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Kurukshetra News: आयुष विश्वविद्यालय में तीन पीढ़ियों के शिक्षक दे रहे शिक्षा
Sat, 06 Sep 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 06 Sep 2025 01:08 AM IST
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कुरुक्षेत्र। आयुष विवि में ये तीन पीढ़ियों के शिक्षक दे रहे शिक्षा। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में ऐसी मिसाल देखने को मिली है, जो गुरु-शिष्य परंपरा की सच्ची झलक पेश करती है। यहां शल्यतंत्र विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र सिंह चौधरी और रचना शरीर के विभागाध्यक्ष प्रो. सतीश वत्स ने न केवल विद्यार्थियों को आयुर्वेद शिक्षा दी, बल्कि उनके शिष्य और शिष्यों की अगली पीढ़ी भी आज शिक्षक बनकर उसी विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रही है।
साल 2000 में बतौर सहायक प्रोफेसर नियुक्त हुए प्रो. चौधरी ने अपने कॅरिअर में कई छात्रों को शिक्षा दी। उनके पढ़ाए विद्यार्थियों में प्रो. रविंद्र अरोड़ा, प्रो. कृष्ण कुमार, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. सुनीति तंवर और प्रो. रवि राज शामिल हैं। दूसरी पीढ़ी में एसोसिएट प्रो. अनामिका और एसोसिएट प्रो. सुधीर मलिक उनसे शिक्षा लेकर पढ़ा रहे हैं। वहीं तीसरी पीढ़ी में सहायक प्रो. डॉ. पुनीता शर्मा और डॉ. रूचिका भोला इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि शिक्षक की पहचान उसके ज्ञान और चरित्र से होती है। प्रो. चौधरी और प्रो. वत्स का योगदान इस बात का उदाहरण हैं। किसी भी शिक्षक के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यही होती है कि उसके शिष्य आगे बढ़कर समाज और शिक्षा जगत की सेवा करें। यह गुरु-शिष्य परंपरा केवल शिक्षण नहीं, बल्कि शिक्षा का प्रकाश पीढ़ी दर पीढ़ी फैलाने वाली प्रेरणा की अद्भुत मिसाल है।
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कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में ऐसी मिसाल देखने को मिली है, जो गुरु-शिष्य परंपरा की सच्ची झलक पेश करती है। यहां शल्यतंत्र विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र सिंह चौधरी और रचना शरीर के विभागाध्यक्ष प्रो. सतीश वत्स ने न केवल विद्यार्थियों को आयुर्वेद शिक्षा दी, बल्कि उनके शिष्य और शिष्यों की अगली पीढ़ी भी आज शिक्षक बनकर उसी विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रही है।
साल 2000 में बतौर सहायक प्रोफेसर नियुक्त हुए प्रो. चौधरी ने अपने कॅरिअर में कई छात्रों को शिक्षा दी। उनके पढ़ाए विद्यार्थियों में प्रो. रविंद्र अरोड़ा, प्रो. कृष्ण कुमार, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. सुनीति तंवर और प्रो. रवि राज शामिल हैं। दूसरी पीढ़ी में एसोसिएट प्रो. अनामिका और एसोसिएट प्रो. सुधीर मलिक उनसे शिक्षा लेकर पढ़ा रहे हैं। वहीं तीसरी पीढ़ी में सहायक प्रो. डॉ. पुनीता शर्मा और डॉ. रूचिका भोला इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि शिक्षक की पहचान उसके ज्ञान और चरित्र से होती है। प्रो. चौधरी और प्रो. वत्स का योगदान इस बात का उदाहरण हैं। किसी भी शिक्षक के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यही होती है कि उसके शिष्य आगे बढ़कर समाज और शिक्षा जगत की सेवा करें। यह गुरु-शिष्य परंपरा केवल शिक्षण नहीं, बल्कि शिक्षा का प्रकाश पीढ़ी दर पीढ़ी फैलाने वाली प्रेरणा की अद्भुत मिसाल है।
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