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Mahendragarh-Narnaul News: 20 लाख की साइबर ठगी के आरोपी की जमानत याचिका खारिज

Tue, 09 Jun 2026 12:23 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 12:23 AM IST
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Accused's bail plea rejected.
नारनौल। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्षाली चौधरी 20 लाख की साइबर ठगी के आरोपी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहमापुर गांव निवासी करन सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले को सुनियोजित और संगठित साइबर अपराध मानते हुए आरोपी को राहत देने से इन्कार कर दिया।
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मामला वर्ष 2025 में नारनौल के साइबर थाना में दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता अजय कुमार ने पुलिस को बताया कि 5 जुलाई 2025 को उसे एक फोन कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई का अधिकारी अरविंद शर्मा बताते हुए कहा कि उसके नाम पर जारी एक मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है और वह केनरा बैंक के एक संदिग्ध खाते से जुड़ा है। इसके बाद उसे मुंबई के वर्ली पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने के लिए कहा गया।
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जब अजय ने वहां पहुंचने में असमर्थता जताई तो कॉलर ने खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति को कॉन्फ्रेंस कॉल पर जोड़ दिया। उसने दावा किया कि अजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज है और जांच सीबीआई कर रही है। साथ ही गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कहकर उसे डराया गया। बाद में व्हाट्सएप पर साइबर क्राइम कोलाबा मुंबई के नाम से संदेश भेजकर उसकी व्यक्तिगत जानकारी हासिल की गई।
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शिकायतकर्ता को लगातार व्हाट्सएप कॉल और वीडियो कॉल कर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले का हवाला देकर भयभीत किया गया। 7 जुलाई को एक वीडियो कॉल के दौरान एक व्यक्ति जज और दूसरा सीबीआई अधिकारी के रूप में दिखाई दिया। उन्होंने अजय को अपनी संपत्ति और बैंक खातों की जानकारी देने के लिए कहा। आरोपियों ने एक कथित हलफनामा भेजकर उसे एक बैंक खाते में 20 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया।


इसके बाद आरोपियों ने अजय के म्यूचुअल फंड खाते में जमा 25 लाख रुपये की जानकारी भी हासिल कर ली और उस राशि को निकालने का दबाव बनाया। 12 जुलाई को साइबर अपराध जागरूकता संबंधी एक संदेश मिलने पर अजय को ठगी का एहसास हुआ और उसने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि ठगी गई रकम में से चार लाख रुपये आरोपी के बैंक खाते में पहुंचे थे। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
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