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Kurukshetra News: मंडियों में गिरे सफेद आलू के दाम
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कुरुक्षेत्र। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने प्रदेश की मंडियों में सफेद आलू के लगातार गिरते दामों के लिए सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। यूनियन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि जिले की पिपली, शाहाबाद और बाबैन सहित प्रदेश की मंडियों में सफेद आलू के भाव उत्पादन लागत से भी नीचे चले गए हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से भावांतर भरपाई योजना अब तक लागू नहीं की गई, जो सीधे तौर पर किसानों के साथ अन्याय है।
भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी का कहना है कि कुरुक्षेत्र के अलावा पंचकुला, सिरसा, सोनीपत, यमुनानगर और अंबाला की मंडियों में भी सफेद आलू के दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। किसान अपनी फसल मंडियों में लेकर पहुंच रहे हैं लेकिन उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही। इससे सफेद आलू उत्पादक किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। यूनियन की प्रमुख मांग है कि लाल और सफेद आलू के लिए अलग-अलग भाव और औसत तय किया जाए।
भावांतर भरपाई की गणना वास्तविक मंडी विक्रय मूल्य के आधार पर हो और पोर्टल पर पंजीकृत आलू फसल का तुरंत सत्यापन कराया जाए। साथ ही ई-खरीद पोर्टल पर कोटा जारी कर ऑनलाइन गेट पास व्यवस्था बहाल की जाए। यूनियन ने बताया कि दूसरी ओर लाल आलू के दाम अपेक्षाकृत बेहतर बने हुए हैं। इसी कारण मंडियों में औसत या मॉडल भाव ऊपर दिखाया जा रहा है। इस औसत में लाल आलू के भाव जुड़ने से सफेद आलू का वास्तविक नुकसान छिप रहा है।
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नतीजतन सफेद आलू उत्पादक किसानों को भावांतर भरपाई योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा, जो पूरी तरह से अनुचित है। भाकियू (चढ़ूनी) ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया तो किसानों को भारी नुकसान होगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभागों की होगी। मांगें न माने जाने पर संगठन ने आंदोलन का रास्ता अपनाने की भी चेतावनी दी है। भाकियू (चढ़ूनी) ने आरोप लगाया कि आलू की फसल मंडियों में पहुंचने के बावजूद ई-खरीद पोर्टल पर किसानों की ओर से पंजीकृत फसल का सत्यापन अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
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भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी का कहना है कि कुरुक्षेत्र के अलावा पंचकुला, सिरसा, सोनीपत, यमुनानगर और अंबाला की मंडियों में भी सफेद आलू के दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। किसान अपनी फसल मंडियों में लेकर पहुंच रहे हैं लेकिन उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही। इससे सफेद आलू उत्पादक किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। यूनियन की प्रमुख मांग है कि लाल और सफेद आलू के लिए अलग-अलग भाव और औसत तय किया जाए।
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भावांतर भरपाई की गणना वास्तविक मंडी विक्रय मूल्य के आधार पर हो और पोर्टल पर पंजीकृत आलू फसल का तुरंत सत्यापन कराया जाए। साथ ही ई-खरीद पोर्टल पर कोटा जारी कर ऑनलाइन गेट पास व्यवस्था बहाल की जाए। यूनियन ने बताया कि दूसरी ओर लाल आलू के दाम अपेक्षाकृत बेहतर बने हुए हैं। इसी कारण मंडियों में औसत या मॉडल भाव ऊपर दिखाया जा रहा है। इस औसत में लाल आलू के भाव जुड़ने से सफेद आलू का वास्तविक नुकसान छिप रहा है।
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नतीजतन सफेद आलू उत्पादक किसानों को भावांतर भरपाई योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा, जो पूरी तरह से अनुचित है। भाकियू (चढ़ूनी) ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया तो किसानों को भारी नुकसान होगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभागों की होगी। मांगें न माने जाने पर संगठन ने आंदोलन का रास्ता अपनाने की भी चेतावनी दी है। भाकियू (चढ़ूनी) ने आरोप लगाया कि आलू की फसल मंडियों में पहुंचने के बावजूद ई-खरीद पोर्टल पर किसानों की ओर से पंजीकृत फसल का सत्यापन अभी तक पूरा नहीं हुआ है।