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लर्निंग लाइसेंस के लिए देना होगा अब ये टेस्ट
ब्यूरो/अमर उजाला,चंडीगढ़
Updated Tue, 21 Jan 2014 12:16 PM IST
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हरियाणा में आगामी एक फरवरी से सभी लाइसेंसिंग अथारिटी द्वारा उन व्यक्तियों को लर्निंग लाइसेंस दिया जाएगा। जो स्टाल (स्क्रीन टेस्ट एंड फोर लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस) टेस्ट पास करेगा।
हरियाणा परिवहन विभाग की आयुक्त सुमिता मिश्रा ने बताया कि एनआईसी द्वारा स्टाल (स्क्रीन टेस्ट ऐड फोर लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस) का डिजाइन तैयार किया गया है।
यह पाया गया है कि ड्राइविंग में कम जानकारी, यातायात की जानकारी और सामान्य यातायात नियमों के कारण ज्यादा संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिसके कारण जान माल का नुकसान होता है।
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इससे पूर्व सभी स्तर पर सारथी परियोजना सफलतापूर्वक लागू है। इसी प्रकार, सड़क परिवहन एवं हाईवे के मार्गदर्शन के अंतर्गत पूरे भारत में सारथी परियोजना को लागू किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को यह निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में एनआइसी के सहयोग से सभी लाइसेंसिंग अथारिटी और एडीएम कार्यालयों में जरूरी व्यवस्था के साथ-साथ टेस्ट लेने से संबंधित ढांचा भी उपलब्ध करवाया जाए।
उन्होंने बताया कि कंप्यूटर की जरूरत के अनुसार उन्हें एक जगह में स्थापित किया जाए और आवेदक को कंप्यूटर आधारित टेस्ट पास करने के बाद लर्नर लाइसेंस जारी किया जाना चाहिए।
इस संबंध में राज्य के सभी एनआईसी केंद्रों पर टेस्ट को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए सॉफ्टवेयर पहले ही उपलब्ध करवाया जा चुका है।
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हरियाणा परिवहन विभाग की आयुक्त सुमिता मिश्रा ने बताया कि एनआईसी द्वारा स्टाल (स्क्रीन टेस्ट ऐड फोर लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस) का डिजाइन तैयार किया गया है।
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यह पाया गया है कि ड्राइविंग में कम जानकारी, यातायात की जानकारी और सामान्य यातायात नियमों के कारण ज्यादा संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिसके कारण जान माल का नुकसान होता है।
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इससे पूर्व सभी स्तर पर सारथी परियोजना सफलतापूर्वक लागू है। इसी प्रकार, सड़क परिवहन एवं हाईवे के मार्गदर्शन के अंतर्गत पूरे भारत में सारथी परियोजना को लागू किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को यह निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में एनआइसी के सहयोग से सभी लाइसेंसिंग अथारिटी और एडीएम कार्यालयों में जरूरी व्यवस्था के साथ-साथ टेस्ट लेने से संबंधित ढांचा भी उपलब्ध करवाया जाए।
उन्होंने बताया कि कंप्यूटर की जरूरत के अनुसार उन्हें एक जगह में स्थापित किया जाए और आवेदक को कंप्यूटर आधारित टेस्ट पास करने के बाद लर्नर लाइसेंस जारी किया जाना चाहिए।
इस संबंध में राज्य के सभी एनआईसी केंद्रों पर टेस्ट को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए सॉफ्टवेयर पहले ही उपलब्ध करवाया जा चुका है।