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यूरिया, डीएपी का विकल्प बनी जैविक खाद प्रोम
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हरियाण गोवंश अनुसंधान केंद्र पंचकूला की ओर से तैयार कराई गई जैविक खाद प्रोम दिखाते अधिकारी। संव?
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अधिक पैदावार के लिए किसानों ने यूरिया और डीएपी खाद का उपयोग करना शुरू कर दिया। इन खादों से पैदावार तो अच्छी हुई, लेकिन क्षमता से अधिक इस्तेमाल के कारण इसका मिट्टी के उपजाऊपन पर असर पड़ने लगा है। हरियाणा गोवंश अनुसंधान केंद्र पंचकूला ने इस समस्या को देखते हुए यूरिया और डीएपी का विकल्प प्रोम खाद तैयार की है।
प्रोम (फास्फेट रिच ऑर्गेनिक मैन्योर) नई तकनीक से बनी एक प्रकार की जैविक खाद है। इस खाद को बनाने के लिए गोबर और रॉक फॉस्फेट को प्रयोग में लाया जाता है। केंद्र में गोबर, गोकृपा अमृत और मिनरल उर्वरक से प्रोम खाद को तैयार किया जा रहा है। प्रोम का उपयोग पौधों को फास्फोरस (फास्फोरस पादप पोषक तत्व) उर्वरक प्रदान करने के लिए किया जाता है। खास बात यह है कि यह मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों में सुधार करके उत्पादन में वृद्धि करती है। इस खाद को अनुसंधान केंद्र के अधिकारी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय कृषि कार्यशाला में लेकर आए थे।
प्रोम के ये हैं फायदे
यह एक पर्यावरण हितैषी उत्पाद है। मृदा में ह्यूमस निर्माण में सहायक है और बीज अंकुरण प्रतिशत में वृद्धि करता है। भूमि के पीएच मान को संतुलित करता है। मृदा में लाभदायक सूक्ष्म जीवों की क्रियाविधि को बढ़ाता है। जैविक खाद से अनाज, दालें, सब्जी व फलों की गुणवत्ता बढ़ने, से अच्छा स्वाद मिलता है। किसान कम पैसे में प्रोम तकनीक से जैविक खाद बनाकर भरपूर फसल पैदा कर सकता है। प्रोम मिट्टी को नरम बनाने के साथ-साथ पोषक तत्वों की उपलब्धता लंबे समय तक बनाए रखती है। प्रोम लवणीय व क्षारीय भूमि में भी प्रभावी रूप में काम करती है, जबकि डीएपी ऐसी भूमि में काम नहीं करता है।
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40 से 45 दिनों में गोबर से तैयार होती है प्रोम खाद : डॉ. अश्वनी
हरियाणा गोवंश अनुसंधान केंद्र पंचकूला के वेटरिनरी सर्जन डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि 40 से 45 दिनों की प्रक्रिया से गोबर से प्रोम जैविक खाद को बनाया जा सकता है। गोशालाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए गोबर से प्रोम जैविक खाद तैयार करके किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हरियाणा गो सेवा आयोग ने पंचगव्य आधारित प्रमाणित उत्पादों के विपणन और व्यवसायीकरण के लिए गोतत्व के नाम से ट्रेडमार्क भी पंजीकृत करा लिया है। प्रोम जैविक खाद को भी गोतत्व प्रोम के नाम से उपयोग में लाया जा रहा है। केंद्र के तकनीकी मार्गदर्शन में महर्षि दयानंद सरस्वती गोशाला, गांव डोभी, हिसार में प्रोम का उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। प्रमाणित प्रयोगशालाओं ने प्रोम जैविक खाद की गुणवत्ता रिपोर्ट जारी की है, जिसमें अच्छे परिणाम सामने आए हैं। यह खाद सरकार से मान्यता प्राप्त है।
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कुरुक्षेत्र। अधिक पैदावार के लिए किसानों ने यूरिया और डीएपी खाद का उपयोग करना शुरू कर दिया। इन खादों से पैदावार तो अच्छी हुई, लेकिन क्षमता से अधिक इस्तेमाल के कारण इसका मिट्टी के उपजाऊपन पर असर पड़ने लगा है। हरियाणा गोवंश अनुसंधान केंद्र पंचकूला ने इस समस्या को देखते हुए यूरिया और डीएपी का विकल्प प्रोम खाद तैयार की है।
प्रोम (फास्फेट रिच ऑर्गेनिक मैन्योर) नई तकनीक से बनी एक प्रकार की जैविक खाद है। इस खाद को बनाने के लिए गोबर और रॉक फॉस्फेट को प्रयोग में लाया जाता है। केंद्र में गोबर, गोकृपा अमृत और मिनरल उर्वरक से प्रोम खाद को तैयार किया जा रहा है। प्रोम का उपयोग पौधों को फास्फोरस (फास्फोरस पादप पोषक तत्व) उर्वरक प्रदान करने के लिए किया जाता है। खास बात यह है कि यह मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों में सुधार करके उत्पादन में वृद्धि करती है। इस खाद को अनुसंधान केंद्र के अधिकारी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय कृषि कार्यशाला में लेकर आए थे।
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प्रोम के ये हैं फायदे
यह एक पर्यावरण हितैषी उत्पाद है। मृदा में ह्यूमस निर्माण में सहायक है और बीज अंकुरण प्रतिशत में वृद्धि करता है। भूमि के पीएच मान को संतुलित करता है। मृदा में लाभदायक सूक्ष्म जीवों की क्रियाविधि को बढ़ाता है। जैविक खाद से अनाज, दालें, सब्जी व फलों की गुणवत्ता बढ़ने, से अच्छा स्वाद मिलता है। किसान कम पैसे में प्रोम तकनीक से जैविक खाद बनाकर भरपूर फसल पैदा कर सकता है। प्रोम मिट्टी को नरम बनाने के साथ-साथ पोषक तत्वों की उपलब्धता लंबे समय तक बनाए रखती है। प्रोम लवणीय व क्षारीय भूमि में भी प्रभावी रूप में काम करती है, जबकि डीएपी ऐसी भूमि में काम नहीं करता है।
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40 से 45 दिनों में गोबर से तैयार होती है प्रोम खाद : डॉ. अश्वनी
हरियाणा गोवंश अनुसंधान केंद्र पंचकूला के वेटरिनरी सर्जन डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि 40 से 45 दिनों की प्रक्रिया से गोबर से प्रोम जैविक खाद को बनाया जा सकता है। गोशालाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए गोबर से प्रोम जैविक खाद तैयार करके किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हरियाणा गो सेवा आयोग ने पंचगव्य आधारित प्रमाणित उत्पादों के विपणन और व्यवसायीकरण के लिए गोतत्व के नाम से ट्रेडमार्क भी पंजीकृत करा लिया है। प्रोम जैविक खाद को भी गोतत्व प्रोम के नाम से उपयोग में लाया जा रहा है। केंद्र के तकनीकी मार्गदर्शन में महर्षि दयानंद सरस्वती गोशाला, गांव डोभी, हिसार में प्रोम का उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। प्रमाणित प्रयोगशालाओं ने प्रोम जैविक खाद की गुणवत्ता रिपोर्ट जारी की है, जिसमें अच्छे परिणाम सामने आए हैं। यह खाद सरकार से मान्यता प्राप्त है।