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परायी स्त्री पर बुरी नजर डालने वाले को होता है नरक का द्वार प्राप्त
Updated Sat, 22 Jul 2017 12:40 AM IST
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परायी स्त्री पर बुरी नजर डालने वाले को मिलता है नरक
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। आत्म संतोष और समता धारण करके पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। जल्दबाजी में किया गया पुण्य अधिक समय तक स्थायी नहीं रह पाता। यह प्रवचन धर्ममुनि महाराज ने शुक्रवार को मानक चौक स्थित जैन स्थानक में दिए।
जैन मुनि ने कहा कि गृहस्थ में रहते हुए भी धर्म किया जा सकता है। विचारों की शुद्धता और आचरण शुद्धि से प्राणी सबसे ज्यादा पुण्यशाली बन सकता है। गृहस्थ को मान, माया, लोभ ने जकड़ा हुआ है। इससे वह इनसे छुटकारा नहीं पा सकता। उन्होंने कहा कि रावण ज्ञानवान और शक्तिशाली होते हुए भी श्रीराम से हार गया, क्योंकि उसमें चरित्र की कमी थी। नजरों में खोट था। परायी स्त्री पर बुरी नजर डालने वाले को नरक का द्वार प्राप्त होता है। मुनि ने कहा कि समझाने वाले त्यागी हो तो बुरे से बुरा व्यक्ति भी थोड़ी बहुत समझ ले लेता है। प्रत्येक प्राणी में अच्छे गुण होते हैं, जरूरत है उन गुणों को उजागर करने की। जिस दिन वो सद्गुण जागृत हो गये प्राणी उसी दिन बुरी वृत्तियों को छोड़कर धर्म का मार्ग अपना लेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। आत्म संतोष और समता धारण करके पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। जल्दबाजी में किया गया पुण्य अधिक समय तक स्थायी नहीं रह पाता। यह प्रवचन धर्ममुनि महाराज ने शुक्रवार को मानक चौक स्थित जैन स्थानक में दिए।
जैन मुनि ने कहा कि गृहस्थ में रहते हुए भी धर्म किया जा सकता है। विचारों की शुद्धता और आचरण शुद्धि से प्राणी सबसे ज्यादा पुण्यशाली बन सकता है। गृहस्थ को मान, माया, लोभ ने जकड़ा हुआ है। इससे वह इनसे छुटकारा नहीं पा सकता। उन्होंने कहा कि रावण ज्ञानवान और शक्तिशाली होते हुए भी श्रीराम से हार गया, क्योंकि उसमें चरित्र की कमी थी। नजरों में खोट था। परायी स्त्री पर बुरी नजर डालने वाले को नरक का द्वार प्राप्त होता है। मुनि ने कहा कि समझाने वाले त्यागी हो तो बुरे से बुरा व्यक्ति भी थोड़ी बहुत समझ ले लेता है। प्रत्येक प्राणी में अच्छे गुण होते हैं, जरूरत है उन गुणों को उजागर करने की। जिस दिन वो सद्गुण जागृत हो गये प्राणी उसी दिन बुरी वृत्तियों को छोड़कर धर्म का मार्ग अपना लेगा।
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