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Kurukshetra News: सहभागी देश तंजानियां, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान की संस्कृति व शिल्प कला का ब्रह्मसरोवर तट पर होगा संगम
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में अनसुईया घाट पर कच्ची घोडी नृत्य की प्रस्तुति देते र
कुरुक्षेत्र। भले ही वर्ष 2017 से गीता महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है लेकिन इस बार पहला मौका होगा जब यह महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में दिखाई देगा। महोत्सव के सहभागी देश तंजानियां के अलावा उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान की संस्कृति व शिल्पकला से भी पर्यटक रूबरू होंगे। ब्रह्मसरोवर के पुरुषोत्तमपुरा बाग में ही मुख्य कार्यक्रमों के मंच के समीप इन देशों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जिसके लिए तैयारी की जा रही है। पांच दिसंबर से पर्यटक इन देशों की संस्कृति व शिल्पकला को जान सकेंगे।
यही नहीं सहभागी देश तंजानियां के कलाकार मुख्य मंच पर अपनी लोक कला के रंग भी बिखरेंगे तो वहां के पर्यटन मंत्री भी न केवल महोत्सव में शरीक होंगे बल्कि इन कलाकारों का हौंसला बढ़ाएंगे। इसके साथ ही विभिन्न देशों के राजदूत भी महोत्सव का हिस्सा बनेंगे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किस-किस देश के राजदूत पहुंचेंगे लेकिन 20 देशों के राजदूतों को आमंत्रित किया गया है, जिनकी ओर से सहमति की इंतजार है।
शिल्प और लोक कला संरक्षण केंद्र के रूप में धर्मनगरी की बनी पहचान
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते ही धर्मनगरी को शिल्प और लोक कला केंद्र के रूप में भी एक बड़ी पहचान मिल रही है। गीता की इस धरती पर देश के लगभग सभी राज्यों की लोक कला और संस्कृति समा गई है। इस लोककला और संस्कृति को देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे है। विभिन्न राज्यों के लोक कलाकार अपने-अपने प्रदेश की संस्कृति की छटा बिखेर रहे है।
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धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर और आसपास के क्षेत्र को देखकर ऐसा लग रहा है मानों भारतवर्ष की संस्कृति व शिल्पकला एक लघु भारत के रूप में ब्रह्मसरोवर पर उमड़ आई हो। गीता महोत्सव में अनेक राज्यों से आए कलाकार अपनी हस्तकला के माध्यम से अपनी कला का हुनर दिखा रहे हैं। शिल्पकारों की कला गीता महोत्सव का आकर्षण का केंद्र बिंदु बनी हुई हैं। मेले को लगे हुए अभी छठा दिन ही हुआ है। लगातार दर्शकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पर्यटकों को ब्रह्मसरोवर के घाटों पर उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, मिजोरम, मेघालय, असम, त्रिपुरा, लद्दाख, वेस्ट बंगाल आदि राज्यों के लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी जा रही है।
मिल रहा विभिन्न राज्यों के व्यंजनों का स्वाद
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर तट पर संस्कृति व शिल्पकला को जानने के साथ ही पर्यटक विभिन्न प्रदेशों के तरह-तरह के लजीज व्यंजनों का स्वाद भी चख रहे हैं। इन व्यंजनों में राजस्थान की कचोरी, पंजाब की लस्सी, बिहार का लिटी चोखा, कश्मीर का कहवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों का स्वाद खुश होकर ले रहे हैं। इसके साथ-साथ पर्यटक विभिन्न प्रदेशों की शिल्पकला से सजे स्टॉलों पर भी जमकर खरीदारी कर रहे है।
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यही नहीं सहभागी देश तंजानियां के कलाकार मुख्य मंच पर अपनी लोक कला के रंग भी बिखरेंगे तो वहां के पर्यटन मंत्री भी न केवल महोत्सव में शरीक होंगे बल्कि इन कलाकारों का हौंसला बढ़ाएंगे। इसके साथ ही विभिन्न देशों के राजदूत भी महोत्सव का हिस्सा बनेंगे। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किस-किस देश के राजदूत पहुंचेंगे लेकिन 20 देशों के राजदूतों को आमंत्रित किया गया है, जिनकी ओर से सहमति की इंतजार है।
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शिल्प और लोक कला संरक्षण केंद्र के रूप में धर्मनगरी की बनी पहचान
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते ही धर्मनगरी को शिल्प और लोक कला केंद्र के रूप में भी एक बड़ी पहचान मिल रही है। गीता की इस धरती पर देश के लगभग सभी राज्यों की लोक कला और संस्कृति समा गई है। इस लोककला और संस्कृति को देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे है। विभिन्न राज्यों के लोक कलाकार अपने-अपने प्रदेश की संस्कृति की छटा बिखेर रहे है।
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धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर और आसपास के क्षेत्र को देखकर ऐसा लग रहा है मानों भारतवर्ष की संस्कृति व शिल्पकला एक लघु भारत के रूप में ब्रह्मसरोवर पर उमड़ आई हो। गीता महोत्सव में अनेक राज्यों से आए कलाकार अपनी हस्तकला के माध्यम से अपनी कला का हुनर दिखा रहे हैं। शिल्पकारों की कला गीता महोत्सव का आकर्षण का केंद्र बिंदु बनी हुई हैं। मेले को लगे हुए अभी छठा दिन ही हुआ है। लगातार दर्शकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पर्यटकों को ब्रह्मसरोवर के घाटों पर उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, मिजोरम, मेघालय, असम, त्रिपुरा, लद्दाख, वेस्ट बंगाल आदि राज्यों के लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दी जा रही है।
मिल रहा विभिन्न राज्यों के व्यंजनों का स्वाद
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर तट पर संस्कृति व शिल्पकला को जानने के साथ ही पर्यटक विभिन्न प्रदेशों के तरह-तरह के लजीज व्यंजनों का स्वाद भी चख रहे हैं। इन व्यंजनों में राजस्थान की कचोरी, पंजाब की लस्सी, बिहार का लिटी चोखा, कश्मीर का कहवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों का स्वाद खुश होकर ले रहे हैं। इसके साथ-साथ पर्यटक विभिन्न प्रदेशों की शिल्पकला से सजे स्टॉलों पर भी जमकर खरीदारी कर रहे है।

कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में अनसुईया घाट पर कच्ची घोडी नृत्य की प्रस्तुति देते र