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यमुना में डूबा कुरुक्षेत्र का सन्नी
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 09 Jun 2014 12:06 AM IST
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बाबैन के गांव खैरी का रहने वाला प्रिंस (18) उर्फ सन्नी गंगा दशहरे पर रादौर के गुमथला घाट पर स्नान करने गया था जहां यमुना नदी में डूबने से उसकी मौत हो गई। सन्नी के साथ दो युवक और भी डूब गए हैं जो यूपी के थे। प्रिंस उर्फ सन्नी गांव खैरी के नंबरदार रणधीर सिंह का भतीजा है। वह चार बहनों का इकलौता भाई था। दो बहनों की शादी हो चुकी है जबकि दो पढ़ती हैं। वह अपने पिता के साथ मजदूरी करता था। हादसे की सूचना पाकर जठलाना के थाना प्रभारी ओमप्रकाश शर्मा मौके पर पहुंचे और गोताखोरों की मदद से युवकों की तलाश शुरू की। शाम करीब सात बजे तीनों युवकों के शव घाट के गहरे कुंड से बरामद कर लिए गए।
गंगा दशहरा के अवसर पर हर वर्ष की तरह रविवार को भी गुमथला, लालछप्पर, संधाला, जठलाना आदि घाटों पर मेला लगा था। मेले में क्षेत्र के अलावा आसपास के जिलों समेत उत्तर प्रदेश से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। दोपहर के समय यूपी के गंगौह निवासी रजत (19) व सोमदीप (20) भी मेले में स्नान करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान जब वे दोनों गुमथला घाट पर यमुना नदी में उतरे और थोड़ी देर बाद पानी के तेज बहाव में वह बहकर यमुना के गहरे कुंड में डूब गए। इसके कुछ देर बाद कुरुक्षेत्र के बाबैन स्थित खैरी निवासी प्रिंस (18) उर्फ सन्नी भी गुमथला घाट पर स्नान करते हुए बह गया।
तीनों युवकों के डूबने की खबर जैसे ही पुलिस और प्रशासन को लगी, तो जठलाना थाना प्रभारी ओमप्रकाश शर्मा ने गोताखोरों को बुलाकर नदी में सर्च अभियान शुरू कर दिया। बाद में नायब तहसीलदार चेतना चौधरी, रादौर के बीडीपीओ राजबीर सिंह और पंचायत अधिकारी अंग्रेज सिंह मोर ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए यमुनानगर के सिविल अस्पताल स्थित शव गृह में रखवा दिया।
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हादसों के बाद भी नहीं चेता प्रशासन
दो साल पहले इसी गुमथला घाट पर गंगा दशहरे के मौके पर ही तीन युवकों की डूबने से मौत हो गई थी। 21 मई 2012 में यहां गांव गढ़ी गुजरान निवासी नरेंद्र कुमार (22) गहरे कुंड में डूबकर मर गया था। नरेंद्र करनाल के इंद्री ब्लॉक के एक बहुतकनीकी संस्थान का छात्र था। इसी प्रकार गांव जुब्बल के 21 वर्षीय नितिन कांबोज की गुमथला घाट पर स्नान करते वक्त गहरे कुंड में डूबने से मौत हो गई थी। नितिन नोएडा की एक निजी कंपनी में सिविल इंजीनियर था। उधर, लालछप्पर घाट पर गांव पालेवाला निवासी बृजपाल के बेटे सन्नी की भी डूबने से मौत हो गई थी। जबकि इससे पहले भी गुमथला, लालछप्पर, संधाला, जठलाना घाटों पर गंगा दशहरे के मौके पर इस तरह के कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने हादसों से सबक नहीं लिया और रविवार को गुमथला घाट सहित अन्य सभी घाटों पर यमुना नदी में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए।
हर बार की यही कहानी, डूबने के बाद बुलाए जाते हैं गोताखोर
हर वर्ष गंगा दशहरे के अवसर पर थाना जठलाना के अंतर्गत यमुना नदी के किनारे बने करीब आधा दर्जन घाटों पर मेला लगता है। इसमें आसपास के जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश से भी हजारों की संख्या में लोग स्नान व पूजन के लिए पहुंचते हैं। मेले में पहुंचने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा का जिम्मा नाममात्र पुलिस कर्मियों पर छोड़ दिया जाता है। जबकि लोगों को नदी में डूबने से बचाने का कोई प्रबंध नहीं किया जाता है। हर बार हादसे होने के बाद ही प्रशासन गोताखोरों को बुलाता है।
कुंड इतने गहरे कि हाथी भी समा जाए
समाजसेवी सुदेश बंसल ने बताया कि यमुना नदी के गुमथला घाट पर कुंड इतने गहरे हैं कि उसमें हाथी भी समा जाए। ऐसे में तैरना न जानने वाले लोगों के लिए यहां स्नान करना जोखिम भरा है, क्योंकि यमुना नदी में पानी का बहाव अचानक तेज हो जाता है। प्रशासन को मेले से पहले गहरे कुंडों का सर्वेक्षण कर उनके पास चेतावनी के बोर्ड लगाने चाहिए।
गुमथला घाट पर युवकों के डूबने की सूचना मिलते ही पुलिस ने पहुंचकर बाहर से गोताखोरों को बुलाया और सर्च अभियान शुरू किया। शाम करीब सात बजे तीनों शवों को यमुना नदी के कुंड से बरामद कर लिया गया। शवों को कब्जे में लेकर यमुनानगर स्थित सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया गया है, जहां सोमवार को तीनों शवों का पोस्टमार्टम होगा। गुमथला घाट पर डूबने से बचाने के लिए मछुवारों का प्रबंध था, जो बड़े-बडे़ जाले लेकर नदी में मौजूद थे। नदी में डूबने वाले तीनों युवक नदी के गहरे कुंडों से अंजान थे और नहाते समय घाट से गहरे कुंड की ओर चले गए, जिससे उनकी डूबने से मौत हो गई।
- ओमप्रकाश शर्मा, प्रभारी, थाना जठलाना।
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गंगा दशहरा के अवसर पर हर वर्ष की तरह रविवार को भी गुमथला, लालछप्पर, संधाला, जठलाना आदि घाटों पर मेला लगा था। मेले में क्षेत्र के अलावा आसपास के जिलों समेत उत्तर प्रदेश से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। दोपहर के समय यूपी के गंगौह निवासी रजत (19) व सोमदीप (20) भी मेले में स्नान करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान जब वे दोनों गुमथला घाट पर यमुना नदी में उतरे और थोड़ी देर बाद पानी के तेज बहाव में वह बहकर यमुना के गहरे कुंड में डूब गए। इसके कुछ देर बाद कुरुक्षेत्र के बाबैन स्थित खैरी निवासी प्रिंस (18) उर्फ सन्नी भी गुमथला घाट पर स्नान करते हुए बह गया।
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तीनों युवकों के डूबने की खबर जैसे ही पुलिस और प्रशासन को लगी, तो जठलाना थाना प्रभारी ओमप्रकाश शर्मा ने गोताखोरों को बुलाकर नदी में सर्च अभियान शुरू कर दिया। बाद में नायब तहसीलदार चेतना चौधरी, रादौर के बीडीपीओ राजबीर सिंह और पंचायत अधिकारी अंग्रेज सिंह मोर ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए यमुनानगर के सिविल अस्पताल स्थित शव गृह में रखवा दिया।
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हादसों के बाद भी नहीं चेता प्रशासन
दो साल पहले इसी गुमथला घाट पर गंगा दशहरे के मौके पर ही तीन युवकों की डूबने से मौत हो गई थी। 21 मई 2012 में यहां गांव गढ़ी गुजरान निवासी नरेंद्र कुमार (22) गहरे कुंड में डूबकर मर गया था। नरेंद्र करनाल के इंद्री ब्लॉक के एक बहुतकनीकी संस्थान का छात्र था। इसी प्रकार गांव जुब्बल के 21 वर्षीय नितिन कांबोज की गुमथला घाट पर स्नान करते वक्त गहरे कुंड में डूबने से मौत हो गई थी। नितिन नोएडा की एक निजी कंपनी में सिविल इंजीनियर था। उधर, लालछप्पर घाट पर गांव पालेवाला निवासी बृजपाल के बेटे सन्नी की भी डूबने से मौत हो गई थी। जबकि इससे पहले भी गुमथला, लालछप्पर, संधाला, जठलाना घाटों पर गंगा दशहरे के मौके पर इस तरह के कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने हादसों से सबक नहीं लिया और रविवार को गुमथला घाट सहित अन्य सभी घाटों पर यमुना नदी में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए।
हर बार की यही कहानी, डूबने के बाद बुलाए जाते हैं गोताखोर
हर वर्ष गंगा दशहरे के अवसर पर थाना जठलाना के अंतर्गत यमुना नदी के किनारे बने करीब आधा दर्जन घाटों पर मेला लगता है। इसमें आसपास के जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश से भी हजारों की संख्या में लोग स्नान व पूजन के लिए पहुंचते हैं। मेले में पहुंचने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा का जिम्मा नाममात्र पुलिस कर्मियों पर छोड़ दिया जाता है। जबकि लोगों को नदी में डूबने से बचाने का कोई प्रबंध नहीं किया जाता है। हर बार हादसे होने के बाद ही प्रशासन गोताखोरों को बुलाता है।
कुंड इतने गहरे कि हाथी भी समा जाए
समाजसेवी सुदेश बंसल ने बताया कि यमुना नदी के गुमथला घाट पर कुंड इतने गहरे हैं कि उसमें हाथी भी समा जाए। ऐसे में तैरना न जानने वाले लोगों के लिए यहां स्नान करना जोखिम भरा है, क्योंकि यमुना नदी में पानी का बहाव अचानक तेज हो जाता है। प्रशासन को मेले से पहले गहरे कुंडों का सर्वेक्षण कर उनके पास चेतावनी के बोर्ड लगाने चाहिए।
गुमथला घाट पर युवकों के डूबने की सूचना मिलते ही पुलिस ने पहुंचकर बाहर से गोताखोरों को बुलाया और सर्च अभियान शुरू किया। शाम करीब सात बजे तीनों शवों को यमुना नदी के कुंड से बरामद कर लिया गया। शवों को कब्जे में लेकर यमुनानगर स्थित सिविल अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया गया है, जहां सोमवार को तीनों शवों का पोस्टमार्टम होगा। गुमथला घाट पर डूबने से बचाने के लिए मछुवारों का प्रबंध था, जो बड़े-बडे़ जाले लेकर नदी में मौजूद थे। नदी में डूबने वाले तीनों युवक नदी के गहरे कुंडों से अंजान थे और नहाते समय घाट से गहरे कुंड की ओर चले गए, जिससे उनकी डूबने से मौत हो गई।
- ओमप्रकाश शर्मा, प्रभारी, थाना जठलाना।