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Kurukshetra News: चेक बाउंस के मामले में दो साल की सजा रद्द, आरोपी बरी
Sun, 22 Mar 2026 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 22 Mar 2026 01:23 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। सत्र अदालत ने क्रिमिनल अपील में दो साल की सजा काट रहे दोषी करनाल जिले के धानो खेड़ी गांव निवासी अशोक कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया। उसकी सजा को रद्द करते हुए बरी कर दिया है। अशोक कुमार को पहले तत्कालीन ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास शेर सिंह की अदालत ने 1 जुलाई 2023 को दोषी ठहराया था और 3 जुलाई 2023 को दो वर्ष की साधारण कैद और चेक की दोगुनी राशि मुआवजे के रूप में चुकाने का आदेश दिया था। मुआवजा ने देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान था।
अपील के दौरान जमानत पर चल रहे दोषी अशोक कुमार और भारतीय बैंक लाडवा ब्रांच के बीच समझौता हो गया। समझौता पत्र के अनुसार अशोक ने बैंक को पूरी तय राशि का भुगतान कर दिया है और अब कोई बकाया नहीं है। बैंक की ओर से मैनेजर प्रियंका ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर कहा कि बैंक को दोषी के बरी होने पर कोई आपत्ति नहीं है। अशोक ने भी कंपाउंडिंग की अनुमति मांगी।
सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल ने प्रावधानों का हवाला देते हुए कंपाउंडिंग की अनुमति दी। अदालत ने निचली अदालत के 1 जुलाई 2023 के दोष सिद्धि फैसले और 3 जुलाई 2023 के सजा आदेश को रद्द कर दिया और अशोक कुमार को आरोप से बरी कर दिया।
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कुरुक्षेत्र। सत्र अदालत ने क्रिमिनल अपील में दो साल की सजा काट रहे दोषी करनाल जिले के धानो खेड़ी गांव निवासी अशोक कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया। उसकी सजा को रद्द करते हुए बरी कर दिया है। अशोक कुमार को पहले तत्कालीन ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास शेर सिंह की अदालत ने 1 जुलाई 2023 को दोषी ठहराया था और 3 जुलाई 2023 को दो वर्ष की साधारण कैद और चेक की दोगुनी राशि मुआवजे के रूप में चुकाने का आदेश दिया था। मुआवजा ने देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान था।
अपील के दौरान जमानत पर चल रहे दोषी अशोक कुमार और भारतीय बैंक लाडवा ब्रांच के बीच समझौता हो गया। समझौता पत्र के अनुसार अशोक ने बैंक को पूरी तय राशि का भुगतान कर दिया है और अब कोई बकाया नहीं है। बैंक की ओर से मैनेजर प्रियंका ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर कहा कि बैंक को दोषी के बरी होने पर कोई आपत्ति नहीं है। अशोक ने भी कंपाउंडिंग की अनुमति मांगी।
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सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल ने प्रावधानों का हवाला देते हुए कंपाउंडिंग की अनुमति दी। अदालत ने निचली अदालत के 1 जुलाई 2023 के दोष सिद्धि फैसले और 3 जुलाई 2023 के सजा आदेश को रद्द कर दिया और अशोक कुमार को आरोप से बरी कर दिया।
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