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छठ परंपरा का निर्वहन करते हुए व्रतधारियों ने जल में खड़े हो तीन बार दिया डूबते सूर्य को अर्घ्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Nov 2021 02:18 AM IST
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While discharging the Chhath tradition, the fasting devotees stood in the water and offered Arghya to the setting sun thrice.
कुरुक्षेत्र। छठ महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर लगी पूर्वांचल समाज के लोगों की भीड़। - फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर व्रतधारियों ने छठ पर्व पूजन परंपरा का निर्वहन करते हुए तीन बार डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ सरोवर के जल में खड़े होकर सूर्य आराधना की। श्रद्धालुओं ने पवित्र तट पर रहकर रात को भजन कीर्तन किया। वहीं बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का परायण करेंगे।
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बता दें कोरोना महामारी के बाद ब्रह्मसरोवर और सरस्वती तीर्थ पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कई श्रद्धालु जमीन पर रेंगते हुए ब्रह्मसरोवर तक पहुंचे। वहीं पूर्वांचल सभा की ओर से सरस्वती तीर्थ पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सभा की ओर से राधा-कृष्ण की झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने महोत्सव में समां बांध दिया। श्री पूर्वांचल छठ पर्व महासभा से जुड़े सुनील राय ने बताया कि छठ पूजा का पर्व उत्तर प्रदेश व बिहार समेत देश के कई हिस्सों में मनाया जाता है। दिवाली के बाद छठ को सूर्य उपासना का पर्व माना जाता है। ब्रह्मसरोवर में छठ पर्व की दो वर्ष बाद कोरोना महामारी से राहत के बाद अधिक गहमागहमी रही। कुछ राजनेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि छठ पर्व में भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। लोग निरोगी काया और संतान की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी पूजा करते हैं। आज वीरवार को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके साथ ही व्रतधारियों का व्रत तथा पर्व संपूर्ण हो जाएगा।
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छठ पर्व का महत्व
सुनील राय ने बताया कि यह व्रत सूर्य भगवान, ऊषा, प्रकृति, जल व वायु को समर्पित है। इस व्रत को करने से निसंतान दंपतियों को संतान सुख प्राप्त होता है। यह व्रत संतान की रक्षा और उनके जीवन की खुशहाली के लिए किया जाता है। इस व्रत का फल सैकड़ों यज्ञों के फल की प्राप्ति से भी ज्यादा होता है। सिर्फ संतान ही नहीं, बल्कि परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है।
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पूजन पर किया कार्यकारिणी का गठन
छठ पर्व पूजन पर अखिल भारतीय छठ पर्व सेवा समिति की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें सविता सिंह को समिति का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। संजय कुमार को राष्ट्रीय महासचिव, जसपाल को चेयरमैन, हरिनारायण मिश्रा को राष्ट्रीय संरक्षक, सुरेश कुमार को संयुक्त सचिव, अजय गुप्ता को राष्ट्रीय सचिव, कौशलेंद्र मिश्रा को राष्ट्रीय सलाहकार व रिंकू सक्सेना को सह-सलाकार की जिम्मेवारी सौंपी गई है।

कुरुक्षेत्र। छठ पर्व के दौरान ब्रह्मसरोवर के जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्ध?

कुरुक्षेत्र। छठ पर्व के दौरान ब्रह्मसरोवर के जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्ध?- फोटो : Kurukshetra

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