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कार्ययोजना बनी, न दुरुस्त हुईं सड़कें, आम लोग परेशान
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शहर में पुलिस लाईन से मंडी को जाने वाली क्षतिग्रस्त सड़क।
- फोटो : Narnol
नारनौल। नगर परिषद ने अपने कार्यकाल के 114 दिन पूरे कर लिए हैं लेकिन अभी तक आम सभा की एक भी बैठक नहीं हुई। विकास कार्यों की न तो कार्ययोजना बन पाई है और सड़कों की मरम्मत का कार्य शुरू हो पाया है। स्थिति यह है कि शहर की सड़कों पर बने गड्ढों की वजह से आवागमन प्रभावित हो रहा है। साथ ही दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।
नगर परिषद की बैठक नहीं होने से शहर की सड़कों तथा अन्य विकास कार्य रुके हुए हैं। जबकि पार्षद कई बार चेयरपर्सन से मांग कर चुके हैं। मानसून के बाद शहर की अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इनकी मरम्मत की मांग लोग नप में कर रहे हैं। नगर परिषद के सभी 30 पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों के विकास कार्यों की सूची नप चेयरपर्सन को दी है। इनमें लगभग 450 से 500 सड़कों की मरम्मत तथा नई सड़कें बनाई जानी हैं लेकिन सड़कों को बनाने के लिए शहरी सरकार के पास बजट नहीं है। दूसरा आम सभा की बैठक में भी उपरोक्त सड़कों का प्रस्ताव पास करवाना होगा। प्रस्ताव पास होने के बाद ही सरकार से बजट की मांग की जा सकेगी।
नगर परिषद से कोविड से पहले शुरू हुए किला रोड से महिला थाना तक लगभग 3 किलोमीटर सड़क नहीं बन पाई है। छह करोड़ रुपये से बनने वाली सड़क किला रोड से नागरिक अस्पताल तक ही बन पाई है। अभी अस्पताल से लेकर महिला थाने तक का कार्य लंबित है। अनाज मंडी, रेलवे स्टेशन, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डाकघर आदि रोड की दशा खराब है। इस सड़क की मरम्मत के लिए 15 दिन पहले कुछ पार्षदों ने उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा था लेकिन बावजूद इसके कोई समाधान नहीं हो रहा।
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शहर की अधिकांश सड़कें बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। वाहन चालकों को निकलना मुश्किल हो गया है। शहर के मुख्य बाजारों तथा गली मोहल्लों की अधिकांश सड़कों का यही हाल है। एमई अनिल ने बताया कि शहर में 52 किलोमीटर की सड़के हैं। इनमें बारिश से दस प्रतिशत सड़कों का नुकसान हुआ है। हकीकत यह है कि शहर की हर गली मोहल्ले की सड़कें टूटी हुई हैं। पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों की जर्जर सड़कों की सूची है।
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नगर परिषद की बैठक नहीं होने से शहर की सड़कों तथा अन्य विकास कार्य रुके हुए हैं। जबकि पार्षद कई बार चेयरपर्सन से मांग कर चुके हैं। मानसून के बाद शहर की अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इनकी मरम्मत की मांग लोग नप में कर रहे हैं। नगर परिषद के सभी 30 पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों के विकास कार्यों की सूची नप चेयरपर्सन को दी है। इनमें लगभग 450 से 500 सड़कों की मरम्मत तथा नई सड़कें बनाई जानी हैं लेकिन सड़कों को बनाने के लिए शहरी सरकार के पास बजट नहीं है। दूसरा आम सभा की बैठक में भी उपरोक्त सड़कों का प्रस्ताव पास करवाना होगा। प्रस्ताव पास होने के बाद ही सरकार से बजट की मांग की जा सकेगी।
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नगर परिषद से कोविड से पहले शुरू हुए किला रोड से महिला थाना तक लगभग 3 किलोमीटर सड़क नहीं बन पाई है। छह करोड़ रुपये से बनने वाली सड़क किला रोड से नागरिक अस्पताल तक ही बन पाई है। अभी अस्पताल से लेकर महिला थाने तक का कार्य लंबित है। अनाज मंडी, रेलवे स्टेशन, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डाकघर आदि रोड की दशा खराब है। इस सड़क की मरम्मत के लिए 15 दिन पहले कुछ पार्षदों ने उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा था लेकिन बावजूद इसके कोई समाधान नहीं हो रहा।
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शहर की अधिकांश सड़कें बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। वाहन चालकों को निकलना मुश्किल हो गया है। शहर के मुख्य बाजारों तथा गली मोहल्लों की अधिकांश सड़कों का यही हाल है। एमई अनिल ने बताया कि शहर में 52 किलोमीटर की सड़के हैं। इनमें बारिश से दस प्रतिशत सड़कों का नुकसान हुआ है। हकीकत यह है कि शहर की हर गली मोहल्ले की सड़कें टूटी हुई हैं। पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों की जर्जर सड़कों की सूची है।