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आचरण, व्यवहार शिष्टाचार में हिंदी का करें प्रयोग
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हिंदी सिर्फ हमारी राजभाषा, राष्ट्रभाषा ही नहीं है, बल्कि हिंदी हमारी मातृभाषा है, जिससे हमारे व्यक्तित्व का विकास व निर्माण हुआ है। वर्तमान में हिंदी के वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राष्ट्रभाषा हिंदी जन-जन की भाषा बनने जा रही है। हमें अपने दैनिक जीवन में आचरण, व्यवहार शिष्टाचार में हिंदी का बखूबी प्रयोग करना चाहिए, ताकि हमारे मानवीय मूल्यों व संवेदना को अर्जित करने में सहायता मिले।
राजकीय कन्या महाविद्यालय, पलवल के एसोसिएट प्रोफेसर कृष्ण कुमार ने कहा कि भाषा और विकास का सीधा संबंध है। कोई भी देश अपनी भाषा के बिना तरक्की नहीं कर सकता। विकसित देशों पर भी यही नियम लागू होता है। यदि हम बुद्धिजीवी, चिंतकों और आविष्कारकों को पैदा करना चाहते हैं तो भारतीय राष्ट्र राज्य को सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा का माध्यम हर स्तर पर स्वदेशी भाषा हो।
राजकीय कन्या महाविद्यालय, पलवल के सहायक प्रोफेसर सुनील कुमार थुआ का कहना है कि हिंदी भाषा एक महकता हुआ गुलदस्ता है व इसमें शामिल देश की विभिन्न बोलियां, उपभाषाएं इसके खिले हुए फूल हैं, जिसकी सुगंध भारतीय साझा संस्कृति की संवाहक हैं। हिंदी भाषा सिर्फ हमारी राष्ट्रभाषा, राजभाषा ही नहीं, अपितु हमारी मातृभाषा भी है, जिसमें हम शिक्षा व संस्कार ग्रहण करते हैं। वर्तमान में हिंदी वैश्विक परिदृश्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बन कर उभरी है। वैश्वीकरण व बाजारवाद के इस दौर में हिंदी दुनियाभर में अपने सामर्थ्य, सुगमता की वजह से अपने कदम तेजी से आगे बढ़ा रही है।
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राजकीय कन्या महाविद्यालय, पलवल की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी का कहना है कि मौजूदा समय वैश्वीकरण का है यदि हम वैश्वीकरण की नीतियों का लाभ उठाना चाहते हैं तो हमें भारत के प्रत्येक व्यक्ति को नवीन ज्ञान से जोड़ना होगा और यह तभी संभव है जब हम यहां की लोक भाषाओं के माध्यम से उनसे संपर्क करें। बहुराष्ट्रीय कंपनियां और मीडिया चैनल अपने उत्पादों और संदेशों को जनता तक पहुंचाने के लिए हिंदी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। यह हमारे लिए शुभ संकेत हैं।
राजकीय कन्या महाविद्यालय पलवल की प्राचार्य सुनील कुमारी कुंडू ने कहा कि वर्तमान में सूचना व तकनीकी के दौर में हिंदी की मांग बढ़ रही है, जिससे इसमें रोजगार के नए अवसर खुले हैं। हिंदी माध्यम से रोजगार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुली हैं। इन समस्त आवश्यकताओं व उपयोगिता को देखते हुए हमने क्षेत्र की बेटियों के भविष्य निर्माण में यह कदम उठाया है। हमारे महाविद्यालय ने हिंदी के प्रचार प्रसार व इसके उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए वर्तमान सत्र में स्नातकोत्तर में हिंदी पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।
युवा हिंदी कवि वीरेंद्र राठौर ने कविता के माध्यम से हिंदी के बारे में कहा कि भारत की गौरव गरिमा, हिंदी जिसका मान है। जाति धर्म से अनभिज्ञ है, ऐसी इसकी शान है। साहित्य के सृजन का भाव जगाती है हिंदी, भारत विश्व गुरु बने एहसास कराती है हिंदी। सुंदर, स्वर्णिम भविष्य को हिंदी करती है आसान, हिंदी, हिन्दू, हिन्दोस्तान बनता जिससे देश महान है।
हिंदी प्रेमी डॉ. अशोक कुमार वर्मा का कहना है कि हमारी हिंदी विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं हमारे देश की राजभाषा है। केंद्रीय स्तर पर भारत में दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है, लेकिन हिंदी संवैधानिक रूप से भारत की राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। कहा कि हिंदी हमारे सम्मान, स्वाभिमान और गर्व की भाषा है। हिंदी ने हमें विश्व में एक अलग पहचान दिलाई है।
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राजकीय कन्या महाविद्यालय, पलवल के एसोसिएट प्रोफेसर कृष्ण कुमार ने कहा कि भाषा और विकास का सीधा संबंध है। कोई भी देश अपनी भाषा के बिना तरक्की नहीं कर सकता। विकसित देशों पर भी यही नियम लागू होता है। यदि हम बुद्धिजीवी, चिंतकों और आविष्कारकों को पैदा करना चाहते हैं तो भारतीय राष्ट्र राज्य को सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा का माध्यम हर स्तर पर स्वदेशी भाषा हो।
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राजकीय कन्या महाविद्यालय, पलवल के सहायक प्रोफेसर सुनील कुमार थुआ का कहना है कि हिंदी भाषा एक महकता हुआ गुलदस्ता है व इसमें शामिल देश की विभिन्न बोलियां, उपभाषाएं इसके खिले हुए फूल हैं, जिसकी सुगंध भारतीय साझा संस्कृति की संवाहक हैं। हिंदी भाषा सिर्फ हमारी राष्ट्रभाषा, राजभाषा ही नहीं, अपितु हमारी मातृभाषा भी है, जिसमें हम शिक्षा व संस्कार ग्रहण करते हैं। वर्तमान में हिंदी वैश्विक परिदृश्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बन कर उभरी है। वैश्वीकरण व बाजारवाद के इस दौर में हिंदी दुनियाभर में अपने सामर्थ्य, सुगमता की वजह से अपने कदम तेजी से आगे बढ़ा रही है।
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राजकीय कन्या महाविद्यालय, पलवल की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी का कहना है कि मौजूदा समय वैश्वीकरण का है यदि हम वैश्वीकरण की नीतियों का लाभ उठाना चाहते हैं तो हमें भारत के प्रत्येक व्यक्ति को नवीन ज्ञान से जोड़ना होगा और यह तभी संभव है जब हम यहां की लोक भाषाओं के माध्यम से उनसे संपर्क करें। बहुराष्ट्रीय कंपनियां और मीडिया चैनल अपने उत्पादों और संदेशों को जनता तक पहुंचाने के लिए हिंदी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। यह हमारे लिए शुभ संकेत हैं।
राजकीय कन्या महाविद्यालय पलवल की प्राचार्य सुनील कुमारी कुंडू ने कहा कि वर्तमान में सूचना व तकनीकी के दौर में हिंदी की मांग बढ़ रही है, जिससे इसमें रोजगार के नए अवसर खुले हैं। हिंदी माध्यम से रोजगार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुली हैं। इन समस्त आवश्यकताओं व उपयोगिता को देखते हुए हमने क्षेत्र की बेटियों के भविष्य निर्माण में यह कदम उठाया है। हमारे महाविद्यालय ने हिंदी के प्रचार प्रसार व इसके उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए वर्तमान सत्र में स्नातकोत्तर में हिंदी पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।
युवा हिंदी कवि वीरेंद्र राठौर ने कविता के माध्यम से हिंदी के बारे में कहा कि भारत की गौरव गरिमा, हिंदी जिसका मान है। जाति धर्म से अनभिज्ञ है, ऐसी इसकी शान है। साहित्य के सृजन का भाव जगाती है हिंदी, भारत विश्व गुरु बने एहसास कराती है हिंदी। सुंदर, स्वर्णिम भविष्य को हिंदी करती है आसान, हिंदी, हिन्दू, हिन्दोस्तान बनता जिससे देश महान है।
हिंदी प्रेमी डॉ. अशोक कुमार वर्मा का कहना है कि हमारी हिंदी विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं हमारे देश की राजभाषा है। केंद्रीय स्तर पर भारत में दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है, लेकिन हिंदी संवैधानिक रूप से भारत की राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। कहा कि हिंदी हमारे सम्मान, स्वाभिमान और गर्व की भाषा है। हिंदी ने हमें विश्व में एक अलग पहचान दिलाई है।