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निजी अस्पतालों में इमरजेंसी और ओपीडी सेवा बंद, मरीज हुए परेशान

Mon, 10 Jun 2019 12:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jun 2019 12:00 AM IST
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निजी अस्पतालों में इमरजेंसी और ओपीडी सेवा बंद, मरीज हुए परेशान

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नारनौल। ओम अस्पताल में उपचार के दौरान बुजुर्ग महिला की मौत के दो डॉक्टरों पर केस दर्ज होने पर निजी अस्पतालों के डॉक्टर्स रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इससे जिले की सभी निजी अस्पतालों में ओपीडी और इमरजेंसी सेवा बंद रही। इससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। दूसरी ओर इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
बता दें कि खामपुरा निवासी ओमपती (58) के पैर का ऑपरेशन 21 मई को हुआ था। सात जून को पुन: जांच के लिए अस्पताल लाया गया तो डॉक्टरों ने बताया कि पैर में इंफेक्शन हो गया और भर्ती होना होगा। आठ जून को उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजनों ने पहले अस्पताल में हंगामा किया था। इसके बाद शाम करीब साढ़े चार बजे से महावीर चौक पर शव को रखकर जाम लगा दिया था। रात दस बजे अधिकारियों की काफी मशक्कत के परिजनों को समझाकर और डॉक्टर पर मुकदमा दर्ज करके जाम खुलवाया गया। लेकिन, दो डॉक्टरों पर केस दर्ज होने से महेंद्रगढ़ जिले के सभी निजी अस्पतालों के डॉक्टर्स रविवार से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे निजी अस्पतालों में ओपीडी और इमरजेंसी के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। गंभीर मरीजों को बाहर जाना पड़ा। जिले में सभी निजी अस्पतालों में नए मरीजों का उपचार नहीं हो रहा हैं। साथ ही अस्पतालों ने बाहर नोटिस लगा दिया है कि आज अस्पताल बंद है और डॉक्टर्स हड़ताल पर है।
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आईएमए की मांग दूसरे पक्ष पर केस दर्ज हो
आईएमए के जिला प्रधान डॉ. रोहताश यादव ने कहा कि हड़ताल के बारे में पहले की प्रशासन को जानकारी दे दी गई थी। पूरे जिले में निजी अस्पताल, डेंटल और आयुर्वेद के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में सिर्फ जो मरीज पहले से भर्ती है, उनका इलाज चल रहा है। प्रधान ने कहा कि हमारी मांग है कि अस्पताल में हंगामा करने वाले पर केस दर्ज हो, इन लोगों के कारण अस्पताल में दूसरे मरीजों को परेशानी हुई, डॉ. राज कुमार पर दर्ज हुई जान से मारने की धमकी की एफआईआर के तहत दूसरे पक्ष पर भी केस दर्ज हो। सुधीर नामक युवक सोशल मीडिया में डॉक्टरों की इमेज खराब कर रहा है, इस पर आईटी एक्ट में केस दर्ज हो। इसके अलावा महावीर चौक को जाम करने पर आम लोगों को परेशानी हुई, ऐसे में जाम लगा रहे लोगों पर केस दर्ज किया जाए व डॉक्टरों को सुरक्षा दी जाए। डॉ. रोहताश ने कहा कि यदि मांगे नहीं मानी गई तो सोमवार से धरना प्रदर्शन होगा। इसके बाद प्रदेश स्तर पर निजी अस्पताल संचालक हड़ताल में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि नारनौल शहर में करीब 25-30 निजी अस्पताल है।
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मरीजों की बढ़ेगी परेशानी
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में निजी अस्पतालों की हड़ताल लंबी चली तो मरीजों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। रविवार को सरकारी जिला अस्पताल में गायनी वार्ड में निजी डॉक्टरों के हड़ताल से मरीजों की संख्या में कोई फर्क नहीं पड़ा। इमरजेंसी में करीब 25-30 मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे में गंभीर मरीजों को दिल्ली, जयपुर या रोहतक जाना पड़ेगा।
महिला का शव भेजा रोहतक
परिजनों की मांग पर पुलिस ने शव को रोहतक पीजीआई भेज दिया। रिश्तेदार परमजीत ने बताया शव का पोस्टमार्टम हो गया है। उन्होंने बताया कि डॉ. राज कुमार ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए बदसलूकी की और गोली मारने की धमकी दी थी। डॉ. पंकज ने बिना कागज के महिला को रेफर कर दिया। एसपी चंद्रमोहन ने आश्वासन दिया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार आरोपी डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाएगी। परमजीत ने कहा कि महिला की मौत में डॉक्टरों की कहीं ना कहीं लापरवाही हुई है।

क्या है मामला-खामपुरा निवासी नरेश कुमार ओम अस्पताल में 21 मई को मां ओमपती (58) के पैर का ऑपरेशन कराया था। 25 मई को पैर को दोबारा चेक करवाया गया था। सात जून को पुन: जांच करवाने के लिए आए तो डॉक्टरों ने बताया कि पैर में इंफेक्शन हो गया और भर्ती होना होगा। शनिवार सुबह करीब आठ बजे मां को कुछ ग्लूकोज में इंजेक्शन दिया था। पीड़ित ने डॉक्टरों को तबीयत बिगड़ने की बात बताई। इसके बाद भी डॉक्टर लापरवाही बरतते रहे। सुबह 10 बजे डॉक्टरों ने मां को हायर सेंटर रेफर कर दिया। जब जयपुर हार्ट में लेकर गये तो डॉक्टर ने मां को मृत घोषित कर दिया। पीड़ित ओम अस्पताल आए तो डॉक्टरों ने दूसरे अस्पताल के डॉक्टर को बुलाया और उनसे जांच के कागज लेकर फाड़ दिए। आरोप है कि डॉक्टरों ने पीड़ितों को गोली मारने की धमकी दी। गुस्साएं परिजनों ने इसके बाद अस्पताल के बाहर हंगामा किया और देर रात तक महावीर चौक पर जाम लगा दिया था। देर रात सिटी थाना पुलिस ने डॉ. पंकज परासर और डॉ. राज कुमार पर आईपीसी की धारा 201, 506 व 34 में केस दर्ज कर लिया था।
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