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Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Three lakh quintals of wheat cloud threat

तीन लाख क्विंटल गेहूं पर खतरे के बादल

Thu, 17 Apr 2014 11:44 PM IST
अमर उजाला, पानीपत
अमर उजाला, पानीपत Updated Thu, 17 Apr 2014 11:44 PM IST
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कुरुक्षेत्र। इंतजाम की कमी के कारण कुरुक्षेत्र की नई अनाज मंडी में रखा करीब साढ़े तीन लाख क्विंटल गेहूं पर बारिश का खतरा है। मौसम विभाग की अगले दो दिनों में तेज बारिश की संभावना से खुले में पड़े इस 42 करोड़ रुपये के गेहूं के भीगने का खतरा और भी बढ़ गया है।
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हालांकि इनमें से आधा गेहूं शेड के नीचे है, लेकिन पानी निकासी का इंतजाम नहीं होने की वजह से इनके भीगने से इंकार नहीं किया जा सकता।

सरकार ने निर्धारित समर्थन मूल्य 1400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से तीन लाख क्विंटल गेहूं की कीमत 42 करोड़ रुपये बैठती है। करोड़ों रुपये की फसल के प्रबंधन लापरवाही के कारण नहीं हो पाया।
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यदि प्रशासन इस पर सख्ती दिखाता तो फिर हालत कुछ ओर ही होते। इसके पीछे उठान कार्य धीमा चलना भी एक बड़ा कारण है। सरकारी एजेंसियों की ओर से  फसल खरीदी तो जा रही है, लेकिन उठान धीमा है।
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हैरत की बात तो यह है कि मार्केट सचिव दलेल सिंह की ओर से आढ़तियों को रजिस्टर नोटिस जारी कर तिरपाल का प्रबंध करने के लिए कहा था, लेकिन मंडी में कुछ ही कट्टे तिरपालों से ढके नजर आए, जबकि अधिकतर कट्टे खुले आसमान के नीचे थे।

जब इस बारे में मार्केट सचिव से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि सभी आढ़तियों को तिरपाल की व्यवस्था करने को कहा था। नोटिस का असर नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी आढ़तियों की है।

मौसम वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर डागर ने बताया कि अगले दो दिन में तेज बरसात हो सकती है। इसके अलावा तेज हवाएं चलने की पूरी संभावना है।

किसान इकबाल सिंह ने बताया कि बरसात से गेहूं बचाने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। उनकी छह महीने की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। किसान के अनुसार वे इतनी मेहनत करके उत्पादन करते हैं, लेकिन मंडी में इसकी संभाल के प्रति कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती।

पहले ही किसानों पर मौसम की मार पड़ चुकी है और अब जब दोबारा मौसम करवट ले रहा है ऐसी स्थिति में भी गेहूं को भीगने से बचाने के लिए इंतजाम नहीं है।

मार्केट सचिव कार्यालय की ओर से आढ़तियों के नाम तिरपाल का प्रबंध करने का नोटिस निकालकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली गई, लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस पर अमल नहीं किए जाने की सूरत में कार्रवाई करने की जहमत तक नहीं उठाई।

गांव हरियापुर निवासी सीताराम ने कहा कि किसानों पर मौसम की दोहरी मार पड़ रही है। पहले बरसात होने के कारण जहां काफी हद तक फसल उत्पादन पर प्रभाव पड़ा, वहीं अब जब फसल पक कर मंडी में है, तो दोबारा से मौसम बदलाव का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।

वीरवार सुबह आई बरसात के कारण कुछ हद तक गेहूं की बोरियां भीगी हैं और यदि तेज बरसात का क्रम शुरू हुआ तो फिर किसान कहीं का नहीं रहेगा।

मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकुंद लाल ने कहा कि मार्केट कमेटी की ओर से इस बारे नोटिस तो जारी हुआ है। निर्देशों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने करीब 150 तिरपाल की व्यवस्था की है।


जब अन्य आढ़तियों के पास पर्याप्त मात्रा में तिरपाल न होने की बात पर अध्यक्ष ने कहा कि इसके बारे में सभी नोटिस जारी हुआ था और आढ़तियों को गेहूं बरसात में न भीगे, इसके लिए तिरपाल की व्यवस्था करनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हर आढ़ती के पास कुछ तिरपालें तो जरूर है। बरसात में फसल भीगने की बात पर मुकुंद लाल ने कहा कि बरसात ज्यादा नहीं हुई है। जो थोड़ी बहुत गेहूं भीगी है, उसे धूप में सुखाया जा सकता है।a
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