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Mahendragarh-Narnaul News: 8 घंटे की ड्यूटी, 16 घंटे का काम? मेडिकल कॉलेज में होमगार्ड जवान और प्रबंधन आमने-सामने
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फोटो नंबर-09मेडिकल कॉलेज में जानकारी लेती पुलिस।
नारनौल। कोरियावास मेडिकल कॉलेज में तैनात होमगार्ड जवानों और कॉलेज प्रबंधन के बीच ड्यूटी रोस्टर, कार्य अवधि और व्यवहार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जवानों ने आठ घंटे के बजाय 16 घंटे तक ड्यूटी कराने और मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगाए हैं।
वहीं प्रबंधन ने जवानों पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और अन्य कर्मचारियों के काम में बाधा डालने का आरोप लगाया है। सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से जानकारी ली।
होमगार्ड जवान अशोक (नंबर 615) ने बताया कि सितंबर में उनकी ड्यूटी मेडिकल कॉलेज में लगाई गई थी। उसका आरोप है कि चार सितंबर को रेस्ट होने के बावजूद उसके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया गया। उसने नोटिस का जवाब दिया लेकिन इस संबंध में उनके जवाब में जानकारी संतोषजनक नहीं मिली।
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अशोक ने सुपरिंटेंडेंट बलवंत, स्टेनो रवि सहित अन्य कर्मचारियों पर परेशान करने के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कॉलेज में करीब 50 होमगार्ड जवान तैनात हैं और ड्यूटी के दौरान लगभग 13 जवान दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं।
होमगार्ड जवान सतबीर सिंह ने आरोप लगाया कि नाइट ड्यूटी करने वालों को कई बार सुबह बुला लिया जाता है जबकि सुबह की ड्यूटी वालों से भी 16 घंटे तक काम लिया जाता है। उनके अनुसार निर्धारित ड्यूटी आठ घंटे की है। विवाद के बाद निदेशक से शिकायत करने पर उन्हें कॉलेज से रिलीव करने का पत्र जारी कर दिया गया। होमगार्ड जवानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रबंधन ने सुरक्षा का दिया हवाला
कॉलेज निदेशक बृजेंद्र सिंह ढिल्लो ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर रोस्टर में बदलाव किया गया है। उनके अनुसार कॉलेज पहुंचने पर मुख्य गेट के पास आठ से दस जवान पेड़ के नीचे खड़े मिले जिनमें कुछ सिविल ड्रेस और कुछ वर्दी में थे। जवानों ने बताया कि उनकी ड्यूटी दो बजे से शुरू होगी जबकि वे अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी में बाधा डाल रहे थे। उन्होंने नाइट ड्यूटी में भी लापरवाही का आरोप लगाया। निदेशक ने कहा कि कॉलेज में रोज 300 से 350 मरीज आते हैं और परिसर में चोरी की घटनाएं भी हुई हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जवानों से केवल सुरक्षा संबंधी कार्य ही लिए जाते हैं।
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वहीं प्रबंधन ने जवानों पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और अन्य कर्मचारियों के काम में बाधा डालने का आरोप लगाया है। सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से जानकारी ली।
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होमगार्ड जवान अशोक (नंबर 615) ने बताया कि सितंबर में उनकी ड्यूटी मेडिकल कॉलेज में लगाई गई थी। उसका आरोप है कि चार सितंबर को रेस्ट होने के बावजूद उसके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया गया। उसने नोटिस का जवाब दिया लेकिन इस संबंध में उनके जवाब में जानकारी संतोषजनक नहीं मिली।
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अशोक ने सुपरिंटेंडेंट बलवंत, स्टेनो रवि सहित अन्य कर्मचारियों पर परेशान करने के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कॉलेज में करीब 50 होमगार्ड जवान तैनात हैं और ड्यूटी के दौरान लगभग 13 जवान दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं।
होमगार्ड जवान सतबीर सिंह ने आरोप लगाया कि नाइट ड्यूटी करने वालों को कई बार सुबह बुला लिया जाता है जबकि सुबह की ड्यूटी वालों से भी 16 घंटे तक काम लिया जाता है। उनके अनुसार निर्धारित ड्यूटी आठ घंटे की है। विवाद के बाद निदेशक से शिकायत करने पर उन्हें कॉलेज से रिलीव करने का पत्र जारी कर दिया गया। होमगार्ड जवानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रबंधन ने सुरक्षा का दिया हवाला
कॉलेज निदेशक बृजेंद्र सिंह ढिल्लो ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर रोस्टर में बदलाव किया गया है। उनके अनुसार कॉलेज पहुंचने पर मुख्य गेट के पास आठ से दस जवान पेड़ के नीचे खड़े मिले जिनमें कुछ सिविल ड्रेस और कुछ वर्दी में थे। जवानों ने बताया कि उनकी ड्यूटी दो बजे से शुरू होगी जबकि वे अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी में बाधा डाल रहे थे। उन्होंने नाइट ड्यूटी में भी लापरवाही का आरोप लगाया। निदेशक ने कहा कि कॉलेज में रोज 300 से 350 मरीज आते हैं और परिसर में चोरी की घटनाएं भी हुई हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जवानों से केवल सुरक्षा संबंधी कार्य ही लिए जाते हैं।