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Mahendragarh-Narnaul News: 370 साल पुराना इतिहास, भाईचारे की मिसाल गांव तोबड़ा

Sat, 10 Jan 2026 10:58 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jan 2026 10:58 PM IST
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A 370-year-old history, a village that exemplifies brotherhood: Tobra village.
फोटो नंबर- 18गांव तोबड़ा में ​स्थित श्याम बाबा का मंदिर। संवाद
मंडी अटेली। कस्बे की सीमा से सटे गांव तोबड़ा अपने गौरवशाली इतिहास, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे के लिए आज भी क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। गांव के पूर्व सरपंच राम सिंह के अनुसार, तोबड़ा को बसे हुए लगभग 370 वर्ष हो चुके हैं। इतिहासकारों और बुजुर्गों की मान्यता है कि इस गांव को बसाने का श्रेय पहलाद सिंह जाट को जाता है जिन्होंने इस क्षेत्र में गांव की नींव रखी।
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तोबड़ा गांव कभी निर्विरोध पंचायत गठन के लिए जाना जाता था। वर्ष 2000 तक यहां ग्राम पंचायत में लगातार निर्विरोध सरपंच चुने जाते रहे। यह अपने आप में सामाजिक एकता और परिपक्व लोकतांत्रिक सोच का उदाहरण है।
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गांव में चार प्रमुख जातियां जाट, ब्राह्मण, जांगिड़ और अनुसूचित जाति निवास करती हैं। वर्ष 2000 से पहले ये चारों समुदाय आपसी सहमति और भाईचारे के साथ बारी-बारी से निर्विरोध सरपंच चुनते थे, जो आज भी गांव के इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय माना जाता है।
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सामाजिक समरसता की मिसाल तोबड़ा में आज भी देखने को मिलती है। गांव में यदि किसी परिवार में शादी या कोई बड़ा आयोजन होता है तो पूरे गांव के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है जिसे स्थानीय भाषा में चूल्हा न्योत कहा जाता है।

धार्मिक दृष्टि से भी तोबड़ा का विशेष महत्व है। गांव में भगवान श्याम बाबा की मान्यता आज भी गहरी आस्था के साथ कायम है। गांव के लोग श्याम बाबा को अपना कुल गुरु मानते हैं। श्याम बाबा का मंदिर काफी पुराना है जिसका अब जीर्णोद्धार कर नया भव्य मंदिर बना दिया गया है। यह मंदिर गांव की आस्था और एकता का केंद्र बना हुआ है।
सरपंच आशा देवी ने बताया गांव में खेल स्टेडियम, पानी की निकासी का प्रस्ताव करके दिया हुआ है अभी मंजूर नहीं हुआ है। गांव के जोहड़ को नहरी पानी से जोड़ा जाए ताकि क्षेत्र में हरियाली बरकरार रहे। इससे आसपास पानी का जल स्रोत बढ़ाने में कारगर साबित हो।
भौगोलिक दृष्टि से तोबड़ा अटेली मंडी से सटा हुआ गांव है और रेल लाइन के दक्षिणी हिस्से में बसा हुआ गांव है। इसकी जमीन रेल लाइन के दोनों तरफ फैली हुई है। गांव की मुख्यालय से दूरी महज 16 किलोमीटर है जबकि दिल्ली जैसलमेर नेशनल हाईवे से यह गांव मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है।




तोबड़ा की साक्षरता दर 95 प्रतिशत


गांव की वर्तमान आबादी लगभग 1200 के आसपास है। साक्षरता दर 95 प्रतिशत है व यहां के अधिकतर लोग खेती को ही अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाए हुए हैं। खास बात यह है कि सभी जातियों के लोगों के पास अपनी अपनी जमीन है और वे आत्मनिर्भरता के साथ कृषि कार्य करते हैं।
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