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मंडी में बाजरे की आवक शुरू: सरकारी खरीद के निर्देश नहीं, 600-700 रुपये MSP से कम में बेचने को किसान मजबूर

Wed, 30 Aug 2023 11:01 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 30 Aug 2023 11:01 PM IST
सार

किसान 600 से 700 रुपये समर्थन मूल्य से कम भाव में बाजरा बेचने के लिए मजबूर है। किसान मंडी में सोमवार को 50 और मंगलवार को 90 क्विंटल बाजरा लेकर पहुंचे। 2500 रुपये के समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद होनी है। 1800 से 1925 रुपये में आढ़ती खरीद रहे हैं।

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Arrival of millet starts in the market in Narnaul: Farmers suffer losses due to no start govt procurement
नारनौल की मंडी में लगी बाजरे की ढेरी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

महेंद्रगढ़-नारनौल जिले में इस समय बाजरे की कटाई व कढ़ाई जोरों पर चल रही है। जिन किसानों ने बाजरे की कढ़ाई का कार्य पूरा कर लिया है, वह अनाज बेचने के लिए मंडियों में पहुंचने शुरू हो गए हैं। हालांकि अभी तक सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है।

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इससे किसानों को 600 से 700 रुपये समर्थन मूल्य से कम भाव में बेचना पड़ रहा है। किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ रहा है। सोमवार को पहले दिन नारनौल की अनाज मंडी में करीब 50 क्विंटल व मंगलवार को 90 क्विंटल बाजरे की आवक हुई।
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इस दौरान आढ़तियों ने बोली लगाकर 1800 से 1925 रुपये में किसानों से बाजरे की खरीद की जबकि बाजरे का समर्थन मूल्य वर्ष 2023-24 में 2500 रुपये सरकार की तरफ से निर्धारित किया गया है। वहीं बीते वर्ष 2350 रुपये समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया था। इस वर्ष बाजरे के समर्थन मूल्य में 150 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, लेकिन इसके बाद भी समर्थन मूल्य का किसानों को फायदा नहीं मिल रहा है।
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जिले में इस बार करीब 2.50 एकड़ में बाजरे की बुआई की गई थी, लेकिन पहले बाजरे की फसल में रोग लगने व बाद में फसल के पकाव के समय बारिश नहीं होने के कारण काफी नुकसान हुआ है। कृषि विभाग की तरफ से भी जिले में 1.25 लाख एकड़ में बाजरे की फसल शून्य से 20 प्रतिशत नुकसान होने की उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है। हालांकि इस बार क्षेत्र में बाजरे की बंपर पैदावार होने की उम्मीद थी, लेकिन फसल के पकाव के समय बारिश न होने से सबसे ज्यादा बाजरे की फसल प्रभावित हो गई।

बीते वर्ष बारिश अधिक तो इस बार कम होने से फसल हुई खराब
इस बार बारिश कम होने के के लिए बाजरे की फसल खराब हो गई। इस वर्ष मई के अंतिम सप्ताह में अच्छी वर्षा होने पर किसानों ने जल्द ही बाजरे की बुआई कर दी थी, लेकिन पकाव के समय बारिश नहीं होने किसानों की बंपर पैदावार पर पानी फेर दिया। वहीं बीते वर्ष फसल कटाई के समय लगातार वर्षा होने की वजह से बाजरे की गुणवत्ता खराब हो गई थी, जिसकी वजह से किसानों को कम भाव में बाजरा बेचना पड़ा था।

अभी सरकार की तरफ से बाजरे की खरीद को लेकर कोई निर्देश नहीं मिला है। वैसे भी बाजरे की खरीद सरकार की तरफ से अक्तूबर से शुरू की जाती है। जैसे ही सरकार की तरफ से आदेश मिलेंगे, बाजरे की खरीद शुरू कर दी जाएगी। -नीरज त्यागी, हैफेड मैनेजर नारनौल।


जिले में बाजरे की फसल में नुकसान का आकलन कर लिया गया है। 1.25 लाख एकड़ में बाजरे की फसल में शून्य से 20 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। -डॉ. बलवंत सिंह, कृषि उपनिदेशक नारनौल।

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