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पुरुषार्थ के बिना गुरुकृपा भी अर्थहीन हो जाती है : भारती

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Jun 2025 01:54 AM IST
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Without effort, even Guru's grace becomes meaningless: Bharti
बाबैन।  सत्संग में प्रवचन देती साध्वी सोनिया भारती व अन्य। विज्ञप्ति
बाबैन। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस मौके पर दिव्य गुरु आशुतोष की शिष्या साध्वी सोनिया भारती ने प्रेरणादायी विचारों से श्रद्धालुओं को कृतार्थ किया। उन्होंने कहा कि जब परमपिता परमात्मा साकार स्वरूप में धरती पर आता है तो वह अपनी कृपा से संपूर्ण मानव जाति को सींचता है। यदि मानव ही अपने संकीर्ण दृष्टिकोण के दायरे से बाहर निकलकर उसकी कृपा का अनुभव ही न करना चाहे तो स्वयं परमात्मा भी उसका उद्धार नहीं कर सकता। सत्संग का संदेश मिलना, पूर्ण संत की शरण में जाना, ब्रह्म ज्ञान से जुड़ना और ध्यान साधना में उतरकर परमात्मा के परम प्रकाश स्वरूप का दर्शन करना। इन दिव्य अनुभूतियों का आधार केवल गुरु की कृपा ही हो सकती है।
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साध्वी ने कहा कि मनुष्य के जीवन में बहुत से पड़ाव ऐसे आते हैं जब वह स्वयं को अकेला नि:सहाय और बेबस खड़ा पाता है। गुरु कृपा का आधार लिए बिना पुरुषार्थ का परिणाम क्षणिक सुखदायक तो हो सकता है लेकिन स्थायी नहीं हो सकता। गुरुकृपा द्वारा प्राप्त सफलता चिरस्थाई एवं आनंददायक होती है। गुरु कृपा वह सुगंध है जो मानव जीवन के प्रत्येक कर्म को सुवासित करती है।
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