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बवाना में 25 परिवारों को गांव से निकाला
ब्यूरो/अमर उजाला नारनाैल
Updated Sun, 23 Aug 2015 01:18 AM IST
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महेंद्रगढ़। स्टेडियम की जमीन पर कब्जा जमाए बैठे 25 परिवारों को ग्रामीणों ने पंचायत कर सामूहिक फैसला लेते हुए गांव से निकाल दिया।
इन परिवारों को 25 से 30 ट्रैक्टरों में इनका सामान लादकर माजरा चुंगी पर छोड़ दिया। इसके बाद गांव की जमीन पर चारदीवारी के लिए नींव खोद दी और बनाए अवैध मकान गिरा दिए।
परिवारों का आरोप है कि उनके पास 26 अगस्त तक की जमीन पर रहने का स्टे ऑर्डर था और उन्हें गांव से मारपीट कर जबरदस्ती निकाला गया है। परिवारों ने माजरा चुंगी के पास खाली जगह पर डेरा जमाया है।
गौरतलब है कि सपेरा जाति के 25 परिवार बवाना गांव में 15 से 20 साल से रह रहे थे। परिवारों के मुखिया रामकुमार नाथ ने कहा कि उनको गांव से जबरदस्ती पीटकर निकाला गया है।
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ग्रामीणों ने जेसीबी की सहायता से उनके घरों को तोड़ दिया गया, जब वे आगे अड़े तो गांव के 400 लोगों ने उनके परिवारों को पीटना शुरू कर दिया। उनके परिवारों की महिलाएं को भी पीटने का आरोप लगाया।
रामकुमार नाथ का कहना है कि उनके पास 26 अगस्त तक की स्टे थी, इसके बावजूद ग्रामीणों ने उन्हें मारपीट कर गांव से भगा दिया। उनके सामान को तोड़ा गया। रामकुमार नाथ ने बताया कि उनके पास गांव के राशनकार्ड, वोटर कार्ड और आधार कार्ड बने हुए हैं।
जब उनको उस गांव में वोट डालने का अधिकार दिया है तो उन्हें रहने का भी अधिकार मिलना चाहिए। रामकुमार नाथ के मुताबिक वे अगले एक या दो दिन में डीसी आवास पर धरना शुरू करेंगे।
गांव के सरपंच और पंचायत का पक्ष
बवाना गांव के सरपंच रतिराम और गांव के वरिष्ठ लोगों से इस बारे में बात की तो उनका साफ कहना था कि ये लोग अवैध रूप से गांव में रह रहे थे। इसका कोर्ट में केस चल रहा था और दो बार केस हार चुके हैं।
ग्रामीणों ने शुक्रवार को एक पंचायत का आयोजन किया, इसमें इनको बुलाया गया। पंचायत में जब ये नहीं आए तो पूरी गांव के लोग जोहड़ में पहुंचे और वहां इनके घरों के पास पंचायत की और इन्हें वहां बुलाया। इसके बाद इन्हें कहा गया कि इस जमीन पर स्टेडियम बनना है, आप जगह खाली कर दें।
इन लोगों ने यहां से जाने के लिए ट्रैक्टरों की मांग की तो करीब 25 से 30 ट्रैक्टर उन्हें उपलब्ध करवाए। इन परिवारों ने माजरा चुंगी पर ही उतारने को कहा तो गांव के ट्रैक्टर चालक उन्हें वहां पर छोड़ आए। सरपंच रतिराम ने कहा कि गांव में उनके साथ कोई मारपीट जैसी घटना नहीं हुई, अगर वे ऐसा आरोप लगा रहे हैं तो वो बिल्कुल गलत है।
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इन परिवारों को 25 से 30 ट्रैक्टरों में इनका सामान लादकर माजरा चुंगी पर छोड़ दिया। इसके बाद गांव की जमीन पर चारदीवारी के लिए नींव खोद दी और बनाए अवैध मकान गिरा दिए।
परिवारों का आरोप है कि उनके पास 26 अगस्त तक की जमीन पर रहने का स्टे ऑर्डर था और उन्हें गांव से मारपीट कर जबरदस्ती निकाला गया है। परिवारों ने माजरा चुंगी के पास खाली जगह पर डेरा जमाया है।
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गौरतलब है कि सपेरा जाति के 25 परिवार बवाना गांव में 15 से 20 साल से रह रहे थे। परिवारों के मुखिया रामकुमार नाथ ने कहा कि उनको गांव से जबरदस्ती पीटकर निकाला गया है।
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ग्रामीणों ने जेसीबी की सहायता से उनके घरों को तोड़ दिया गया, जब वे आगे अड़े तो गांव के 400 लोगों ने उनके परिवारों को पीटना शुरू कर दिया। उनके परिवारों की महिलाएं को भी पीटने का आरोप लगाया।
रामकुमार नाथ का कहना है कि उनके पास 26 अगस्त तक की स्टे थी, इसके बावजूद ग्रामीणों ने उन्हें मारपीट कर गांव से भगा दिया। उनके सामान को तोड़ा गया। रामकुमार नाथ ने बताया कि उनके पास गांव के राशनकार्ड, वोटर कार्ड और आधार कार्ड बने हुए हैं।
जब उनको उस गांव में वोट डालने का अधिकार दिया है तो उन्हें रहने का भी अधिकार मिलना चाहिए। रामकुमार नाथ के मुताबिक वे अगले एक या दो दिन में डीसी आवास पर धरना शुरू करेंगे।
गांव के सरपंच और पंचायत का पक्ष
बवाना गांव के सरपंच रतिराम और गांव के वरिष्ठ लोगों से इस बारे में बात की तो उनका साफ कहना था कि ये लोग अवैध रूप से गांव में रह रहे थे। इसका कोर्ट में केस चल रहा था और दो बार केस हार चुके हैं।
ग्रामीणों ने शुक्रवार को एक पंचायत का आयोजन किया, इसमें इनको बुलाया गया। पंचायत में जब ये नहीं आए तो पूरी गांव के लोग जोहड़ में पहुंचे और वहां इनके घरों के पास पंचायत की और इन्हें वहां बुलाया। इसके बाद इन्हें कहा गया कि इस जमीन पर स्टेडियम बनना है, आप जगह खाली कर दें।
इन लोगों ने यहां से जाने के लिए ट्रैक्टरों की मांग की तो करीब 25 से 30 ट्रैक्टर उन्हें उपलब्ध करवाए। इन परिवारों ने माजरा चुंगी पर ही उतारने को कहा तो गांव के ट्रैक्टर चालक उन्हें वहां पर छोड़ आए। सरपंच रतिराम ने कहा कि गांव में उनके साथ कोई मारपीट जैसी घटना नहीं हुई, अगर वे ऐसा आरोप लगा रहे हैं तो वो बिल्कुल गलत है।