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Kurukshetra News: चार लेबर कोड के खिलाफ होगा प्रदर्शन
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कुरुक्षेत्र। मजदूर-कर्मचारी विरोधी चारों लेबर कोड थोपने, लोकतंत्र पर हो रहे हमलों के खिलाफ और सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने व स्थायी रोजगार की मांग के लिए 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल होगी। इसे सफल बनाने के लिए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और सीटू के संयुक्त जत्थे तैयारियों में लगे हैं। इन जत्थों ने जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों में पहुंचकर जनसभाओं को संबोधित किया।
जत्थों में शामिल राज्य प्रेस सचिव गुलशन भारद्वाज, उपमहासचिव संदीप सांगवान, सचिव शिवचरण,उपप्रधान कश्मीर सिंह,सदस्य राजिंदर राणा, जिला प्रधान रामनाथ भाटी, कैशियर बिट्टू रंगा,ब्लॉक प्रधान पिहोवा बलवान मोर और ब्लॉक प्रधान थानेसर विशाल ने कहा कि देश और प्रदेश आज एक गहरे, सुनियोजित और बहुआयामी हमले के दौर से गुजर रहे हैं। पूंजीपतियों के हित में निजीकरण व ठेकाकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्रीकरण और सांप्रदायिकता को योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है तथा सरकारी विभागों को जान-बूझकर सिकोड़ा जा रहा है ताकि सार्वजनिक सेवाओं को बाजार के हवाले किया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में दो लाख से अधिक पद वर्षों से खाली पड़े हैं, जबकि पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी की मार झेल रहा है। हरियाणा कौशल रोजगार निगम, अग्निवीर और अन्य अस्थायी व्यवस्थाएं नियमित रोजगार की जगह कम वेतन, असुरक्षित और अपमानजनक काम को बढ़ावा दे रही हैं। वर्षों से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को न वेतन सुरक्षा है, न सामाजिक सुरक्षा और न ही भविष्य की कोई गारंटी। स्थायी नियुक्तियों की जगह अस्थायी, ठेका और आउटसोर्स व्यवस्था को सामान्य बनाया जा रहा है। नियमित भर्तियां बंद हैं और खाली पदों के बावजूद काम का बोझ और बेरोजगारी दोनों लगातार बढ़ाए जा रहे हैं।
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जत्थों में शामिल राज्य प्रेस सचिव गुलशन भारद्वाज, उपमहासचिव संदीप सांगवान, सचिव शिवचरण,उपप्रधान कश्मीर सिंह,सदस्य राजिंदर राणा, जिला प्रधान रामनाथ भाटी, कैशियर बिट्टू रंगा,ब्लॉक प्रधान पिहोवा बलवान मोर और ब्लॉक प्रधान थानेसर विशाल ने कहा कि देश और प्रदेश आज एक गहरे, सुनियोजित और बहुआयामी हमले के दौर से गुजर रहे हैं। पूंजीपतियों के हित में निजीकरण व ठेकाकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्रीकरण और सांप्रदायिकता को योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है तथा सरकारी विभागों को जान-बूझकर सिकोड़ा जा रहा है ताकि सार्वजनिक सेवाओं को बाजार के हवाले किया जा सके।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश में दो लाख से अधिक पद वर्षों से खाली पड़े हैं, जबकि पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी की मार झेल रहा है। हरियाणा कौशल रोजगार निगम, अग्निवीर और अन्य अस्थायी व्यवस्थाएं नियमित रोजगार की जगह कम वेतन, असुरक्षित और अपमानजनक काम को बढ़ावा दे रही हैं। वर्षों से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को न वेतन सुरक्षा है, न सामाजिक सुरक्षा और न ही भविष्य की कोई गारंटी। स्थायी नियुक्तियों की जगह अस्थायी, ठेका और आउटसोर्स व्यवस्था को सामान्य बनाया जा रहा है। नियमित भर्तियां बंद हैं और खाली पदों के बावजूद काम का बोझ और बेरोजगारी दोनों लगातार बढ़ाए जा रहे हैं।
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