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सरसों बिक्री की मंजूरी के लिए किसानों ने सीएम विंडों पर शिकायत
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अमर उजाला ब्यूरो
कनीना। उपमंडल के गांव रसूलपुर के किसानों ने प्रदेश सरकार की ओर से निर्धारित पोर्टल पर अपनी सरसों बिक्री के लिए ऑनलाइन करवाने के बावजूद मंजूरी नहीं मिलने के चलते सीएम विंडो पर शिकायत दी। किसानों ने सरसों खरीद के लिए पंजीकरण कराने वालों को मंजूरी दिए जाने की मांग की ।
किसान राहुल, अनिल कुमार, मूलचंद, नरेश कुमार, सतबीर सिंह, कोयल देवी ने बताया कि उन्होंने माह दिसम्बर 2018 में ऑनलाइन पंजीकरण करवाया था। जिसके लिए वो अपनी सरसों को लेकर निर्धारित तिथि पांच अप्रैल को कनीना मंडी पहुंचे तो उनको टोकन जारी कर मंडी में उनकी सरसों से भरे वाहनों की एंट्री हो गई। इसके बाद जब जांच की तो पता चला की ऑनलाइन स्थिति अप्रूवड होने की बजाय पेंडिंग दिखा रहा है ।जिससे सरसों नहीं बिक सकती। इस पर उपरोक्त किसान मार्केट कमेटी कार्यालय, सरल केंद्र सहित अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। सभी अधिकारियों ने सरसों खरीदने में असमर्थता जता दी। इससे परेशान होकर किसानों ने शुक्रवार शाम को सीएम विंडो पर शिकायत देकर मदद की गुहार लगाई। किसानों ने कहा कि सरसों का एक एक दाना खरीदने का दावा पूरी तरह से अधूरा है। सरकार की ओर से गलत आंकड़े दिए जा रहे हैं।
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कनीना। उपमंडल के गांव रसूलपुर के किसानों ने प्रदेश सरकार की ओर से निर्धारित पोर्टल पर अपनी सरसों बिक्री के लिए ऑनलाइन करवाने के बावजूद मंजूरी नहीं मिलने के चलते सीएम विंडो पर शिकायत दी। किसानों ने सरसों खरीद के लिए पंजीकरण कराने वालों को मंजूरी दिए जाने की मांग की ।
किसान राहुल, अनिल कुमार, मूलचंद, नरेश कुमार, सतबीर सिंह, कोयल देवी ने बताया कि उन्होंने माह दिसम्बर 2018 में ऑनलाइन पंजीकरण करवाया था। जिसके लिए वो अपनी सरसों को लेकर निर्धारित तिथि पांच अप्रैल को कनीना मंडी पहुंचे तो उनको टोकन जारी कर मंडी में उनकी सरसों से भरे वाहनों की एंट्री हो गई। इसके बाद जब जांच की तो पता चला की ऑनलाइन स्थिति अप्रूवड होने की बजाय पेंडिंग दिखा रहा है ।जिससे सरसों नहीं बिक सकती। इस पर उपरोक्त किसान मार्केट कमेटी कार्यालय, सरल केंद्र सहित अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। सभी अधिकारियों ने सरसों खरीदने में असमर्थता जता दी। इससे परेशान होकर किसानों ने शुक्रवार शाम को सीएम विंडो पर शिकायत देकर मदद की गुहार लगाई। किसानों ने कहा कि सरसों का एक एक दाना खरीदने का दावा पूरी तरह से अधूरा है। सरकार की ओर से गलत आंकड़े दिए जा रहे हैं।
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