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Mahendragarh-Narnaul News: बाल विवाह और घरेलू हिंसा पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
Sat, 23 Nov 2024 01:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 23 Nov 2024 01:20 AM IST
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महेंद्रगढ़। राजकीय महाविद्यालय में महिला अध्ययन एवं विकास प्रकोष्ठ और जेंडर समिति के तत्वावधान में बाल विवाह और घरेलू हिंसा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य विजय यादव ने किया।
प्राचार्य विजय ने कहा कि आज के समय में दुर्व्यवहारकर्ताओं के लिए प्रत्येक रिश्ते में नियंत्रण के अनूठे तरीके काम में लिए जा सकते हैं। कुछ रिश्तों में दवाओं की आपूर्ति को रोककर रखना नियंत्रण का एक पैटर्न होता है। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. नीतू शर्मा ने बताया चालाकी पूर्ण व्यवहार जैसे कि जब कोई रिश्ता समाप्त करना चाहे तो आत्महत्या या स्वघात की धमकी देना भी नियंत्रण के पैटर्न का हिस्सा होता है। एक ऐसी स्थिति में जहां एक अक्षम महिला अपनी सहायता या देखभाल पर निर्भर होती है। वहां उस देखभाल को बंद करना या देखभाल में इस तरह चालाकी बरतना भी शक्ति का अस्वीकार्य उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं को उनके अधिकारों से अवगत कराने और समाज में समानता की भावना को मजबूत करने में सहायक साबित होते हैं।
महिला अध्ययन एवं विकास प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. पविता यादव ने कहा महिलाओं को समाज में अपने अधिकारों की प्राप्ति और घरेलू हिंसा को खत्म करने के लिए सशक्तीकरण की दिशा में आगे आना चाहिए। डॉ. सोमवीर ने कहा बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़कियों पर, बल्कि उनके परिवार और समुदाय पर भी होता है। जिस लड़की की शादी कम उम्र में हो जाती है, उसके स्कूल से निकल जाने की संभावना बढ़ जाती हैं और उसके कमाने और समुदाय में योगदान देने की क्षमता कम हो जाती है। डॉ. पविता यादव ने बताया कि जागरूकता कार्यक्रम महाविद्यालय में छात्राओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इस मौके पर विद्यार्थी एंव समस्त स्टाफ उपस्थित रहे।
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प्राचार्य विजय ने कहा कि आज के समय में दुर्व्यवहारकर्ताओं के लिए प्रत्येक रिश्ते में नियंत्रण के अनूठे तरीके काम में लिए जा सकते हैं। कुछ रिश्तों में दवाओं की आपूर्ति को रोककर रखना नियंत्रण का एक पैटर्न होता है। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. नीतू शर्मा ने बताया चालाकी पूर्ण व्यवहार जैसे कि जब कोई रिश्ता समाप्त करना चाहे तो आत्महत्या या स्वघात की धमकी देना भी नियंत्रण के पैटर्न का हिस्सा होता है। एक ऐसी स्थिति में जहां एक अक्षम महिला अपनी सहायता या देखभाल पर निर्भर होती है। वहां उस देखभाल को बंद करना या देखभाल में इस तरह चालाकी बरतना भी शक्ति का अस्वीकार्य उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं को उनके अधिकारों से अवगत कराने और समाज में समानता की भावना को मजबूत करने में सहायक साबित होते हैं।
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महिला अध्ययन एवं विकास प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. पविता यादव ने कहा महिलाओं को समाज में अपने अधिकारों की प्राप्ति और घरेलू हिंसा को खत्म करने के लिए सशक्तीकरण की दिशा में आगे आना चाहिए। डॉ. सोमवीर ने कहा बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़कियों पर, बल्कि उनके परिवार और समुदाय पर भी होता है। जिस लड़की की शादी कम उम्र में हो जाती है, उसके स्कूल से निकल जाने की संभावना बढ़ जाती हैं और उसके कमाने और समुदाय में योगदान देने की क्षमता कम हो जाती है। डॉ. पविता यादव ने बताया कि जागरूकता कार्यक्रम महाविद्यालय में छात्राओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इस मौके पर विद्यार्थी एंव समस्त स्टाफ उपस्थित रहे।
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