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आईटीआई
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:35 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। शहर के आईटीआई भवन की हालत आज जर्जर हो चुकी है। हरियाणा जन्म से पहले बने आईटीआई भवन की वर्षों से रिपयेरिंग भी नहीं हो पाई है। प्राचार्य कक्ष की हालत तक बदतर है। अभी आईटीआई में एडमिशन प्रक्रिया चल रही है। एक अगस्त से नए विद्यार्थी इस जर्जर भवन में अपना पहला कदम रखेंगे। इस दौरान विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आईटीआई प्रशासन की ओर से कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अभी तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पीडब्ल्यूडी विभाग की मानें तो भवन की अवधि लगभग 50 वर्ष होती है। उसके बाद भवन रहने लायक नहीं रहता। वह जर्जर हालत में हो जाता है। भवन की स्थिति को लेकर बच्चों के साथ स्टाफ भी सहमा रहता है।
52 वर्ष पहले किया था उद्धाघटन
महेंद्रगढ़ ब्वॉयज आईटीआई को बने हुए 52 वर्ष हो चुके हैं। इसका शिलान्यास 27 मई 1963 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरों ने किया गया था। सन 1965 में यह भवन बनकर तैयार हुआ था। उस समय पंजाब एवं हरियाणा एक ही राज्य था। उस समय यह आईटीआई मात्र आठ दस ट्रेडों के साथ शुरू की गई थी। यह आज बढ़कर 20 हो गई है। लगभग 600 से अधिक विद्यार्थी हर वर्ष इसमें प्रशिक्षण ले रहे हैं।
वर्कशॉप की हालत खस्ता
आईटीआई भवन के अंदर एक बड़ी वर्कशॉप हैं। इसके अंदर आधा दर्जन से अधिक ट्रेडों की वर्कशॉप बनाई हुई है। इस वर्कशॉप के अंदर हमेशा 200 से 300 विद्यार्थी मशीनों पर काम करते रहते हैं। वर्कशाप के अंदर लगाए गए बीम में दो-दो इंच तक की दरारें आई हुई हैं। उसकी सरिया दिखाई देने लगी हैं। इन बीमों की हालत ऐसी है कि ये कभी भी गिर सकती है। सीलिंग के रूप में लगाई गई टीन शेड में भी जगह-जगह छेद हो गए हैं। इससे बारिश आने पर वर्कशाप पानी से भर जाता है। इससे मशीनें भी जंग लगने से खराब हो जाती हैं। कई बार तो बीम से सीमेंट का चूना नीचे गिर चुका है। इसके अलावा जंगल, दरवाजे एवं रोशनदान भी टूटे हुए हैं।
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नहीं हुई वर्षों पुताई
आईटीआई में पिछले कई वर्षों से रिपयेरिंग नहीं हो पाई है। कई वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को भी याद नहीं है कि आईटीआई में रिपेयरिंग कब करवाई गई थी। आईटीआई को रंग पुताई करवाए हुए भी वर्ष बीत गए हैं। बारिश आने पर पूरा वर्कशॉप पानी से भर जाता है। वर्कशॉप के बीम की सरिया निकल आई है। फर्श भी टूटे हुए हैं।
प्राचार्य कक्ष की हालत खस्ता
आईटीआई में भवन में प्राचार्य के कमरा भी ठीक नहीं है। कमरे में जगह-जगह सील आई हुई है। सीलिंग से चुना गिरता है। तकनीकी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार लिखा जा चुका है, लेकिन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
भवन की उम्र हुई पूरी
आईटीआई भवन को बने हुए 52 वर्ष से अधिक समय हो चुका है। एक भवन की समय अवधि लगभग 50 वर्ष होती है। मापदंड अनुसार भवन निर्माण की 50 वर्ष पूरे होने के बाद पीडब्ल्यूडी बीएंडआर का सर्वेक्षण करवाना चाहिए। लेकिन, अभी तक तकनीकी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने पीडब्ल्यू बीएंडआर का सर्वेक्षण नहीं करवाया है। पीडब्ल्यूडी के एसडीओ राजवीर शर्मा ने बताया कि बीम आदि पर भवन बनाया गया है तो उसकी अवधि लगभग 50 वर्ष की होती है। साधारण भवन की आयु 25 से 30 वर्ष की होती है।
आईटीआई भवन को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। जैसे ही बजट आएगा तो आईटीआई की रिपयेर करवा दी जाएगी।
-प्राचार्य एके कौशिक।
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महेंद्रगढ़। शहर के आईटीआई भवन की हालत आज जर्जर हो चुकी है। हरियाणा जन्म से पहले बने आईटीआई भवन की वर्षों से रिपयेरिंग भी नहीं हो पाई है। प्राचार्य कक्ष की हालत तक बदतर है। अभी आईटीआई में एडमिशन प्रक्रिया चल रही है। एक अगस्त से नए विद्यार्थी इस जर्जर भवन में अपना पहला कदम रखेंगे। इस दौरान विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आईटीआई प्रशासन की ओर से कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अभी तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पीडब्ल्यूडी विभाग की मानें तो भवन की अवधि लगभग 50 वर्ष होती है। उसके बाद भवन रहने लायक नहीं रहता। वह जर्जर हालत में हो जाता है। भवन की स्थिति को लेकर बच्चों के साथ स्टाफ भी सहमा रहता है।
52 वर्ष पहले किया था उद्धाघटन
महेंद्रगढ़ ब्वॉयज आईटीआई को बने हुए 52 वर्ष हो चुके हैं। इसका शिलान्यास 27 मई 1963 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरों ने किया गया था। सन 1965 में यह भवन बनकर तैयार हुआ था। उस समय पंजाब एवं हरियाणा एक ही राज्य था। उस समय यह आईटीआई मात्र आठ दस ट्रेडों के साथ शुरू की गई थी। यह आज बढ़कर 20 हो गई है। लगभग 600 से अधिक विद्यार्थी हर वर्ष इसमें प्रशिक्षण ले रहे हैं।
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वर्कशॉप की हालत खस्ता
आईटीआई भवन के अंदर एक बड़ी वर्कशॉप हैं। इसके अंदर आधा दर्जन से अधिक ट्रेडों की वर्कशॉप बनाई हुई है। इस वर्कशॉप के अंदर हमेशा 200 से 300 विद्यार्थी मशीनों पर काम करते रहते हैं। वर्कशाप के अंदर लगाए गए बीम में दो-दो इंच तक की दरारें आई हुई हैं। उसकी सरिया दिखाई देने लगी हैं। इन बीमों की हालत ऐसी है कि ये कभी भी गिर सकती है। सीलिंग के रूप में लगाई गई टीन शेड में भी जगह-जगह छेद हो गए हैं। इससे बारिश आने पर वर्कशाप पानी से भर जाता है। इससे मशीनें भी जंग लगने से खराब हो जाती हैं। कई बार तो बीम से सीमेंट का चूना नीचे गिर चुका है। इसके अलावा जंगल, दरवाजे एवं रोशनदान भी टूटे हुए हैं।
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नहीं हुई वर्षों पुताई
आईटीआई में पिछले कई वर्षों से रिपयेरिंग नहीं हो पाई है। कई वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को भी याद नहीं है कि आईटीआई में रिपेयरिंग कब करवाई गई थी। आईटीआई को रंग पुताई करवाए हुए भी वर्ष बीत गए हैं। बारिश आने पर पूरा वर्कशॉप पानी से भर जाता है। वर्कशॉप के बीम की सरिया निकल आई है। फर्श भी टूटे हुए हैं।
प्राचार्य कक्ष की हालत खस्ता
आईटीआई में भवन में प्राचार्य के कमरा भी ठीक नहीं है। कमरे में जगह-जगह सील आई हुई है। सीलिंग से चुना गिरता है। तकनीकी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार लिखा जा चुका है, लेकिन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
भवन की उम्र हुई पूरी
आईटीआई भवन को बने हुए 52 वर्ष से अधिक समय हो चुका है। एक भवन की समय अवधि लगभग 50 वर्ष होती है। मापदंड अनुसार भवन निर्माण की 50 वर्ष पूरे होने के बाद पीडब्ल्यूडी बीएंडआर का सर्वेक्षण करवाना चाहिए। लेकिन, अभी तक तकनीकी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने पीडब्ल्यू बीएंडआर का सर्वेक्षण नहीं करवाया है। पीडब्ल्यूडी के एसडीओ राजवीर शर्मा ने बताया कि बीम आदि पर भवन बनाया गया है तो उसकी अवधि लगभग 50 वर्ष की होती है। साधारण भवन की आयु 25 से 30 वर्ष की होती है।
आईटीआई भवन को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। जैसे ही बजट आएगा तो आईटीआई की रिपयेर करवा दी जाएगी।
-प्राचार्य एके कौशिक।