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जिला में इस बार 15 हजार हेक्टेयर घटेगा धान का रकबा

Sat, 27 May 2017 11:57 PM IST
ब्यूरो/सेवा सिंह,अमर उजाला
ब्यूरो/सेवा सिंह,अमर उजाला Updated Sat, 27 May 2017 11:57 PM IST
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This year, 15,000 hectares of land will be reduced to paddy fields, Kurukshetra
उपनिदेशक डॉ कर्मचंद - फोटो : अमर उजाला

गिरते भू जल स्तर के चलते डार्क जोन में पहुंच चुके व धान का कटोरा कहे जाने वाले कुुरुक्षेत्र में इस बार धान की रोपाई कम की जाएगी। पिछले वर्षों की तुलना में करीब 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल कम रहेगी तो वहीं इस क्षेत्र में मोटे अनाज की श्रेणी में शामिल किए जाने वाले मक्का व गन्ने की फसल पर अधिक जोर दिया जाएगा।

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भले ही पिछले करीब 10 दिनों से किसान धान की पौध की बुआई में जुटे है, लेकिन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने इस सीजन में रोपी व बुआई की जाने वाली फसलों के लक्ष्य तय लिए है, जिसके चलते जिला भर में एक लाख 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई होगी जबकि अब तक कई वर्षों से करीब एक लाख 19 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की रोपाई की जाती रही है। फसल विविधिकरण अपनाने के साथ-साथ विभाग ने गिरते भू जल स्तर को बचाने के लिए यह कदम उठाया है, जिसके लिए न केवल किसानों को जागरूक किया जा रहा है बल्कि इसके लिए विशेष निगरानी भी शुरू कर दी गई है। विभाग के इन प्रयासों के चलते ही जहां मक्का का रकबा 10 फीसदी बढ़ चुका है तो वहीं गन्ने का रकबा करीब 12 फीसदी तक बढ़ा दिया गया है।
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बासमती किस्म के धान को ही तव्वजो
जिला के किसान इस बार बासमती धान की किस्मों को ही तव्वजो दे रहे हैं। जिनमें बासमती व इसी श्रेणी में आने वाली 1121 एवं 1509 किस्म की धान शामिल है। सबसे अधिक 1509 किस्म के धान की रोपाई की उम्मीद जताई जा रही है जबकि मोटे धान में शामिल की जाने वाली पीआर व इस श्रेणी की धान की फसल करीब 30 फीसदी रकबे में ही सिमटने की संभावना है। उमरी के किसान बलबीर सिंह, धर्मपाल व पलवल के किसान बलजीत सिंह की मानें तो बासमती श्रेणी के धान में रिस्क अधिक होता है, लेकिन इनका भाव अधिक मिलने के चलते किसान इसे प्राथमिकता दे रहे है।
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15 जून से धान रोपाई होगी शुरू
धान की पौध की बुआई जहां 15 मई से शुरू कर दी गई है तो वहीं धान की रोपाई 15 जून से ही शुरू होगी। इससे पहले रोपाई पर प्रशासन ने प्रति बंद लगाया हुआ है। प्रशासन ने आदेश जारी किए है कि इससे पहले धान की रोपाई करने पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


पानी बचाने के किए जा रहे प्रयास : डॉ कर्मचंद
कृषि एंव किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ कर्मचंद का कहना है कि भू जल स्तर की स्थिति जिला भर में बेहद चिंतनीय बनी हुई है। विशेष तौर पर पानी बचाने व फसल चक्र अपनाने के चलते इस बार धान रोपाई का लक्ष्य कम रखा गया है। ऐसे में कृषि भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ेगी। किसानों को गोष्ठियां कर इसके लिए जागरूक किया जा रहा है।

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