{"_id":"6a24775b729b31607d014a6f","slug":"when-students-got-their-hands-on-tools-their-ideas-took-shape-kurukshetra-news-c-45-1-kur1010-156017-2026-06-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: जब विद्यार्थियों के हाथों में आए औजार, विचारों ने लिया आकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: जब विद्यार्थियों के हाथों में आए औजार, विचारों ने लिया आकार
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। अपने हाथ से बनाई कलाकृति दिखाती छात्राएं। संवाद
कुरुक्षेत्र। लकड़ी, धातु, टोकरी, कठपुतली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता। सामान्य तौर पर ये विषय अलग-अलग दुनिया के लगते हैं, लेकिन राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) के छह दिवसीय युवा डिजाइन शिविर क्यूरियस क्रिएटर्स में इन्हीं तत्वों ने मिलकर रचनात्मकता की नई तस्वीर गढ़ी। देशभर से संस्थान पहुंचे विद्यार्थियों ने न केवल डिजाइन की बारीकियां सीखीं, बल्कि यह भी समझा कि एक विचार किस तरह समाज के लिए उपयोगी समाधान में बदला जा सकता है।
शिविर के दौरान विद्यार्थियों ने पारंपरिक भारतीय शिल्प और आधुनिक तकनीक के बीच संबंध को समझा। किसी ने लकड़ी और धातु से उपयोगी वस्तुएं तैयार कीं तो किसी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से नए डिजाइन विकसित किए। कठपुतली कला के माध्यम से प्रभावी संवाद और टोकरी बुनाई के जरिए धैर्य, कौशल तथा सृजनशीलता का अभ्यास कराया गया।
छह दिन के शिविर के समापन अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने तैयार किए गए मॉडल, एप और शिल्प परियोजनाओं का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में मौलिक सोच, नवाचार और व्यावहारिक दृष्टिकोण की झलक साफ दिखाई दी।
विज्ञापन
इस दौरान एनआईडी के निदेशक प्रो. रमणीक मजीठिया ने कहा कि डिजाइन केवल सुंदर वस्तुएं बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि मानव जीवन को सरल, उपयोगी और बेहतर बनाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में रचनात्मक सोच विकसित करना समय की आवश्यकता है और संस्थान इस दिशा में लगातार प्रयासरत है।
कुरुक्षेत्र को उत्तर भारत में डिजाइन और नवाचार की पहचान दिलाना लक्ष्य
इस कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि आईआईटी रुड़की के डॉ. सप्तर्षि कोहले ने विद्यार्थियों को सीखने की जिज्ञासा बनाए रखने और रचनात्मकता को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं का होगा जो समस्याओं को अवसर में बदलने की क्षमता रखते हैं। वहीं एनआईडी की तरफ से कहा गया कि वह आने वाले समय में स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजाइन शिक्षा पहुंचाने के लिए और अधिक कार्यक्रम आयोजित करेगा। संस्थान का लक्ष्य कुरुक्षेत्र को उत्तर भारत में डिजाइन और नवाचार की पहचान दिलाना है।
विज्ञापन
शिविर के दौरान विद्यार्थियों ने पारंपरिक भारतीय शिल्प और आधुनिक तकनीक के बीच संबंध को समझा। किसी ने लकड़ी और धातु से उपयोगी वस्तुएं तैयार कीं तो किसी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से नए डिजाइन विकसित किए। कठपुतली कला के माध्यम से प्रभावी संवाद और टोकरी बुनाई के जरिए धैर्य, कौशल तथा सृजनशीलता का अभ्यास कराया गया।
विज्ञापन
छह दिन के शिविर के समापन अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने तैयार किए गए मॉडल, एप और शिल्प परियोजनाओं का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में मौलिक सोच, नवाचार और व्यावहारिक दृष्टिकोण की झलक साफ दिखाई दी।
विज्ञापन
इस दौरान एनआईडी के निदेशक प्रो. रमणीक मजीठिया ने कहा कि डिजाइन केवल सुंदर वस्तुएं बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि मानव जीवन को सरल, उपयोगी और बेहतर बनाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में रचनात्मक सोच विकसित करना समय की आवश्यकता है और संस्थान इस दिशा में लगातार प्रयासरत है।
कुरुक्षेत्र को उत्तर भारत में डिजाइन और नवाचार की पहचान दिलाना लक्ष्य
इस कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि आईआईटी रुड़की के डॉ. सप्तर्षि कोहले ने विद्यार्थियों को सीखने की जिज्ञासा बनाए रखने और रचनात्मकता को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं का होगा जो समस्याओं को अवसर में बदलने की क्षमता रखते हैं। वहीं एनआईडी की तरफ से कहा गया कि वह आने वाले समय में स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजाइन शिक्षा पहुंचाने के लिए और अधिक कार्यक्रम आयोजित करेगा। संस्थान का लक्ष्य कुरुक्षेत्र को उत्तर भारत में डिजाइन और नवाचार की पहचान दिलाना है।

कुरुक्षेत्र। अपने हाथ से बनाई कलाकृति दिखाती छात्राएं। संवाद