चों में उम्र के अनुसार वजन अत्यधिक कम होना, शरीर का बेहद दुबला दिखाई देना, बार-बार बीमार पड़ना, कमजोरी, सुस्ती और शरीर में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वहीं, मैम श्रेणी के बच्चों में सामान्य से कम वजन, विकास की धीमी गति, कमजोरी, भूख कम लगना और बार-बार संक्रमण होना प्रमुख संकेत माने जाते हैं। ऐसे बच्चों की समय पर पहचान और उपचार बेहद जरूरी है, ताकि उनका समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।


वर्जन:
जिले में सैम, मैम से ग्रस्त बच्चों को चार दिन बाकली व दो दिन चूरमा घर पर पहुंचाया जाएगा। यह अभियान इसी माह से शुरू होगा। जिले में अभी सैम के 101, मैम के 1117 और अंडरवेट 695 बच्चे हैं।-शालू यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास नारनौल।
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