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मानवीय संबंधों की गरिमा को समझें वही सच्ची शिक्षा : डाॅ. विद्यालंकार
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कुरुक्षेत्र। गुरुकुल कुरुक्षेत्र का 111वां वार्षिक महोत्सव शिक्षा संस्कृति एवं राष्ट्र रक्षा सम्मेलन के साथ वीरवार को शुरू हुआ। दो दिवसीय महोत्सव के पहले दिन आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री उमेद सिंह मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। राज्यपाल गुजरात के ओएसडी डाॅ. राजेंद्र विद्यालंकार समारोह में मुख्य वक्ता रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मानवीय संबंधों की गरिमा को समझें वही सच्ची शिक्षा है।
डाॅ. राजेंद्र विद्यालंकार ने अभिभावकों की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि दुनिया में सबसे कठिन कार्य एक अभिभावक होना है। एक बच्चे का ठीक से पालन-पोषण करना सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि आज समाज में अनेक तरह की कुरीतियां फैली है, जिनसे अपने बच्चों को दूर रखना हर अभिभावक के लिए कठिन कार्य है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल कैंपस में पढ़ने वाला प्रत्येक छात्र और उसके अभिभावक भाग्यशाली है, क्योंकि यहां बच्चों को उस दूषित वातावरण से न केवल बचाया जाता है बल्कि उन्हें अक्षर ज्ञान के साथ संस्कारों की ऐसी पूंजी सौंपी जाती है, जिससे वे अपने परिवार, समाज व राष्ट्र का गौरव बने। इससे पूर्व आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री उमेद सिंह ने गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली और वर्तमान शिक्षा नीति के भेद को समझाते हुए अभिभावकों से अपने बच्चों को गुरुकुलों में भेजकर संस्कारवान बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द ने सत्यार्थ प्रकाश में गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति से ही बच्चों को शिक्षित कराने पर बल दिया।
उल्लेखनीय है कि विज्ञान-प्रदर्शन के उद्घाटन के साथ कार्यक्रम शुभारंभ हुआ। महोत्सव के दूसरे दिन हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय मुख्यातिथि होंगे तो वहीं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत भी मुख्य तौर पर मौजूद रहेंगे। आर्य बाल भारती स्कूल पानीपत के प्रधान आर्य रणदीप कादियान, मुख्य संरक्षक संजीव आर्य, आचार्य दयाशंकर शास्त्री व अन्य अध्यापक और संरक्षकवृंद उपस्थित रहे। इस दौरान कोच बलबीर सिंह के नेतृत्व में शूटिंग के छात्रों द्वारा बेहतरीन निशानेबाजी एवं सुर से सुर मिलाकर गाएं गीत द्वारा अतिथियों का स्वागत किया। ब्रह्मचारी चिराग ने गुरुकुल के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद के जीवन-परिचय को संस्कृत भाषा में प्रस्तुत किया। वहीं ब्रह्मचारी अमन, अंशुल व आदित्य ने प्राकृतिक कृषि पर शानदार नाटक प्रस्तुत किया। ब्रिगेडियर डाॅ. प्रवीण कुमार ने गुरुकुल की विभिन्न उपलब्धियों का जिक्र किया।
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डाॅ. राजेंद्र विद्यालंकार ने अभिभावकों की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि दुनिया में सबसे कठिन कार्य एक अभिभावक होना है। एक बच्चे का ठीक से पालन-पोषण करना सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि आज समाज में अनेक तरह की कुरीतियां फैली है, जिनसे अपने बच्चों को दूर रखना हर अभिभावक के लिए कठिन कार्य है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल कैंपस में पढ़ने वाला प्रत्येक छात्र और उसके अभिभावक भाग्यशाली है, क्योंकि यहां बच्चों को उस दूषित वातावरण से न केवल बचाया जाता है बल्कि उन्हें अक्षर ज्ञान के साथ संस्कारों की ऐसी पूंजी सौंपी जाती है, जिससे वे अपने परिवार, समाज व राष्ट्र का गौरव बने। इससे पूर्व आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री उमेद सिंह ने गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली और वर्तमान शिक्षा नीति के भेद को समझाते हुए अभिभावकों से अपने बच्चों को गुरुकुलों में भेजकर संस्कारवान बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द ने सत्यार्थ प्रकाश में गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति से ही बच्चों को शिक्षित कराने पर बल दिया।
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उल्लेखनीय है कि विज्ञान-प्रदर्शन के उद्घाटन के साथ कार्यक्रम शुभारंभ हुआ। महोत्सव के दूसरे दिन हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय मुख्यातिथि होंगे तो वहीं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत भी मुख्य तौर पर मौजूद रहेंगे। आर्य बाल भारती स्कूल पानीपत के प्रधान आर्य रणदीप कादियान, मुख्य संरक्षक संजीव आर्य, आचार्य दयाशंकर शास्त्री व अन्य अध्यापक और संरक्षकवृंद उपस्थित रहे। इस दौरान कोच बलबीर सिंह के नेतृत्व में शूटिंग के छात्रों द्वारा बेहतरीन निशानेबाजी एवं सुर से सुर मिलाकर गाएं गीत द्वारा अतिथियों का स्वागत किया। ब्रह्मचारी चिराग ने गुरुकुल के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद के जीवन-परिचय को संस्कृत भाषा में प्रस्तुत किया। वहीं ब्रह्मचारी अमन, अंशुल व आदित्य ने प्राकृतिक कृषि पर शानदार नाटक प्रस्तुत किया। ब्रिगेडियर डाॅ. प्रवीण कुमार ने गुरुकुल की विभिन्न उपलब्धियों का जिक्र किया।
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