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Kurukshetra News: विश्व मधुमेह दिवस आज उम्रदराज ही नहीं अब बच्चे भी मधुमेह की चपेट में, 13 साल तक के बच्चों को लग रही इंसुलिन
Fri, 14 Nov 2025 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 14 Nov 2025 01:03 AM IST
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कुरुक्षेत्र। मरीज के स्वास्थ्य की जांच करती काउंसलर अंजू बाला। संवाद
मुनीश मुंडे
कुरुक्षेत्र। मधुमेह एक ऐसी बीमारी है, जिस पर नियमित जांच, सही दवा और स्वस्थ जीवनशैली से पूरी तरह नियंत्रण किया जा सकता है। यह एक जीवनशैली पर आधारित शारीरिक अव्यवस्था है, जिसे पूर्ण रूप से मिटाया नहीं जा सकता। मधुमेह के प्रति लोग जागरूकता भी बरत रहे हैं और मधुमेह की पहचान होने पर लोग अपनी दिनचर्या में बदलाव कर स्वस्थ हो रहे हैं।
पिछले छह माह में जिलेभर में 18,881 लोगों में मधुमेह पाया गया। जांच के बाद ही लोगों में मधुमेह का खुलासा हो रहा है। पहले लोग जांच नहीं कराते थे जिसका परिणाम ये था कि तीसरी या चौथी स्टेज में जाकर पता चलता था कि वे मधुमेह की चपेट में हैं लेकिन तब तक शरीर काफी कमजोर हो जाता था।
विशेषज्ञ इसके लिए बिगड़ी दिनचर्या व भागदौड़ भरी जीवनशैली को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जिले में मधुमेह के मरीजों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। उम्रदराज ही नहीं 12 से 13 साल के बच्चे भी मधुमेह की चपेट में आ रहे हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में 55608 मरीजों का इलाज चल रहा है।
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यह जानना जरूरी
खाली पेट शुगर : 80 -130 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर
खाने के 2 घंटे बाद : 140-180 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर
एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) : 100 से कम
उच्च रक्तचाप : 130 / 80 से कम
13 वर्षीय जोया दिन में ले रही तीन बार इंसुलिन
ज्योतिसर वासी 13 वर्षीय जोया इन दिनों मधुमेह से पीड़ित है। जोया की शुगर 435 से 500 तक चल रही है। जोया को दिन में तीन बार इंसुलिन लगवानी पड़ती है।
शरीर रहे स्वस्थ, 2022 में छोड़ दिया अन्न
कौल वासी जगदीश ने बताया कि वह बचपन से ही स्वास्थ्य के प्रति गंभीर है। साल 2022 में उन्होंने अन्न को त्याग दिया था तभी से वह फलाहार पर ही है। जगदीश ने बताया कि इन दिनों खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावटखोरी का धंधा खूब पनप रहा है जो लोगों को स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक है। वहीं स्याना सैयदा गांव के 65 वर्षीय श्रवण कुमार ने तीन माह में दिनचर्या में बदलाव कर शुगर को कंट्रोल किया है। 200 से 235 तक शुगर चल रही थी। अब उनकी शुगर 108 तक पहुंच गई है।
महिलाएं आ रही ज्यादा चपेट में
एनसीडी कॉर्नर रूम के काउंसलर मलकीत सिंह, अंजू बाला, जसपाल ने बताया कि सबसे ज्यादा बीपी, शुगर की शिकार महिलाएं हो रही हैं। आंकड़ों में देखने में आया है कि महिलाओं में सबसे ज्यादा ये बीमारी पाई जा रही है। नर्सिंग ऑफिसर अंजू बाला ने बताया कि छह माह में 879 पुरुष व 1110 महिलाओं में बीपी, शुगर पाया गया।
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कुरुक्षेत्र। मधुमेह एक ऐसी बीमारी है, जिस पर नियमित जांच, सही दवा और स्वस्थ जीवनशैली से पूरी तरह नियंत्रण किया जा सकता है। यह एक जीवनशैली पर आधारित शारीरिक अव्यवस्था है, जिसे पूर्ण रूप से मिटाया नहीं जा सकता। मधुमेह के प्रति लोग जागरूकता भी बरत रहे हैं और मधुमेह की पहचान होने पर लोग अपनी दिनचर्या में बदलाव कर स्वस्थ हो रहे हैं।
पिछले छह माह में जिलेभर में 18,881 लोगों में मधुमेह पाया गया। जांच के बाद ही लोगों में मधुमेह का खुलासा हो रहा है। पहले लोग जांच नहीं कराते थे जिसका परिणाम ये था कि तीसरी या चौथी स्टेज में जाकर पता चलता था कि वे मधुमेह की चपेट में हैं लेकिन तब तक शरीर काफी कमजोर हो जाता था।
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विशेषज्ञ इसके लिए बिगड़ी दिनचर्या व भागदौड़ भरी जीवनशैली को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जिले में मधुमेह के मरीजों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। उम्रदराज ही नहीं 12 से 13 साल के बच्चे भी मधुमेह की चपेट में आ रहे हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में 55608 मरीजों का इलाज चल रहा है।
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यह जानना जरूरी
खाली पेट शुगर : 80 -130 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर
खाने के 2 घंटे बाद : 140-180 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर
एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) : 100 से कम
उच्च रक्तचाप : 130 / 80 से कम
13 वर्षीय जोया दिन में ले रही तीन बार इंसुलिन
ज्योतिसर वासी 13 वर्षीय जोया इन दिनों मधुमेह से पीड़ित है। जोया की शुगर 435 से 500 तक चल रही है। जोया को दिन में तीन बार इंसुलिन लगवानी पड़ती है।
शरीर रहे स्वस्थ, 2022 में छोड़ दिया अन्न
कौल वासी जगदीश ने बताया कि वह बचपन से ही स्वास्थ्य के प्रति गंभीर है। साल 2022 में उन्होंने अन्न को त्याग दिया था तभी से वह फलाहार पर ही है। जगदीश ने बताया कि इन दिनों खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावटखोरी का धंधा खूब पनप रहा है जो लोगों को स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक है। वहीं स्याना सैयदा गांव के 65 वर्षीय श्रवण कुमार ने तीन माह में दिनचर्या में बदलाव कर शुगर को कंट्रोल किया है। 200 से 235 तक शुगर चल रही थी। अब उनकी शुगर 108 तक पहुंच गई है।
महिलाएं आ रही ज्यादा चपेट में
एनसीडी कॉर्नर रूम के काउंसलर मलकीत सिंह, अंजू बाला, जसपाल ने बताया कि सबसे ज्यादा बीपी, शुगर की शिकार महिलाएं हो रही हैं। आंकड़ों में देखने में आया है कि महिलाओं में सबसे ज्यादा ये बीमारी पाई जा रही है। नर्सिंग ऑफिसर अंजू बाला ने बताया कि छह माह में 879 पुरुष व 1110 महिलाओं में बीपी, शुगर पाया गया।

कुरुक्षेत्र। मरीज के स्वास्थ्य की जांच करती काउंसलर अंजू बाला। संवाद

कुरुक्षेत्र। मरीज के स्वास्थ्य की जांच करती काउंसलर अंजू बाला। संवाद

कुरुक्षेत्र। मरीज के स्वास्थ्य की जांच करती काउंसलर अंजू बाला। संवाद