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धार्मिक चिह्नों को लेकर मिले अधिकारों का हनन नहीं स्वीकार : झींडा
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कुरुक्षेत्र। जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा।
- फोटो : निर्माणाधीन बैडमिंटन हॉल।
कुरुक्षेत्र। धार्मिक चिह्न पहनने के लिए मिले अधिकारों का हनन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा ने धार्मिक चिह्न पहनने के अधिकारों का अनुपालन करवाने का बीड़ा उठाया है। इसके चलते गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी पत्र लिखे हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की धारा 25 के अनुच्छेद एक में सभी धर्मों को अपने-अपने धार्मिक चिह्न पहनने का अधिकार मिला है। इस धारा के तहत लोग धार्मिक चिह्न पहनने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र हैं और किसी के पास भी इन्हें शरीर से अलग करने या इनकी बेअदबी करने का कोई अधिकार नहीं है।
झींडा ने कहा कि मुसलमान वर्ग से संबंधित महिलाएं बुर्का पहन कर परीक्षा देने के साथ-साथ हवाई जहाज में सवार हो सकती हैं और इसाई वर्ग से संंबंधित लोग गले में पहने धार्मिक चिह्न समेत कहीं भी जा सकते हैं जबकि हिंदू वर्ग से संबंधित लोग अपना धार्मिक चिह्न जनेउ डाल कर प्रतियोगी परीक्षा दे सकते हैं और हवाई जहाज पर सफर भी कर सकते हैं। मगर सिखों के धार्मिक चिह्नों काे टारगेट किया जाना सही नहीं हो सकता।
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संविधान की धारा 25 के तहत अमृतधारी सिख पांच ककार (केश, कंघा, कड़ा, किरपाण व कशहरा) पहन कर कहीं भी जा सकता है। किसी के पास भी इन्हें गुरसिख के शरीर से अलग करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म को छोड़ कर बाकी किसी भी धर्म के धार्मिक चिह्नों पर अटैक नहीं किया गया। चाहे प्रतियोगी परीक्षा देने की बात आए, चाहे हवाई जहाज का सफर करने का मसला, हर बार अमृतधारी सिखों के धार्मिक चिह्नों का निशाना बनाया जाता है।
झींडा ने कहा कि यूएनओ की ओर से भी भारतीय संविधान की धारा 25 के तहत धार्मिक चिह्नों को मिले अधिकारों के बारे में कहा गया है कि कोई भी धार्मिक चिह्नों पर टारगेट नहीं कर सकता। ऐसा करने पर जेल भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वे कमेटी की ओर से यूएनओ से भी इस बारे में अपील करते हैं कि धार्मिक चिह्न पहनने के अधिकारों की रक्षा करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
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उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की धारा 25 के अनुच्छेद एक में सभी धर्मों को अपने-अपने धार्मिक चिह्न पहनने का अधिकार मिला है। इस धारा के तहत लोग धार्मिक चिह्न पहनने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र हैं और किसी के पास भी इन्हें शरीर से अलग करने या इनकी बेअदबी करने का कोई अधिकार नहीं है।
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झींडा ने कहा कि मुसलमान वर्ग से संबंधित महिलाएं बुर्का पहन कर परीक्षा देने के साथ-साथ हवाई जहाज में सवार हो सकती हैं और इसाई वर्ग से संंबंधित लोग गले में पहने धार्मिक चिह्न समेत कहीं भी जा सकते हैं जबकि हिंदू वर्ग से संबंधित लोग अपना धार्मिक चिह्न जनेउ डाल कर प्रतियोगी परीक्षा दे सकते हैं और हवाई जहाज पर सफर भी कर सकते हैं। मगर सिखों के धार्मिक चिह्नों काे टारगेट किया जाना सही नहीं हो सकता।
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संविधान की धारा 25 के तहत अमृतधारी सिख पांच ककार (केश, कंघा, कड़ा, किरपाण व कशहरा) पहन कर कहीं भी जा सकता है। किसी के पास भी इन्हें गुरसिख के शरीर से अलग करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म को छोड़ कर बाकी किसी भी धर्म के धार्मिक चिह्नों पर अटैक नहीं किया गया। चाहे प्रतियोगी परीक्षा देने की बात आए, चाहे हवाई जहाज का सफर करने का मसला, हर बार अमृतधारी सिखों के धार्मिक चिह्नों का निशाना बनाया जाता है।
झींडा ने कहा कि यूएनओ की ओर से भी भारतीय संविधान की धारा 25 के तहत धार्मिक चिह्नों को मिले अधिकारों के बारे में कहा गया है कि कोई भी धार्मिक चिह्नों पर टारगेट नहीं कर सकता। ऐसा करने पर जेल भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वे कमेटी की ओर से यूएनओ से भी इस बारे में अपील करते हैं कि धार्मिक चिह्न पहनने के अधिकारों की रक्षा करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।