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बुजुर्गों के सम्मान से बढ़कर नहीं कोई पूजा : महंत राजेंद्र पुरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Sep 2025 02:01 AM IST
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There is no greater worship than respecting elders: Mahant Rajendra Puri
कुरुक्षेत्र। जग ज्योति दरबार के महंत राजेंद्र पुरी ने श्राद्ध प्रारंभ होने के बारे में बताया कि सनातन धर्म में माता-पिता की सेवा और श्राद्ध को बहुत महत्व दिया जाता है। माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना जाता है। उन्होंने कहा कि श्राद्ध तर्पण से पूर्व जीते जी अपने बुजुर्गों व माता-पिता की सेवा को ही महत्व दिया गया है।
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महंत ने कहा कि श्राद्ध पक्ष प्रारंभ होने से पूर्व श्री गणेश उत्सव का समापन हुआ है। भगवान श्री गणेश की पूजा में भी माता-पिता की सेवा का संदेश दिया गया। भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों में माता-पिता की सेवा एवं बुजुर्गों के सम्मान से बढ़ कर कोई पूजा नहीं है। श्राद्ध करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद बना रहता है। श्राद्ध से दीर्घायु, पुत्र-पौत्रादि, यश, स्वर्ग, पुष्टि, बल, लक्ष्मी, सुख-साधन, और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि अपने बुजुर्गों के प्रति, पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा का भाव ही श्राद्ध कहलाता है। भाद्रपद की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन माह के कृष्णपक्ष की अमावस्या तक कुल 16 दिनों की अवधि पितृपक्ष कहलाती है।
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