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पशु अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं मरहम-पट्टी और दवाई
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पशु अस्पताल नारनौल। संवाद
- फोटो : Narnol
क्षेत्र के पशु अस्पतालों में पशुुओं के इलाज के लिए दवाइयां नहीं हैं। हालात यह है कि पशु अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों व उप स्वास्थ्य केंद्रों में मरहम पट्टी तक नहीं है। पशु अस्पतालों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा फिनायल भी दो साल से खत्म हो चुकी है। रूई, पट्टी, फिनायल, भूख लगने का पाउडर, दस्त और पेट के कीड़े मारने की दवा पशु अस्पतालों की आधारभूत दवा हैं। लेकिन पशु अस्पतालों में इन दवाओं का स्टॉक खत्म हो चुका है। वीएलडीए व पशु चिकित्सक मरहम-पट्टी व फिनायल पशुपालकों से ही मंगवाते हैं। अस्पतालों में आधारभूत दवाएं न होने पर वीएलडीए व पशु चिकित्सकों को पशुपालकों की सुनने को मजबूर है।
पशुधन बीमा योजना खत्म करने पर पशुपालकों में रोष
प्रदेश सरकार ने पशुपालकों के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। जिसके तहत पशुओं को बीमा किया जाता था। पशु की मौत होने पर पशुपालक को पशु की पूरी कीमत मिल जाती थी। पशुपालकों को इस योजना का फायदा हो रहा था, मगर विडंबना यह है कि इस साल अप्रैल में सरकार ने यह योजना बंद कर दी। इससे प्रदेश में पशुपालकों में रोष है।
पशुपालकों का स्टाफ पर दवा खुर्द-बुर्द करने का आरोप
पशुपालक अस्पताल स्टाफ पर दवाओं को खुर्द-बुर्द करने का आरोप लगा रहे है। मगर सच्चाई यह है कि पशु अस्पतालों में दो साल पहले ही दवाओं की आपूर्ति की गई थी। उसके बाद अस्पतालों में दवाई नहीं आई है। जो पशुपालकों के लिए चिंता का विषय है। नांगल दर्गू पशु अस्पताल में करीब दो साल से फिनायल नहीं है। जिसकी डिमांड हर माह को होने वाली बैठक में रखी जाती है। दवाओं की आपूर्ति हाई लेवल अथॉरिटी परचेज करती है, जो चंडीगढ़ से दवाओं की खरीदारी करती है। डिप्टी डायरेक्टर भी हर बार रिमाइंडर भेजते हैं। -डॉ. अजय कुमार, प्रभारी पशु अस्पताल नांगल दर्गू।
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दवाई खरीदने का काम विभाग की हाई परचेज कमेटी करती है। पशु अस्पतालों में दवाई नहीं होने की जानकारी समय-समय पर विभाग को दी जाती है। पशु अस्पतालों में जल्द ही दवाई मिलने की संभावना है। डॉ. नसीब सिंह डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन विभाग।
इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। अगर पशु अस्पतालों में दवाओं की कमी है तो जल्द ही दवाइयों की सप्लाई की जाएगी। -जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं पशु पालन मंत्री हरियाणा सरकार।
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पशुधन बीमा योजना खत्म करने पर पशुपालकों में रोष
प्रदेश सरकार ने पशुपालकों के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। जिसके तहत पशुओं को बीमा किया जाता था। पशु की मौत होने पर पशुपालक को पशु की पूरी कीमत मिल जाती थी। पशुपालकों को इस योजना का फायदा हो रहा था, मगर विडंबना यह है कि इस साल अप्रैल में सरकार ने यह योजना बंद कर दी। इससे प्रदेश में पशुपालकों में रोष है।
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पशुपालकों का स्टाफ पर दवा खुर्द-बुर्द करने का आरोप
पशुपालक अस्पताल स्टाफ पर दवाओं को खुर्द-बुर्द करने का आरोप लगा रहे है। मगर सच्चाई यह है कि पशु अस्पतालों में दो साल पहले ही दवाओं की आपूर्ति की गई थी। उसके बाद अस्पतालों में दवाई नहीं आई है। जो पशुपालकों के लिए चिंता का विषय है। नांगल दर्गू पशु अस्पताल में करीब दो साल से फिनायल नहीं है। जिसकी डिमांड हर माह को होने वाली बैठक में रखी जाती है। दवाओं की आपूर्ति हाई लेवल अथॉरिटी परचेज करती है, जो चंडीगढ़ से दवाओं की खरीदारी करती है। डिप्टी डायरेक्टर भी हर बार रिमाइंडर भेजते हैं। -डॉ. अजय कुमार, प्रभारी पशु अस्पताल नांगल दर्गू।
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दवाई खरीदने का काम विभाग की हाई परचेज कमेटी करती है। पशु अस्पतालों में दवाई नहीं होने की जानकारी समय-समय पर विभाग को दी जाती है। पशु अस्पतालों में जल्द ही दवाई मिलने की संभावना है। डॉ. नसीब सिंह डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन विभाग।
इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। अगर पशु अस्पतालों में दवाओं की कमी है तो जल्द ही दवाइयों की सप्लाई की जाएगी। -जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं पशु पालन मंत्री हरियाणा सरकार।