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25 वर्ष बाद मेहमान परिंदों का कलरव
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छिलछिला वन्य जीव विहार का दृश्य। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
पिहोवा। गांव सारसा स्थित छिलछिला वन्य जीव विहार को विदेशी पक्षियों का आशियाना बना गया है। इन विदेशी पक्षियों ने 25 सालों के बाद छिलछिला वन्य जीव विहार की तरफ रुख किया। अब यहां विदेशी पक्षियों का कलरव सुनाई देने लगा है। विदेशी पक्षियों के अनुरूप वातावरण पिहोवा के नागरिकों की सहभागिता से ही बन पाया है। यह जानकारी सोमवार को खेल राज्य मंत्री संदीप सिंह ने दी।
खेल राज्यमंत्री ने पत्रकार वार्ता में बताया मुख्यमंत्री के आदेशानुसार वन विभाग के अधिकारियों ने छिलछिला वन्य जीव विहार में विदेशी पक्षियों के लिए तमाम सुविधाएं और वातावरण तैयार करने का कार्य किया है। मुख्य रूप से पेंटेड स्टोर्क, रेड नेक्ड आइबिस, लिटिल,कार्मोरेंट, ग्रे हेरोन, लिटिल एंड कैटल एग्रेट, कोम्ब डक, लिटिल ग्रैब आदि यहां का लुत्फ उठाने आए हैं।
उन्होंने कहा कि इसका कुल क्षेत्रफल 28.92 हेक्टेयर है। ग्राम पंचायत सारसा ने 28 फरवरी 1986 को प्रस्ताव पारित करके इस क्षेत्र को वन्य प्राणी विहार के रूप में घोषित करने के अनुरोध किया था। इस पर सरकार की ओर से 28 नवंबर 1986 को अधिसूचना जारी कर के इसे वन्य प्राणी विहार घोषित किया गया। इस परिसर के जीर्णोद्घार से वन्य प्राणियों के लिए आश्रय स्थल निर्मित हुआ है।
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उन्होंने कहा कि विभाग ने मुख्यमंत्री के सामुदायिक हिस्सेदारी के सपने को साकार करने के लिए स्थानीय लोगों के साथ समन्वय स्थापित कर पक्षियों के सुरुचिपूर्ण वातावरण के लिए कार्य किए। इनमें वन्य जीव विहार के क्षेत्र से हानिकारक खरपतवारों को निकालकर उपयोगी वनस्पति का विकास, पक्षियों को आश्रय स्थल के रूप में मिट्टी का टीला बनाना। आवश्यकतानुसार वॉटर बॉडी से गाद निकालना, पक्षियों के लिए मछली व अन्य भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही फलदार व छायादार पौधों को लगाना शामिल हैं। छिलछिला स्थित मंदिर तक जाने के लिए वन विभाग ने पक्के रास्ते का निर्माण किया है।
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पिहोवा। गांव सारसा स्थित छिलछिला वन्य जीव विहार को विदेशी पक्षियों का आशियाना बना गया है। इन विदेशी पक्षियों ने 25 सालों के बाद छिलछिला वन्य जीव विहार की तरफ रुख किया। अब यहां विदेशी पक्षियों का कलरव सुनाई देने लगा है। विदेशी पक्षियों के अनुरूप वातावरण पिहोवा के नागरिकों की सहभागिता से ही बन पाया है। यह जानकारी सोमवार को खेल राज्य मंत्री संदीप सिंह ने दी।
खेल राज्यमंत्री ने पत्रकार वार्ता में बताया मुख्यमंत्री के आदेशानुसार वन विभाग के अधिकारियों ने छिलछिला वन्य जीव विहार में विदेशी पक्षियों के लिए तमाम सुविधाएं और वातावरण तैयार करने का कार्य किया है। मुख्य रूप से पेंटेड स्टोर्क, रेड नेक्ड आइबिस, लिटिल,कार्मोरेंट, ग्रे हेरोन, लिटिल एंड कैटल एग्रेट, कोम्ब डक, लिटिल ग्रैब आदि यहां का लुत्फ उठाने आए हैं।
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उन्होंने कहा कि इसका कुल क्षेत्रफल 28.92 हेक्टेयर है। ग्राम पंचायत सारसा ने 28 फरवरी 1986 को प्रस्ताव पारित करके इस क्षेत्र को वन्य प्राणी विहार के रूप में घोषित करने के अनुरोध किया था। इस पर सरकार की ओर से 28 नवंबर 1986 को अधिसूचना जारी कर के इसे वन्य प्राणी विहार घोषित किया गया। इस परिसर के जीर्णोद्घार से वन्य प्राणियों के लिए आश्रय स्थल निर्मित हुआ है।
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उन्होंने कहा कि विभाग ने मुख्यमंत्री के सामुदायिक हिस्सेदारी के सपने को साकार करने के लिए स्थानीय लोगों के साथ समन्वय स्थापित कर पक्षियों के सुरुचिपूर्ण वातावरण के लिए कार्य किए। इनमें वन्य जीव विहार के क्षेत्र से हानिकारक खरपतवारों को निकालकर उपयोगी वनस्पति का विकास, पक्षियों को आश्रय स्थल के रूप में मिट्टी का टीला बनाना। आवश्यकतानुसार वॉटर बॉडी से गाद निकालना, पक्षियों के लिए मछली व अन्य भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही फलदार व छायादार पौधों को लगाना शामिल हैं। छिलछिला स्थित मंदिर तक जाने के लिए वन विभाग ने पक्के रास्ते का निर्माण किया है।