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चुनौतियों के साथ आज पदभार संभालेंगे नए कुलपति
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 31 Mar 2016 01:08 AM IST
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केयू के नए कुलपति प्रोफेसर केसी शर्मा गुरुवार को पदभार संभालेंगे। करीब सात माह से स्थायी कुलपति की राह देख रही यूनिवर्सिटी में नए कुलपति के लिए अच्छी खासी चुनौतियां भी तैयार हैं। नया पदभार लेते ही प्रोफेसर केसी शर्मा को इन चुनौतियों का तोहफा भी मिलने वाला है। कुलपति सुबह करीब साढ़े दस बजे पदभार लेंगे।
केयू में स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं होने से पिछले सात माह से समस्याओं का अंबार लगा हुआ। विद्यार्थियों से लेकर शिक्षकों तक और कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक के कई काम स्थायी कुलपति के कारण पेंडिंग पड़े थे। ऐसे में प्रोफेसर केसी शर्मा की नियुक्ति से यूनिवर्सिटी में खुशी का माहौल है लेकिन प्रोफेसर शर्मा के लिए कड़ी परीक्षा भी होनी है।
ये रहेंगीं प्रमुख चुनौतियां
1. रुबते का हक फिर से दिलाना
केयू को यूजीसी नैक की ए ग्रेड मिली थी। लेकिन ए ग्रेड यूनिवर्सिटी का अवधि 2014 तक ही थी। इसके बाद से ही यूनिवर्सिटी बगैर ग्रेड के ही चल रही है। इसका असर प्रवेश से लेकर ग्रांट तक में पड़ा है। नए कुलपति के सामने नैक का दौरा कराना भी एक चुनौती ही रहेगी।
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2. शिक्षकों के 50 फीसदी पद खाली
कुलपति प्रोफेसर शर्मा के सामने यह संकट भी रहेगा कि प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के आधे पद खाली ही हैं। सूत्रों की मानें तो यूनिवर्सिटी में करीब 50 फीसदी शिक्षकों के पद खाली ही पड़े हैं। ऐसे में न कोर्स समय पर पूरा हो पाता है और न ही रिसर्च वर्क ही आगे बढ़ पा रहा है। पढ़ाई का जिम्मा कांट्रेक्ट बेस टीचर्स के जिम्मे ही चलाना पड़ रहा है।
3. अटके पड़े हैं करोड़ों के रिसर्च प्रोजेक्ट
सूत्रों की मानें तो यूनिवर्सिटी के नियमित शिक्षकों के पास यूजीसी सहित अन्य फंडिंग एजेंसी के करोड़ों के रिसर्च प्रोजेक्ट हैं। लेकिन विभागीय समसस्याओं के कारण कई प्रोजेक्ट अटके हुए हैं। बताया जाता है कि ऑडिट की समस्या को लेकर शिक्षकों ने करोड़ों के प्रोजेक्ट रोके हुए हैं। इनमें आईऑनबिन के तहत दस करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भी शामिल है। कुलपति के सामने रिसर्च वर्क को आगे बढ़ाने की भी चुनौती रहेगी।
4. हाउस अलॉटमेंट का मामला
कुटा का आरोप था कि हाउस अलॉटमेंट में नियमों को दरकिनार कर अपात्र शिक्षकों को ही हाउस अलॉटमेंट कर दिए गए। इसे लेकर कुटा की बैठकों में शिक्षकों ने जमकर नाराजगी भी जाहिर की थी। शिक्षकों का आरोप है कि कई शिक्षकों की सीनियरिटी को दरकिनार करके जूनियर को हाउस अलॉट कर दिए गए। यह सभी अलॉटमेंट वीसी कोटे से किए जाने के आरोप लगे हैं। ऐसे में नए कुलपति के सामने यह चुनौती भी रहेगी।
5. गलत लाभ लेने के मामले
सूत्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी में कई अधिकारियों पर नियम विरुद्ध लाभ लेने के आरोप भी हैं। एक मामला डीआर से परीक्षा नियंत्रक बनाए गए पंकज गुप्ता का भी है। कोर्ट ने इस प्रमोशन के दौरान नियमों को दरकिनार करने की याचिका दायर की गई है। सूत्रों का दावा है कि ऐसे कई और अधिकारी और कुछ शिक्षक हैं, जिन पर गलत दस्तावेज लगाने सहित नियम विरूद्ध लाभ लिए हैं। इन मामलों को रोकना भी कुलपति के लिए बड़ी चुनौती है।
6. समय पर रिजल्ट जारी कराना
कुलपति प्रोफेसर केसी शर्मा केसामने विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याएं भी चुनौती रहेगी। बड़ी चुनौती समय पर परीक्षा परिणाम जारी कराने की रहेगी। बताया जाता है कि कई परीक्षाओं के परिणाम इतनी लेट तक जारी किए जाते हैं कि अगली परीक्षा के लिए विद्यार्थियों के पास ज्यादा वक्त ही नहीं बचता है। कई परिणाम लेट होने से विद्यार्थी बाहर किसी अन्य कोर्स में दाखिला भी नहीं ले पाते हैं।
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केयू में स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं होने से पिछले सात माह से समस्याओं का अंबार लगा हुआ। विद्यार्थियों से लेकर शिक्षकों तक और कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक के कई काम स्थायी कुलपति के कारण पेंडिंग पड़े थे। ऐसे में प्रोफेसर केसी शर्मा की नियुक्ति से यूनिवर्सिटी में खुशी का माहौल है लेकिन प्रोफेसर शर्मा के लिए कड़ी परीक्षा भी होनी है।
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ये रहेंगीं प्रमुख चुनौतियां
1. रुबते का हक फिर से दिलाना
केयू को यूजीसी नैक की ए ग्रेड मिली थी। लेकिन ए ग्रेड यूनिवर्सिटी का अवधि 2014 तक ही थी। इसके बाद से ही यूनिवर्सिटी बगैर ग्रेड के ही चल रही है। इसका असर प्रवेश से लेकर ग्रांट तक में पड़ा है। नए कुलपति के सामने नैक का दौरा कराना भी एक चुनौती ही रहेगी।
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2. शिक्षकों के 50 फीसदी पद खाली
कुलपति प्रोफेसर शर्मा के सामने यह संकट भी रहेगा कि प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के आधे पद खाली ही हैं। सूत्रों की मानें तो यूनिवर्सिटी में करीब 50 फीसदी शिक्षकों के पद खाली ही पड़े हैं। ऐसे में न कोर्स समय पर पूरा हो पाता है और न ही रिसर्च वर्क ही आगे बढ़ पा रहा है। पढ़ाई का जिम्मा कांट्रेक्ट बेस टीचर्स के जिम्मे ही चलाना पड़ रहा है।
3. अटके पड़े हैं करोड़ों के रिसर्च प्रोजेक्ट
सूत्रों की मानें तो यूनिवर्सिटी के नियमित शिक्षकों के पास यूजीसी सहित अन्य फंडिंग एजेंसी के करोड़ों के रिसर्च प्रोजेक्ट हैं। लेकिन विभागीय समसस्याओं के कारण कई प्रोजेक्ट अटके हुए हैं। बताया जाता है कि ऑडिट की समस्या को लेकर शिक्षकों ने करोड़ों के प्रोजेक्ट रोके हुए हैं। इनमें आईऑनबिन के तहत दस करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भी शामिल है। कुलपति के सामने रिसर्च वर्क को आगे बढ़ाने की भी चुनौती रहेगी।
4. हाउस अलॉटमेंट का मामला
कुटा का आरोप था कि हाउस अलॉटमेंट में नियमों को दरकिनार कर अपात्र शिक्षकों को ही हाउस अलॉटमेंट कर दिए गए। इसे लेकर कुटा की बैठकों में शिक्षकों ने जमकर नाराजगी भी जाहिर की थी। शिक्षकों का आरोप है कि कई शिक्षकों की सीनियरिटी को दरकिनार करके जूनियर को हाउस अलॉट कर दिए गए। यह सभी अलॉटमेंट वीसी कोटे से किए जाने के आरोप लगे हैं। ऐसे में नए कुलपति के सामने यह चुनौती भी रहेगी।
5. गलत लाभ लेने के मामले
सूत्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी में कई अधिकारियों पर नियम विरुद्ध लाभ लेने के आरोप भी हैं। एक मामला डीआर से परीक्षा नियंत्रक बनाए गए पंकज गुप्ता का भी है। कोर्ट ने इस प्रमोशन के दौरान नियमों को दरकिनार करने की याचिका दायर की गई है। सूत्रों का दावा है कि ऐसे कई और अधिकारी और कुछ शिक्षक हैं, जिन पर गलत दस्तावेज लगाने सहित नियम विरूद्ध लाभ लिए हैं। इन मामलों को रोकना भी कुलपति के लिए बड़ी चुनौती है।
6. समय पर रिजल्ट जारी कराना
कुलपति प्रोफेसर केसी शर्मा केसामने विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याएं भी चुनौती रहेगी। बड़ी चुनौती समय पर परीक्षा परिणाम जारी कराने की रहेगी। बताया जाता है कि कई परीक्षाओं के परिणाम इतनी लेट तक जारी किए जाते हैं कि अगली परीक्षा के लिए विद्यार्थियों के पास ज्यादा वक्त ही नहीं बचता है। कई परिणाम लेट होने से विद्यार्थी बाहर किसी अन्य कोर्स में दाखिला भी नहीं ले पाते हैं।