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Mahendragarh-Narnaul News: खंडहर बना खेड़ी का पशु अस्पताल, जान जोखिम में डालकर इलाज कर रहे डॉक्टर
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फोटो 03 खेड़ी का बदहाल पशु अस्पताल। संवाद
मंडी अटेली। गांव खेड़ी का पशु अस्पताल खंडहर बन चुका है। जर्जर भवन कभी भी गिर सकता है, फिर भी पशु चिकित्सक और कर्मचारी डर के साये में बैठकर सेवाएं देने को मजबूर हैं। बरसात में हालात और खराब हो जाते हैं। छत से पानी टपकता है और दीवारों से प्लास्टर झड़ता रहता है।
इस भवन में करीब 25 साल पहले जच्चा-बच्चा केंद्र चलता था। स्वास्थ्य विभाग का नया भवन बनने के बाद इसमें पशु अस्पताल शुरू कर दिया गया। रखरखाव न होने से अब दीवारों में दरारें आ गई हैं, छत की पट्टियां टूटी हैं और दरवाजे-खिड़कियां भी खराब हो चुके हैं। किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
इस अस्पताल से रामपुरा, खेड़ी और बाबा शरनाईनाथ गोशाला जुड़ी हैं जहां 3000 से ज्यादा पशु हैं। आसपास के गांवों के पशुपालक भी टीकाकरण, इलाज और कृत्रिम गर्भाधान के लिए यहीं आते हैं।
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भवन को चार साल पहले जर्जर घोषित किया जा चुका है। नया भवन बनवाने के लिए पशु विभाग तीन-चार बार प्रशासन को लिखित पत्र भेज चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हैरानी की बात यह है कि पंचायत ने नए भवन के लिए अभी तक जगह भी तय नहीं की है, इसलिए फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही।
डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि भवन पूरी तरह खंडहर हो चुका है। दूसरा भवन न होने के कारण मजबूरी में इसी में बैठकर सेवा दी जा रही है, ताकि पशुपालकों को परेशानी न हो। नए भवन की मांग बार-बार की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पशुपालन ही यहां के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। अस्पताल न होने पर बीमार पशुओं को दूर ले जाना पड़ेगा। पशुपालकों ने सरकार और प्रशासन से जल्द नया भवन बनवाने की मांग की है।
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इस भवन में करीब 25 साल पहले जच्चा-बच्चा केंद्र चलता था। स्वास्थ्य विभाग का नया भवन बनने के बाद इसमें पशु अस्पताल शुरू कर दिया गया। रखरखाव न होने से अब दीवारों में दरारें आ गई हैं, छत की पट्टियां टूटी हैं और दरवाजे-खिड़कियां भी खराब हो चुके हैं। किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
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इस अस्पताल से रामपुरा, खेड़ी और बाबा शरनाईनाथ गोशाला जुड़ी हैं जहां 3000 से ज्यादा पशु हैं। आसपास के गांवों के पशुपालक भी टीकाकरण, इलाज और कृत्रिम गर्भाधान के लिए यहीं आते हैं।
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भवन को चार साल पहले जर्जर घोषित किया जा चुका है। नया भवन बनवाने के लिए पशु विभाग तीन-चार बार प्रशासन को लिखित पत्र भेज चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हैरानी की बात यह है कि पंचायत ने नए भवन के लिए अभी तक जगह भी तय नहीं की है, इसलिए फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही।
डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि भवन पूरी तरह खंडहर हो चुका है। दूसरा भवन न होने के कारण मजबूरी में इसी में बैठकर सेवा दी जा रही है, ताकि पशुपालकों को परेशानी न हो। नए भवन की मांग बार-बार की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पशुपालन ही यहां के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। अस्पताल न होने पर बीमार पशुओं को दूर ले जाना पड़ेगा। पशुपालकों ने सरकार और प्रशासन से जल्द नया भवन बनवाने की मांग की है।