{"_id":"5b69f2184f1c1b07788b8317","slug":"11533669912-mahendragarh-narnaul-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोडवेज का चक्का रहा जाम, भटकते रहे यात्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोडवेज का चक्का रहा जाम, भटकते रहे यात्री
Updated Wed, 08 Aug 2018 12:55 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल/महेंद्रगढ़। रोडवेज यूनियनों के आह्वान पर मंगलवार को रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर रोडवेज का चक्का जाम कर दिया। रात 12 बजे के बाद कोई भी बस नारनौल बस स्टैंड से नहीं चली। इसके चलते रोडवेज बसें दिनभर बस स्टैंड परिसर और कार्यशाला में शो पीस बनकर खड़ी रही। हड़ताल में नारनौल रोडवेज के 322 कर्मचारी शामिल रहे। वहीं, हड़ताल के चलते विभाग को 15-16 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। रोडवेज का चक्का जाम रहने पर निजी वाहन चालकों ने जमकर चांदी कूटी। चक्का जाम को सफल बनाने के लिए रोडवेज की यूनियनें भी एकजुट दिखाई दी। सुबह से ही यूनियन के नेताओं ने रोडवेज कार्यशाला के बाहर धरना-प्रदर्शन कर बसों का चक्का जाम किया।
रोडवेज के चक्का जाम के चलते किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए मंगलवार सुबह से ही भारी संख्या में पुलिस बल बस स्टैंड के आसपास तैनात रहा। वहीं चक्का जाम के दौरान सीटीएम सुमित सिहाग ड्यूटी मैजिस्ट्रेट के रूप में तैनात रहे।
बता दें कि रोडवेज यूनियनें काफी समय से मोटर व्हीकल संशोधन बिल-2017 और 700 बसें ठेेके पर लेने का विरोध कर रही है। इन मांगों को लेकर यूनियन प्रतिनिधियों की कई बार सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता भी हुई है, लेकिन हर बार वार्ता में कर्मचारियों की मांगों पर सहमति नहीं बनी। इसके विरोध में रोडवेज यूनियनों ने 23 जुलाई को प्रदेश में रोडवेज का चक्का जाम करने की घोषणा की थी। इस पूर्व घोषणा के अनुसार मंगलवार को जिला महेंद्रगढ़ के रोडवेज कर्मचारियों ने बसों का चक्का जाम रखा। इसके चलते रोडवेज यूनियन कर्मचारी मंगलवार सुबह से ही नारनौल बस स्टैंड के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। रोडवेज का चक्का जाम रहने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक जाने पर भारी परेशानी झेलनी पड़ी। जीएम रोडवेज बलवंत सिंह ने कहा कि हड़ताल के कारण कोई भी बस नहीं चल सकी।
विज्ञापन
596 में से 322 कर्मचारी रहे हड़ताल पर
नारनौल रोडवेज कार्यालय में कुल 596 कर्मचारी कार्यरत है। इसमें 322 कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल हुए। इनमें 146 परिचालक, 164 चालक, 6 यार्ड मास्टर, 3 बुकिंग काउंटर कर्मचारी, एक वर्कशाप से, एक डग ड्राइवर व एक टीए ब्रांच कर्मचारी शामिल है।
यूनियन नेताओं ने की नारेबाजी
रोडवेज के विभिन्न यूनियन के नेताओं नारनौल रोडवेज डिपो प्रधान राजेश डांगी, राजपाल यादव व सर्व कर्मचारी संघ के किरोडीमल सैनी, महेंद्र सिंह सहित अन्य कर्मचारी नेताओं ने सुबह से ही रोडवेज कार्यशाला के बाहर धरना देकर बैठ गए।कर्मचारियों ने सरकारी विरोध नारेबाजी कर अपना रोष जताया। कर्मचारी नेता राजेश डांगी ने कहा कि सरकार हठधर्मिता पर अड़ी हुई है। सरकार कर्मचारियों की कोई मांगे नहीं मान रही है। रोडवेज यूनियनें प्राइवेट बसों को परमिट दिये जाने का पुरजोर विरोध कर रही है। इसके बावजूद सरकार प्राइवेट बसों के परमिट रद्द नहीं कर रही। मजबूरी वश रोडवेज कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
नारनौल में नहीं चली 145 बसें
विभागीय अधिकारियों के अनुसार नारनौल रोडवेज के बेड़े में कुल 161 बसें शामिल है। इनमें से 145 बसें ऑन रोड हैं। लेकिन रोडवेज के पहिये थम जाने के कारण बसें बस स्टैंड व कार्यशाला में ही खड़ी रही। जिस कारण यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। विशेषकर शिक्षण संस्थाओं में पढ़ाई के लिए आने-जाने वाले विद्यार्थियों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी।
चक्का जाम होने से दिनभर भटकते रहे यात्री
बस ने चलने से यात्री दिनभर कभी बस स्टैंड के बाहर तो कभी अंदर भटकते रहे। विशेषकर दूर-दराज से आने वाली सवारियों को जिन्हें रोडवेज हड़ताल की सूचना नहीं थी। ऐसे में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसी सवारियों को निजी वाहनों में सफर करना पड़ा। बस स्टैंड के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था।
विद्यार्थी भी रहे परेशान
हड़ताल के चलते अधिक परेशानी विद्यार्थियों को झेलनी पड़ी है। विशेषतौर पर छात्राओं को क्योंकि रोडवेज बसे नहीं चलने से निजी वाहनों में अधिक भीड़ होती है। ऐसे में छात्र तो जोर आजमाइश कर बसों में घुस जाते है, लेकिन छात्राएं अधिक भीड़ होने के कारण बसों में नहीं चढ़ पाती है। ऐसे में उन्हें परेशानी हुई।
निजी वाहनों ने कूटी चांदी
रोडवेज के चक्का जाम होने से यात्रियों भी मजबूरी में निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। जिसका फायदा निजी वाहन चालकों ने जमकर उठाया। जिन्होंने सवारियों से मनचाहा किराया वसूल किया। वहीं नियमों को ताक पर रखते हुए निजी वाहन क्षमता से अधिक सवारियां अपने वाहनों में बैठाकर लेकर जाते हुए दिखाई दिए।
महेन्द्रगढ़ में भी निजी वाहन चालकों ने जमकर चांदी कूटी। वाहन चालक अपनी गाड़ियों को सवारियों से भर कर ले जा रहे थे। साथ ही उनसे निर्धारित किराए से अधिक किराया वसूल रहे थे।
महेंद्रगढ़ में 23 बसें खड़ी रही
उधर, महेंद्रगढ़ में भी चक्का जाम रहा। महेंद्रगढ़ बस स्टैंड पर 23 रोडवेज बसें खड़ी रहीं व डिपो को सवा लाख रुपये का नुकसान हुआ। नारनौल डिपो तथा झज्जर डिपो की दो बसें महेंद्रगढ़ से गई थीं। इसके अलावा कोई भी रोडवेज बस नहीं चली। बस न चलने से लोगों को परेशानी हुई।
230 फेरों में लगे 15 फेेरे
महेंद्रगढ़ से नारनौल, जयपुर, कोटा, दिल्ली, गुरुग्राम, हिसार, चंडीगढ़, रेवाड़ी आदि रूटों पर बसें चलती हैं। विभिन्न रूटों पर चलने वाली निजी एवं रोडवेज बसों के 230 चक्कर प्रतिदिन लगते हैं। चक्का जाम होने की वजह से निजी तथा अन्य राज्य की बसों के मात्र 15 ही चक्कर लगे हैं। महेंद्रगढ़ से बहरोड़ तक निजी बसों की चार बसें, हिसार से कोटपुतली-4, सीटीयू-2, राजस्थान रोडवेज-4 तथा पंजाब रोडवेज की एक बस ने फेरा लगाया। बस स्टैंड से प्रतिदिन 23 बसें विभिन्न रूटों पर चलती हैं। प्रतिदिन डिपो को सवा लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।
लोगों से बातचीत
मुझे महेंद्रगढ़ जाना था, लेकिन बस स्टैंड पर कोई बस दिखाई नहीं दी। काफी समय से बस इंतजार कर रही हूं, परंतु अभी तक कोई बस नहीं आई है।
- भगवती देवी।
मैं निजी कार्य से नारनौल आई थी। अब मुझे अपने गांव सिंघाणा जाना है। परंतु बस स्टैंड पर आकर देखा तो सिंघाणा जाने के लिए कोई रोडवेज बस नहीं है।
- प्रियंका
सुबह किसी निजी वाहन से नारनौल कालेज में पढने के लिए आई थी, लेकिन अब दौगड़ा अपने गांव जाने के लिए जाने के लिए बस स्टैंड पर पहुंची तो देखा यहां स्टैंड खाली पड़ा है। यहां कोई बस नहीं है।
- सुनीता
सुबह अपने दोस्त के साथ बाइक पर कालेज आया था। परंतु जाने के लिए कोई साधन नहीं है। दो घंटे से बस स्टैंड पर बैठे है। परंतु कोई निजी या रोडवेज बस नहीं आई है।
- योगेश
सरकार को हड़ताल के दौरान कोई वैकल्पिक व्यवस्था जरूर करनी चाहिए, क्य ंकि हड़ताल के दौरान विद्यार्थियों को आने-जाने पर अधिक परेशानी होती है। वहीं दूर-दराज जाने वाली सवारियां भी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाती।
- अतुल कुमार
विज्ञापन
नारनौल/महेंद्रगढ़। रोडवेज यूनियनों के आह्वान पर मंगलवार को रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर रोडवेज का चक्का जाम कर दिया। रात 12 बजे के बाद कोई भी बस नारनौल बस स्टैंड से नहीं चली। इसके चलते रोडवेज बसें दिनभर बस स्टैंड परिसर और कार्यशाला में शो पीस बनकर खड़ी रही। हड़ताल में नारनौल रोडवेज के 322 कर्मचारी शामिल रहे। वहीं, हड़ताल के चलते विभाग को 15-16 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। रोडवेज का चक्का जाम रहने पर निजी वाहन चालकों ने जमकर चांदी कूटी। चक्का जाम को सफल बनाने के लिए रोडवेज की यूनियनें भी एकजुट दिखाई दी। सुबह से ही यूनियन के नेताओं ने रोडवेज कार्यशाला के बाहर धरना-प्रदर्शन कर बसों का चक्का जाम किया।
रोडवेज के चक्का जाम के चलते किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए मंगलवार सुबह से ही भारी संख्या में पुलिस बल बस स्टैंड के आसपास तैनात रहा। वहीं चक्का जाम के दौरान सीटीएम सुमित सिहाग ड्यूटी मैजिस्ट्रेट के रूप में तैनात रहे।
विज्ञापन
बता दें कि रोडवेज यूनियनें काफी समय से मोटर व्हीकल संशोधन बिल-2017 और 700 बसें ठेेके पर लेने का विरोध कर रही है। इन मांगों को लेकर यूनियन प्रतिनिधियों की कई बार सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता भी हुई है, लेकिन हर बार वार्ता में कर्मचारियों की मांगों पर सहमति नहीं बनी। इसके विरोध में रोडवेज यूनियनों ने 23 जुलाई को प्रदेश में रोडवेज का चक्का जाम करने की घोषणा की थी। इस पूर्व घोषणा के अनुसार मंगलवार को जिला महेंद्रगढ़ के रोडवेज कर्मचारियों ने बसों का चक्का जाम रखा। इसके चलते रोडवेज यूनियन कर्मचारी मंगलवार सुबह से ही नारनौल बस स्टैंड के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। रोडवेज का चक्का जाम रहने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक जाने पर भारी परेशानी झेलनी पड़ी। जीएम रोडवेज बलवंत सिंह ने कहा कि हड़ताल के कारण कोई भी बस नहीं चल सकी।
विज्ञापन
596 में से 322 कर्मचारी रहे हड़ताल पर
नारनौल रोडवेज कार्यालय में कुल 596 कर्मचारी कार्यरत है। इसमें 322 कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल हुए। इनमें 146 परिचालक, 164 चालक, 6 यार्ड मास्टर, 3 बुकिंग काउंटर कर्मचारी, एक वर्कशाप से, एक डग ड्राइवर व एक टीए ब्रांच कर्मचारी शामिल है।
यूनियन नेताओं ने की नारेबाजी
रोडवेज के विभिन्न यूनियन के नेताओं नारनौल रोडवेज डिपो प्रधान राजेश डांगी, राजपाल यादव व सर्व कर्मचारी संघ के किरोडीमल सैनी, महेंद्र सिंह सहित अन्य कर्मचारी नेताओं ने सुबह से ही रोडवेज कार्यशाला के बाहर धरना देकर बैठ गए।कर्मचारियों ने सरकारी विरोध नारेबाजी कर अपना रोष जताया। कर्मचारी नेता राजेश डांगी ने कहा कि सरकार हठधर्मिता पर अड़ी हुई है। सरकार कर्मचारियों की कोई मांगे नहीं मान रही है। रोडवेज यूनियनें प्राइवेट बसों को परमिट दिये जाने का पुरजोर विरोध कर रही है। इसके बावजूद सरकार प्राइवेट बसों के परमिट रद्द नहीं कर रही। मजबूरी वश रोडवेज कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
नारनौल में नहीं चली 145 बसें
विभागीय अधिकारियों के अनुसार नारनौल रोडवेज के बेड़े में कुल 161 बसें शामिल है। इनमें से 145 बसें ऑन रोड हैं। लेकिन रोडवेज के पहिये थम जाने के कारण बसें बस स्टैंड व कार्यशाला में ही खड़ी रही। जिस कारण यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। विशेषकर शिक्षण संस्थाओं में पढ़ाई के लिए आने-जाने वाले विद्यार्थियों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी।
चक्का जाम होने से दिनभर भटकते रहे यात्री
बस ने चलने से यात्री दिनभर कभी बस स्टैंड के बाहर तो कभी अंदर भटकते रहे। विशेषकर दूर-दराज से आने वाली सवारियों को जिन्हें रोडवेज हड़ताल की सूचना नहीं थी। ऐसे में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसी सवारियों को निजी वाहनों में सफर करना पड़ा। बस स्टैंड के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था।
विद्यार्थी भी रहे परेशान
हड़ताल के चलते अधिक परेशानी विद्यार्थियों को झेलनी पड़ी है। विशेषतौर पर छात्राओं को क्योंकि रोडवेज बसे नहीं चलने से निजी वाहनों में अधिक भीड़ होती है। ऐसे में छात्र तो जोर आजमाइश कर बसों में घुस जाते है, लेकिन छात्राएं अधिक भीड़ होने के कारण बसों में नहीं चढ़ पाती है। ऐसे में उन्हें परेशानी हुई।
निजी वाहनों ने कूटी चांदी
रोडवेज के चक्का जाम होने से यात्रियों भी मजबूरी में निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। जिसका फायदा निजी वाहन चालकों ने जमकर उठाया। जिन्होंने सवारियों से मनचाहा किराया वसूल किया। वहीं नियमों को ताक पर रखते हुए निजी वाहन क्षमता से अधिक सवारियां अपने वाहनों में बैठाकर लेकर जाते हुए दिखाई दिए।
महेन्द्रगढ़ में भी निजी वाहन चालकों ने जमकर चांदी कूटी। वाहन चालक अपनी गाड़ियों को सवारियों से भर कर ले जा रहे थे। साथ ही उनसे निर्धारित किराए से अधिक किराया वसूल रहे थे।
महेंद्रगढ़ में 23 बसें खड़ी रही
उधर, महेंद्रगढ़ में भी चक्का जाम रहा। महेंद्रगढ़ बस स्टैंड पर 23 रोडवेज बसें खड़ी रहीं व डिपो को सवा लाख रुपये का नुकसान हुआ। नारनौल डिपो तथा झज्जर डिपो की दो बसें महेंद्रगढ़ से गई थीं। इसके अलावा कोई भी रोडवेज बस नहीं चली। बस न चलने से लोगों को परेशानी हुई।
230 फेरों में लगे 15 फेेरे
महेंद्रगढ़ से नारनौल, जयपुर, कोटा, दिल्ली, गुरुग्राम, हिसार, चंडीगढ़, रेवाड़ी आदि रूटों पर बसें चलती हैं। विभिन्न रूटों पर चलने वाली निजी एवं रोडवेज बसों के 230 चक्कर प्रतिदिन लगते हैं। चक्का जाम होने की वजह से निजी तथा अन्य राज्य की बसों के मात्र 15 ही चक्कर लगे हैं। महेंद्रगढ़ से बहरोड़ तक निजी बसों की चार बसें, हिसार से कोटपुतली-4, सीटीयू-2, राजस्थान रोडवेज-4 तथा पंजाब रोडवेज की एक बस ने फेरा लगाया। बस स्टैंड से प्रतिदिन 23 बसें विभिन्न रूटों पर चलती हैं। प्रतिदिन डिपो को सवा लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।
लोगों से बातचीत
मुझे महेंद्रगढ़ जाना था, लेकिन बस स्टैंड पर कोई बस दिखाई नहीं दी। काफी समय से बस इंतजार कर रही हूं, परंतु अभी तक कोई बस नहीं आई है।
- भगवती देवी।
मैं निजी कार्य से नारनौल आई थी। अब मुझे अपने गांव सिंघाणा जाना है। परंतु बस स्टैंड पर आकर देखा तो सिंघाणा जाने के लिए कोई रोडवेज बस नहीं है।
- प्रियंका
सुबह किसी निजी वाहन से नारनौल कालेज में पढने के लिए आई थी, लेकिन अब दौगड़ा अपने गांव जाने के लिए जाने के लिए बस स्टैंड पर पहुंची तो देखा यहां स्टैंड खाली पड़ा है। यहां कोई बस नहीं है।
- सुनीता
सुबह अपने दोस्त के साथ बाइक पर कालेज आया था। परंतु जाने के लिए कोई साधन नहीं है। दो घंटे से बस स्टैंड पर बैठे है। परंतु कोई निजी या रोडवेज बस नहीं आई है।
- योगेश
सरकार को हड़ताल के दौरान कोई वैकल्पिक व्यवस्था जरूर करनी चाहिए, क्य ंकि हड़ताल के दौरान विद्यार्थियों को आने-जाने पर अधिक परेशानी होती है। वहीं दूर-दराज जाने वाली सवारियां भी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाती।
- अतुल कुमार