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समाजसेवी फकीर सिंह के सिद्यांतों को भूलना संभव नहीं: डॉ अभयसिंह
Updated Sun, 27 Aug 2017 10:16 PM IST
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समाजसेवी फकीर सिंह के सिद्धांतों को भूलना संभव नहीं : डॉ. अभयसिंह
अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। बुरे वक्त में सहयोगी बना व्यक्ति हमेशा याद रहता है। समाज उसके सिद्धांतों का अनुसरण करता है। यही खूबी समाजसेवी फकीर सिंह की रही। उन्होंने निजी स्वार्थों से अधिक दूसरों की जरूरत को दिया। यह विचार हलका विधायक डॉ. अभयसिंह यादव ने रविवार को फकीर सिंह और भोली देवी की मूर्ति का अनावरण करने के बाद व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि निजी जीवन की आवश्यकताएं सभी पूरी करते हैं। लेकिन, दूसरों के दुख में कोई विरला ही भागीदार बनेगा। जरूरत पड़ने पर अमीरों को सलाह और सहायता देने वालों की भीड़ जुट जाएगी। दूसरी ओर गरीब को मांगने पर भी मदद नहीं मिलती। यह सोच सामाजिक एकता के लिए घातक है। गरीबों और अमीरों के बीच दीवार बननी शुरू हो गई। समाधान के लिए युवा पीढ़ी को जागरूक होना पड़ेगा। उन्हें आर्थिक रूप से पिछड़ों को विशेष सम्मान और सहायता देनी होगी। समाजसेवी फकीर सिंह राजपूत ने हमेशा गरीबों को सम्मान दिया है। लड़की की शादी और बीमारी के दौरान गुपचुप आर्थिक मदद देना उनकी आदत रही है। उन्होंने कभी भी सहायता राशि का ब्याज नहीं लिया। इस कारण समाज को उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी। लेकिन, युवाओं को उनके सिद्धांतों का अनुसरण करना होगा, ताकि दिवंगत आत्मा के अधूरे सपने पूरे हो सकें। इसके बाद समाजसेवी रहे फकीरसिंह और उसकी पत्नि की मूर्ति का अनावरण किया गया। इस मौके पर चतरू सिंह राजपूत, रमेश तंवर, प्रहलाद पहलवान, भाजपा नेता दयाराम यादव, मोतीलाल सेठ, कमल चौधरी, रामकिशन सैनी, नीरज पार्षद, सोनू तंवर, प्रताप चौधरी, निहाल सिंह राजपूत आदि उपस्थित थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। बुरे वक्त में सहयोगी बना व्यक्ति हमेशा याद रहता है। समाज उसके सिद्धांतों का अनुसरण करता है। यही खूबी समाजसेवी फकीर सिंह की रही। उन्होंने निजी स्वार्थों से अधिक दूसरों की जरूरत को दिया। यह विचार हलका विधायक डॉ. अभयसिंह यादव ने रविवार को फकीर सिंह और भोली देवी की मूर्ति का अनावरण करने के बाद व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि निजी जीवन की आवश्यकताएं सभी पूरी करते हैं। लेकिन, दूसरों के दुख में कोई विरला ही भागीदार बनेगा। जरूरत पड़ने पर अमीरों को सलाह और सहायता देने वालों की भीड़ जुट जाएगी। दूसरी ओर गरीब को मांगने पर भी मदद नहीं मिलती। यह सोच सामाजिक एकता के लिए घातक है। गरीबों और अमीरों के बीच दीवार बननी शुरू हो गई। समाधान के लिए युवा पीढ़ी को जागरूक होना पड़ेगा। उन्हें आर्थिक रूप से पिछड़ों को विशेष सम्मान और सहायता देनी होगी। समाजसेवी फकीर सिंह राजपूत ने हमेशा गरीबों को सम्मान दिया है। लड़की की शादी और बीमारी के दौरान गुपचुप आर्थिक मदद देना उनकी आदत रही है। उन्होंने कभी भी सहायता राशि का ब्याज नहीं लिया। इस कारण समाज को उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी। लेकिन, युवाओं को उनके सिद्धांतों का अनुसरण करना होगा, ताकि दिवंगत आत्मा के अधूरे सपने पूरे हो सकें। इसके बाद समाजसेवी रहे फकीरसिंह और उसकी पत्नि की मूर्ति का अनावरण किया गया। इस मौके पर चतरू सिंह राजपूत, रमेश तंवर, प्रहलाद पहलवान, भाजपा नेता दयाराम यादव, मोतीलाल सेठ, कमल चौधरी, रामकिशन सैनी, नीरज पार्षद, सोनू तंवर, प्रताप चौधरी, निहाल सिंह राजपूत आदि उपस्थित थे।
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