फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Urmila won first prize in Sanjhi festival

सांझी उत्सव में उर्मिला ने जीता प्रथम पुरस्कार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Oct 2022 01:42 AM IST
विज्ञापन
Urmila won first prize in Sanjhi festival
हरियाणा की लोककला सांझी को संरक्षित करने की आवश्यकता है। विरासत इस कड़ी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आने वाली पीढ़ियां अपनी इस विरासत पर गर्व करेंगी। सांझी के माध्यम से हरियाणा की लोक कला के साक्षात दर्शन होते हैं। यह कला हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत में ग्रामीण लोक कलात्मकता को अभिव्यक्त करती है।
विज्ञापन

यह बात कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. संजीव शर्मा ने विरासत हेरीटेज विलेज में आयोजित राज्य स्तरीय सांझी उत्सव के पारितोषिक वितरण समारोह में कही। इससे पहले मुख्य अतिथि कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा व सुमिता शर्मा ने विरासत हेरीटेज विलेज में लगाई गई सांझी का अवलोकन किया। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिसार से पहुंचीं महिलाओं ने सांझी माता के गीत गाकर हरियाणा की लोक कला के प्रति अपने प्रेम का इजहार किया। हरविंदर राणा द्वारा प्रस्तुत म्हारा हरियाणा और बम लहरी गीत पर सभी श्रोता झूम उठे।
विज्ञापन

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल करने पर कुरुक्षेत्र की उर्मिला को 31 हजार, दूसरे स्थान पर सोनीपत की सीता को 21 हजार व तीसरे स्थान पर अंबाला की अनुसरण को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। वहीं सांत्वना पुरस्कारों में 5100 के पुरस्कार कौशल्या, किरण व अंजू को प्रदान किए गए, जबकि पांच सांत्वना पुरस्कार मंजू, सिमरन, सरस्वती और नम्रता को दिए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस प्रतियोगिता के तहत 1100 रुपये के पांच सांत्वना पुरस्कार बबली, कमलेश, सरला, सीमा, व मुकेश को देकर सम्मानित किया गया। इस मौके प्रो. नीलम, डॉ. रमेश, प्रो. नरेंद्र, डॉ. जसविंद्र, रंजन शर्मा, कुलदीप चोपड़ा, विनय, पंकज शर्मा, छवि अग्रवाल सहित अन्य मौजूद रहे।

वासी मक्खन शर्मा ने 400 साल पुरानी उर्दू की रामायण विरासत हेरीटेज विलेज को सौंपी। शर्मा ने कहा कि यह रामायण उनके पूर्वजों की निशानी है। इस निशानी को वह विरासत हेरिटेज विलेज में महफूज रखना चाहते हैं ताकि आने वाली पीढिय़ां इस पांडुलिपि के माध्यम से रामायण के पुराणिक इतिहास को समझ सकें। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. महासिंह पूनिया ने मक्खन शर्मा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस रामायण को विरासत के संग्रहालय में मक्खन शर्मा के परिवार की ओर से रखने का आश्वासन दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed