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काम के बोझ का मारा, डॉक्टर बने 'बेचारा'
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Tue, 28 Jun 2016 11:57 PM IST
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सीएमओ को लिखा गया पत्र
- फोटो : Amar Ujala
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सरकारी डॉक्टरों पर काम के बोझ की स्थिति एक सीनियर डॉक्टर के सीएमओ को लिखे पत्र के बाद फिर से सामने आई। गांव मथाना के एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने जो पत्र लिखा है उसका लब्बोलुआब यह निकल कर आया है कि डॉक्टरों पर काम का बोझ इतना है कि उन्हें सप्ताह में एक दिन भी छुट्टी नहीं मिल रही है।
साप्ताहिक अवकाश के समायोजन की बात भी इस पत्र में कही गई है। पत्र में डॉक्टरों की पीड़ा को भी उजागर किया गया है। इस लेटर के बाद जब अमर उजाला ने अस्पतालों में डॉक्टरों की स्थिति पर नजर दौड़ाई तो यह स्थिति सामने आई है।
ये है जिले में डॉक्टर का आंकड़ा
जिले के सरकारी अस्पतालों में कुल डॉक्टरों के स्वीकृत पद 111 है। जबकि 67 डॉक्टर ड्यूटी कर रहे हैं। कुल 44 पदों पर डॉक्टर ही नहीं हैं। सिविल सर्जन की मानें तो यहां पर तैनात डॉक्टर में से भी कुछ डेपुटेशन पर भेजने पड़ते हैं। कई नौकरी ज्वाइन करने के बाद अस्पताल में वापस नहीं आते हैं।
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कुछ डॉक्टर एक दो वर्ष काम करते हैं और प्राइवेट अस्पताल की ओर रुख कर लेते हैं। जिससे सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों पर खाली पड़े पदों का बोझ भी बढ़ जाता है। सिविल अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ, कान-नाक रोग विशेषज्ञ अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं सिविल अस्पताल के एमएस डॉ. मुकेश द्वारा भी सितंबर माह में अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी है।
65 उम्र पर किसी ने नहीं जताई खुशी
सरकारी डॉक्टरों की नौकरी की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 कर देने की घोषणा सरकार कर चुकी है। जिससे डॉक्टर को 5 वर्ष अतिरिक्त सेवाएं देनी पड़ेगी। हालांकि सरकार की इस घोषणा से मरीज तो प्रसन्न है क्योंकि उन्हें एक्सपीरियंस डॉक्टर से इलाज मिलेगा। लेकिन घोषणा के दो माह बाद तक भी किसी भी मेडिकल एसोसिएशन द्वारा
इस निर्णय का स्वागत नहीं किया गया है जिससे जाहिर हो रहा है कि डॉक्टर 60 की उम्र में भी रिटायरमेंट चाह रहे है। वहीं सिविल अस्पताल के डॉक्टर ने दबी जुबान कह रहे हैं कि सरकार को सभी की उम्र बढ़ाने की बजाएं चिकित्सकों से राय मांगनी चाहिए जिससे जो चाहे वहीं चिकित्सक 65 तक काम करे। जो नहीं चाहें वह 60 की उम्र में ही रिटायरमेंट ले लें।
डॉक्टर की कमी से जूझ रहा है जिला
पहले ही राज्य में डॉक्टर की कमी हैं। ऐसे में एलएनजेपी नागरिक अस्पताल के कई डॉक्टर अपनी नौकरी छोड़ कर दूसरी और प्राइवेट की ओर रुख कर गए है। यहीं नहीं काम के बोझ को देखते हुए डॉक्टरों पर तनाव इतना बढ़ चुका है कि वे रिटायरमेंट से पहले ही नौकरी छोड़ कर जाने लगे है।
डॉ. शैलेंद्र खांबरा सीनियर मेडिकल अधिकारी ने बताया कि गांव मथाना की सीएचसी में काम का बोझ तब बढ़ता है जब यहां से डॉक्टर डेपुटेशन पर चले जाते है जिससे तैनात डॉक्टरों पर डेपुटेशन पर गए डॉक्टर के काम का बोझ उठाना पड़ता है। मथाना अस्पताल में लैब टेक्नीसिएन नहीं है।
अन्य सीएचसी में दो दो लैब टेक्नीलिएन तैनात है। यहां की सीएचसी प्लान स्कीम के तहत बनाई गई है। यहां पर मल्टी पर्पज हेल्थ मेल तो तैनात है फीमेल नहीं है। जिसका बोझ पड़ रहा है। इसके लिए स्थानीय विधायक को गुहार लगाई गई है कि यहां पर खाली पड़े पदों पर कर्मियों की तैनाती की जाएं। उन्होंने कहा कि इस बाबत सीएमओ को लिखित में मांग दी है। सीएमओ ने मिलकर मामला पर बातचीत के लिए बुलाया है।
ये लिखा है पत्र में
मथाना सीएचसी में तैनात सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. शैलेंद्र खांबरा ने पत्र में लिखा है कि यहां पर तैनात सभी चिकित्सकों की 24 गुणा 7 के तहत आपातकालीन ड्यूटी लगाई जाती है। इसमें पुरुष चिकित्सक सायं 4 बजे से, अगले दिन सुबह 5 बजे तक ड्यूटी करते हैं। वहीं इससे पहले सभी चिकित्सक सुबह से दोपहर 2 बजे तक भी ड्यूटी देते है। इसी तरह रविवार को महिला चिकित्सा अधिकारी ड्यूटी करती है।
पत्र मिलने से ही इनकार
सिविल सर्जन डॉ. एसके नैन ने बताया कि उन्हें इस प्रकार का कोई पत्र नहीं मिला है। अगर किसी डॉक्टर को छुट्टी की दिक्कत आ रही है तो वे उसे मंजूर कर देंगे। वैसे जो क्लास वन अधिकारी के रैंक पर कार्यरत होता है उसे 24 घंटे ड्यूटी निभानी पड़ती है।
साप्ताहिक अवकाश के समायोजन की बात भी इस पत्र में कही गई है। पत्र में डॉक्टरों की पीड़ा को भी उजागर किया गया है। इस लेटर के बाद जब अमर उजाला ने अस्पतालों में डॉक्टरों की स्थिति पर नजर दौड़ाई तो यह स्थिति सामने आई है।
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ये है जिले में डॉक्टर का आंकड़ा
जिले के सरकारी अस्पतालों में कुल डॉक्टरों के स्वीकृत पद 111 है। जबकि 67 डॉक्टर ड्यूटी कर रहे हैं। कुल 44 पदों पर डॉक्टर ही नहीं हैं। सिविल सर्जन की मानें तो यहां पर तैनात डॉक्टर में से भी कुछ डेपुटेशन पर भेजने पड़ते हैं। कई नौकरी ज्वाइन करने के बाद अस्पताल में वापस नहीं आते हैं।
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कुछ डॉक्टर एक दो वर्ष काम करते हैं और प्राइवेट अस्पताल की ओर रुख कर लेते हैं। जिससे सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों पर खाली पड़े पदों का बोझ भी बढ़ जाता है। सिविल अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ, कान-नाक रोग विशेषज्ञ अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं सिविल अस्पताल के एमएस डॉ. मुकेश द्वारा भी सितंबर माह में अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी है।
65 उम्र पर किसी ने नहीं जताई खुशी
सरकारी डॉक्टरों की नौकरी की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 कर देने की घोषणा सरकार कर चुकी है। जिससे डॉक्टर को 5 वर्ष अतिरिक्त सेवाएं देनी पड़ेगी। हालांकि सरकार की इस घोषणा से मरीज तो प्रसन्न है क्योंकि उन्हें एक्सपीरियंस डॉक्टर से इलाज मिलेगा। लेकिन घोषणा के दो माह बाद तक भी किसी भी मेडिकल एसोसिएशन द्वारा
इस निर्णय का स्वागत नहीं किया गया है जिससे जाहिर हो रहा है कि डॉक्टर 60 की उम्र में भी रिटायरमेंट चाह रहे है। वहीं सिविल अस्पताल के डॉक्टर ने दबी जुबान कह रहे हैं कि सरकार को सभी की उम्र बढ़ाने की बजाएं चिकित्सकों से राय मांगनी चाहिए जिससे जो चाहे वहीं चिकित्सक 65 तक काम करे। जो नहीं चाहें वह 60 की उम्र में ही रिटायरमेंट ले लें।
डॉक्टर की कमी से जूझ रहा है जिला
पहले ही राज्य में डॉक्टर की कमी हैं। ऐसे में एलएनजेपी नागरिक अस्पताल के कई डॉक्टर अपनी नौकरी छोड़ कर दूसरी और प्राइवेट की ओर रुख कर गए है। यहीं नहीं काम के बोझ को देखते हुए डॉक्टरों पर तनाव इतना बढ़ चुका है कि वे रिटायरमेंट से पहले ही नौकरी छोड़ कर जाने लगे है।
डॉ. शैलेंद्र खांबरा सीनियर मेडिकल अधिकारी ने बताया कि गांव मथाना की सीएचसी में काम का बोझ तब बढ़ता है जब यहां से डॉक्टर डेपुटेशन पर चले जाते है जिससे तैनात डॉक्टरों पर डेपुटेशन पर गए डॉक्टर के काम का बोझ उठाना पड़ता है। मथाना अस्पताल में लैब टेक्नीसिएन नहीं है।
अन्य सीएचसी में दो दो लैब टेक्नीलिएन तैनात है। यहां की सीएचसी प्लान स्कीम के तहत बनाई गई है। यहां पर मल्टी पर्पज हेल्थ मेल तो तैनात है फीमेल नहीं है। जिसका बोझ पड़ रहा है। इसके लिए स्थानीय विधायक को गुहार लगाई गई है कि यहां पर खाली पड़े पदों पर कर्मियों की तैनाती की जाएं। उन्होंने कहा कि इस बाबत सीएमओ को लिखित में मांग दी है। सीएमओ ने मिलकर मामला पर बातचीत के लिए बुलाया है।
ये लिखा है पत्र में
मथाना सीएचसी में तैनात सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. शैलेंद्र खांबरा ने पत्र में लिखा है कि यहां पर तैनात सभी चिकित्सकों की 24 गुणा 7 के तहत आपातकालीन ड्यूटी लगाई जाती है। इसमें पुरुष चिकित्सक सायं 4 बजे से, अगले दिन सुबह 5 बजे तक ड्यूटी करते हैं। वहीं इससे पहले सभी चिकित्सक सुबह से दोपहर 2 बजे तक भी ड्यूटी देते है। इसी तरह रविवार को महिला चिकित्सा अधिकारी ड्यूटी करती है।
पत्र मिलने से ही इनकार
सिविल सर्जन डॉ. एसके नैन ने बताया कि उन्हें इस प्रकार का कोई पत्र नहीं मिला है। अगर किसी डॉक्टर को छुट्टी की दिक्कत आ रही है तो वे उसे मंजूर कर देंगे। वैसे जो क्लास वन अधिकारी के रैंक पर कार्यरत होता है उसे 24 घंटे ड्यूटी निभानी पड़ती है।