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Mahendragarh-Narnaul News: रामलीला के मंच पर तैयार हो रही अभिनय की नई पौध
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फोटो नंबर-13रामलीला मंचन की रिहर्सल करते बच्चे। संवाद
नारनौल। शहर की सबसे पुरानी श्री धार्मिक रामलीला चांदुवाड़ा इस बार सिर्फ मंचन तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कार और अभिनय की विरासत सौंपने की तैयारी में जुटी है। 8 अक्तूबर से शुरू होने वाली रामलीला के लिए पुराने कलाकार करीब 10 से 15 नए कलाकारों को अभिनय की बारीकियां सिखा रहे हैं। इनमें पांच से 25 वर्ष तक की उम्र के बच्चे और युवा शामिल हैं।
रामलीला को लेकर कलाकारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मंचन को बेहतर बनाने के लिए करीब एक महीने से नियमित रिहर्सल चल रही है। यह रिहर्सल 9 सितंबर से शुरू हुई थी और रोजाना रात 9 से 12 बजे तक करीब 50 कलाकार अभ्यास में जुटते हैं।
दिनभर अपने कामकाज में व्यस्त रहने के बाद कलाकार रात को रामलीला के अभ्यास के लिए पहुंचते हैं। तीन घंटे की रिहर्सल में संवाद, अभिनय, मंच संचालन और पात्रों की भूमिका को असरदार बनाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
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रामलीला से जुड़े दीपक हरित ने बताया कि पंडित रेवतिनंदन की ओर से शुरू की गई इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए नई पीढ़ी को इससे जोड़ना जरूरी है। इसी सोच के साथ इस बार बच्चों और युवाओं को खास तौर पर अभिनय के लिए तैयार किया जा रहा है।
पुराने कलाकार अपने अनुभव के आधार पर नए कलाकारों को संवाद बोलने से लेकर पात्र के भाव और मंच पर अभिनय तक की बारीकियां सिखा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भगवान राम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने का भी जरिया है। रामलीला की तैयारियां करीब दो महीने तक चलती हैं।
दिन में काम और रात में रिहर्सल करना चुनौतीपूर्ण जरूर है लेकिन आस्था और उत्साह के चलते कलाकार पूरी लगन से जुटे हैं। इस बार दर्शकों को अभिनय के साथ कुछ नए प्रयोग भी देखने को मिलेंगे।
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रामलीला को लेकर कलाकारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मंचन को बेहतर बनाने के लिए करीब एक महीने से नियमित रिहर्सल चल रही है। यह रिहर्सल 9 सितंबर से शुरू हुई थी और रोजाना रात 9 से 12 बजे तक करीब 50 कलाकार अभ्यास में जुटते हैं।
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दिनभर अपने कामकाज में व्यस्त रहने के बाद कलाकार रात को रामलीला के अभ्यास के लिए पहुंचते हैं। तीन घंटे की रिहर्सल में संवाद, अभिनय, मंच संचालन और पात्रों की भूमिका को असरदार बनाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
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रामलीला से जुड़े दीपक हरित ने बताया कि पंडित रेवतिनंदन की ओर से शुरू की गई इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए नई पीढ़ी को इससे जोड़ना जरूरी है। इसी सोच के साथ इस बार बच्चों और युवाओं को खास तौर पर अभिनय के लिए तैयार किया जा रहा है।
पुराने कलाकार अपने अनुभव के आधार पर नए कलाकारों को संवाद बोलने से लेकर पात्र के भाव और मंच पर अभिनय तक की बारीकियां सिखा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भगवान राम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने का भी जरिया है। रामलीला की तैयारियां करीब दो महीने तक चलती हैं।
दिन में काम और रात में रिहर्सल करना चुनौतीपूर्ण जरूर है लेकिन आस्था और उत्साह के चलते कलाकार पूरी लगन से जुटे हैं। इस बार दर्शकों को अभिनय के साथ कुछ नए प्रयोग भी देखने को मिलेंगे।