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‘राज्य सरकार ने मजदूरों के साथ किया छल’
Updated Mon, 31 Jul 2017 12:07 AM IST
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‘राज्य सरकार ने मजदूरों के साथ किया छल’
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। सीटू के आह्वान पर रविवार को स्थानीय चितवन वाटिका में सभा आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता सीटू जिला प्रधान शिव कुमार ने की। इसके बाद सीटू के बैनर तले प्रदर्शन करते हुए जिला प्रशासन के अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार ने मजदूर के हित में बने कानूनों में संशोधन कर मजदूरों के साथ छल किया है।
सभा को संबोधित करते हुए सीटू के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष कामरेड विनोद कुमार ने कहा कि भाजपा की सरकार को सता में आए करीब तीन साल होने वाले हैं। प्रदेश की जनताको उम्मीद थी कि उनके हित में सरकार सकारात्मक कदम उठाएगी। अब प्रदेश के विकास और जीडीपी में बड़ी भूमिका निभाने वाला मजदूर तबका अपने को ठगा महसूस कर रहा है। राज्य सरकार ने मजदूर के हित में बने कानूनों में संशोधन करके मजदूरों से छल किया है। इस सबके चलते राज्य में श्रम कानूनों की अवहेलना और ट्रेड यूनियन अधिकारियों पर हमले बढ़े हैं। आईसिन रोहतक के मजदूरों का मामला हो, मार्क एक्जास्ट ठेका मजदूरों, गुड़गांव का या फिर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में संगठित क्षेत्र में दर्जनों उद्योगों में जारी मजदूर आंदोलन हो, कहीं पर भी श्रम विवादों का निपटारा नहीं किया जा रहा। राज्य की पूरी मशीनरी मालिकों के पक्ष में खड़ी है। मजदूरों के यूनियन बनाने के अधिकार पर ही ढाका डाला जा रहा है।
मजदूरों और कर्मचारियों पर इस प्रकार के हमले केवल निजी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के विभागों में भी हो रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक ने आंगनबाड़ी कर्मियों के बारे में चिट्ठी जारी की है। इसमें कर्मियों के धरने-प्रदर्शन पर रोक लगाने और इसकी अवहेलना पर नौकरी से बर्खास्त करने के निर्देश देना है। श्रम कानूनों की बड़े पैमाने पर उल्लंघन की जा रही है। राज्य सरकार स्थायी कार्य के स्थान पर ठेके/आउट सोर्सिंग के आधार पर बड़े पैमाने पर काम करवा रही है। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के समान काम के लिए समान वेतन देने के निर्देश की खुली उल्लंघन की जा रही है। ठेके पर लगे कर्मियों को ईएसआई/पीएफ के तहत कवर नहीं किया जा रहा। जहां यह सुविधा प्रदान की गई है वहां ठेकेदार, विभाग के आला अधिकारियों के साथ मिलकर मजदूरों/कर्मचारियों की मेहनत के करोड़ों रुपये का घोटाला कर रहे हैं। निर्माण क्षेत्र में कार्यरत मजदूर-कारीगरों के लिए बने श्रम कल्याण बोर्ड में मजदूरों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को जान बूझकर रोका गया है। इस वजह से मजदूरों को सुविधाओं के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। मजदूरों की मांगों पर मुख्यमंत्री ने अलग-अलग हिस्सों से स्वयं बात करके उनका निपटारा करने की बात स्वीकार की है। इनमें से ग्रामीण चौकीदार, मिड डे मील वर्कर्स, आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी कर्मी, वन मजदूर, मनरेगा मजदूर, निर्माण मजदूर, ग्रामीण सफाई कर्मचारी आदि की मांगों का कोई समाधान नहीं हुआ है। आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार की जिन हिस्सों बारे यदि आंशिक घोषणा भी हुई है, उसे लागू नहीं किया गया। इस अवसर पर कैलाश, राधेश्याम, कान्तादेवी, निर्मला, रोहताश गोठवाल, प्रधान हरिराम आदि ने भी अपने विचार रखे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। सीटू के आह्वान पर रविवार को स्थानीय चितवन वाटिका में सभा आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता सीटू जिला प्रधान शिव कुमार ने की। इसके बाद सीटू के बैनर तले प्रदर्शन करते हुए जिला प्रशासन के अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार ने मजदूर के हित में बने कानूनों में संशोधन कर मजदूरों के साथ छल किया है।
सभा को संबोधित करते हुए सीटू के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष कामरेड विनोद कुमार ने कहा कि भाजपा की सरकार को सता में आए करीब तीन साल होने वाले हैं। प्रदेश की जनताको उम्मीद थी कि उनके हित में सरकार सकारात्मक कदम उठाएगी। अब प्रदेश के विकास और जीडीपी में बड़ी भूमिका निभाने वाला मजदूर तबका अपने को ठगा महसूस कर रहा है। राज्य सरकार ने मजदूर के हित में बने कानूनों में संशोधन करके मजदूरों से छल किया है। इस सबके चलते राज्य में श्रम कानूनों की अवहेलना और ट्रेड यूनियन अधिकारियों पर हमले बढ़े हैं। आईसिन रोहतक के मजदूरों का मामला हो, मार्क एक्जास्ट ठेका मजदूरों, गुड़गांव का या फिर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में संगठित क्षेत्र में दर्जनों उद्योगों में जारी मजदूर आंदोलन हो, कहीं पर भी श्रम विवादों का निपटारा नहीं किया जा रहा। राज्य की पूरी मशीनरी मालिकों के पक्ष में खड़ी है। मजदूरों के यूनियन बनाने के अधिकार पर ही ढाका डाला जा रहा है।
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मजदूरों और कर्मचारियों पर इस प्रकार के हमले केवल निजी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के विभागों में भी हो रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक ने आंगनबाड़ी कर्मियों के बारे में चिट्ठी जारी की है। इसमें कर्मियों के धरने-प्रदर्शन पर रोक लगाने और इसकी अवहेलना पर नौकरी से बर्खास्त करने के निर्देश देना है। श्रम कानूनों की बड़े पैमाने पर उल्लंघन की जा रही है। राज्य सरकार स्थायी कार्य के स्थान पर ठेके/आउट सोर्सिंग के आधार पर बड़े पैमाने पर काम करवा रही है। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के समान काम के लिए समान वेतन देने के निर्देश की खुली उल्लंघन की जा रही है। ठेके पर लगे कर्मियों को ईएसआई/पीएफ के तहत कवर नहीं किया जा रहा। जहां यह सुविधा प्रदान की गई है वहां ठेकेदार, विभाग के आला अधिकारियों के साथ मिलकर मजदूरों/कर्मचारियों की मेहनत के करोड़ों रुपये का घोटाला कर रहे हैं। निर्माण क्षेत्र में कार्यरत मजदूर-कारीगरों के लिए बने श्रम कल्याण बोर्ड में मजदूरों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को जान बूझकर रोका गया है। इस वजह से मजदूरों को सुविधाओं के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। मजदूरों की मांगों पर मुख्यमंत्री ने अलग-अलग हिस्सों से स्वयं बात करके उनका निपटारा करने की बात स्वीकार की है। इनमें से ग्रामीण चौकीदार, मिड डे मील वर्कर्स, आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी कर्मी, वन मजदूर, मनरेगा मजदूर, निर्माण मजदूर, ग्रामीण सफाई कर्मचारी आदि की मांगों का कोई समाधान नहीं हुआ है। आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार की जिन हिस्सों बारे यदि आंशिक घोषणा भी हुई है, उसे लागू नहीं किया गया। इस अवसर पर कैलाश, राधेश्याम, कान्तादेवी, निर्मला, रोहताश गोठवाल, प्रधान हरिराम आदि ने भी अपने विचार रखे।
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