{"_id":"b04e72b9a6c74f7a0f9f27c4a617010e","slug":"4-lac-plaenality-on-wrong-treatment-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजी अस्पताल पर 4 लाख का हर्जाना ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निजी अस्पताल पर 4 लाख का हर्जाना
महेंद्रगढ़ / नारनौल
Updated Mon, 01 Feb 2016 11:15 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला उपभोक्ता फोरम ने महेंद्रगढ़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल पर गलत इलाज करने के आरोप में 4 लाख हर्जाना भरने की सजा सुनाई है। यह फैसला फोरम के चेयरमैन बुधदेव यादव और सदस्य ऊषा यादव, लोकेश कुमार नंदवानी ने सुनाई। इस निजी अस्पताल पर गांव स्याणा निवासी सत्यवान के गलत इलाज करने का आरोप लगा था।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता के अधिवक्ता कर्ण सिंह यादव ने बताया कि शिकायतकर्ता सत्यवान 8 फरवरी 2011 को बुखार होने पर इलाज के लिए महेंद्रगढ़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में आया था। अस्पताल के चिकित्सक ने सत्यवान को अस्पताल में दाखिल कर लिया था 21 फरवरी 2011 को तबियत ज्यादा खराब होने पर हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया था। सत्यवान के परिजन उसे इलाज के लिए जयपुर ले गए। जहां चिकित्सकों ने सत्यवान को बताया कि सही दवाईयां न देने के कारण आपके पेट में संक्रमण से जहर बन गया है इससे आंत में टीबी हो गई है। जिसके बाद चिकित्सकों ने सत्यवान की आंत का आपरेशन किया और करीब एक माह तक अस्पताल में भर्ती रखा। काफी दिनों तक सत्यवान का इलाज चलता रहा था। जिस पर उसका काफी पैसा खर्च हो गया।
विज्ञापन
यादव ने बताया कि 5 मार्च 2013 को शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में अस्पताल के चिकित्सक द्वारा बीएएमएस का डिग्रीधारक होने पर एलोपैथी पद्धति से इलाज करते समय चिकित्सीय लापरवाही बरती गई। जिसके कारण सत्यवान का शारीरिक, मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सुनवाई के दौरान फोरम ने अस्पताल पर 4 लाख रुपये का हर्जाना के अलावा दस प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 22 सौ रुपये वकील की फीस देने का आदेश सुनाया है।
विज्ञापन
हर्जाना बीमा राशि करेगी वहन
नारनौल। अस्पताल व चिकित्सक दोनों की बीमित हैं। यदि किसी कारणवश इलाज के दौरान किसी भी प्रकार की गलती होती है और मरीज को नुकसान होता है तो इंश्योरेंश कंपनी इसकी राशि वहन करती है। इस प्रकार अब अस्पताल पर लगाया गए हर्जाने का भुगतान भी संबंधित बीमा कंपनी द्वारा ही किया जाएगा। हालांकि इसके लिए अस्पताल को सारी कागजी कार्रवाई पूरी करनी होती है।