दलिताों की शादी की घुड़चढ़ी रुकवाई
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दुल्हे के पिता सुरेश कुमार वासी गांव भूस्तला ने थाना झांसा में दी शिकायत में बताया कि शनिवार को उसके पुत्र संदीप का मंडा था तथा शाम के वक्त घुड़चढ़ी की रस्म होनी थी। घुड़चढ़ी के समय उसके लड़का घोड़ा बग्गी पर सवार होकर मंदिरों में माथा टेकने की रस्म अदा कर रहा था। उसी समय राजपूत समुदाय के लोगों ने मंदिर में जाकर घुड़चढ़ी रोकने का फरमान जारी कर दिया। उसके बाद मेंबर पंचायत ब्लॉक समिति तरसेम कुमार की अगुवाई में जस्सी, विक्रम, जसबीर, सक्कू, सोनू, प्रमोद, राजपाल अदि दर्जनों लोग तलवारे लेकर उसके लड़के को बग्गी से उतार कर मंदिरों में जाने से रोकने लगे तथा उन्हें जातिसूचक कहे। उन्हें धमकी दी गई कि अगर उन्होंने फिर भी घुड़चढ़ी की या मंदिर में जाने की कोशिश की तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा।
मामले को आपसी सहमति से निपटाया जाएगा : सरपंच
गांव के सरपंच राजेंद्र सिंह राणा ने कहा कि शनिवार देर रात्रि कुछ लड़कों ने वाल्मीकि समुदाय के विवाह समारोह में घुड़चढ़ी में बाधा डाली थी, जो गलत है। उन्हें समझा बुझाकर मामले को रात्रि में शांत कर दिया गया था। हम सभी को विवाह की सभी रस्में करने का समान अधिकार है। इस समय गांव में आपसी भाईचारा कायम है यह मामला आपस में बैठकर निपटा दिया जाएगा।
मंदिर में जाने से किसी को नहीं रोका जा सकता : डीसी
जिला उपायुक्त राजनरायण कौशिक ने कहा कि किसी भी समुदाय के व्यक्ति को मंदिरों में जाने और घोड़ी पर चढ़ने से नहीं रोका जा सकता, इसके लिए प्रशासन की ओर से आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने मौके पर जाकर वाल्मीकि समुदाय के लोगों से बात कर उन्हें पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया है। उन्होंने ग्रामीणों से गांव में शांति बनाए रखने की अपील भी की।
आरोपियों पर होगी सख्त कार्रवाई : एसपी
जिला पुलिस अधीक्षक सिमरदीप सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने वाल्मीकि समुदाय के लोगों को घुड़चढ़ी की रस्म के दौरान मंदिर में जाने से रोका तो उसी समय थाना झांसा के प्रबंधक को मौके पर भेजकर उनकी सभी रस्मे पूरी करवा दी गई। जिन लोगों ने वाल्मीकि समुदाय को बलपूर्वक मंदिरों में जाने से रोका तथा उनको जातिसूचक शब्द कहे हैं उनके खिलाफ मामला दर्ज कर दिया गया है। उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस मामले की जांच थाना प्रबंधक झांसा निर्मल सिंह करेंगे। उन्होंने गांव में जाकर स्थिति का जायजा लिया है। गांव में अब स्थिति शांति पूर्ण है।
क्या कहती हैं समुदाय की महिलाएं
दुल्हे की मां कृष्णा, दुल्हे की भाभी कुलविंद्र कौर तथा प्रीतो देवी आदि ने बताया कि इससे पहले 2007, 2012 में भी राजपूत समुदाय के लोगों ने उनके समुदाय के लोगों को धमकी देकर घुड़चढ़ी की रस्म करने से मना किया था और कहा कि घोड़ी पर चढ़ने का हक केवल उनके समुदाय के लोगों को है न कि वाल्मीकि समाज को। उन्होंने कहा कि राजपूत समुदाय बलपूर्वक उनके साथ अन्याय कर रहा है।
इनेलो प्रदेशाध्यक्ष ने की घटना की निंदा
इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि आज के युग में इस तरह की घटनाएं हो रही है जो बहुत दुख की बात है। घुड़चडी हर समाज में की जा सकती है जिसका अधिकार हमारा संविधान भी देता है।
हर समाज को एक-दूसरे का देना होगा साथ
कांग्रेस जिला कार्यकारी अध्यक्ष विशाल सिंगला ने कहा कि यदि एक समाज को विकास करना है तो दूसरे समाज को उसका साथ देना होगा। आज हमारे देश आजाद है। किसी धर्म, जाति और समाज के लोग आने रीति रिवाजों से शादी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश का सविंधान डॉ. भीम राव अंबेडकर ने लिखा था वो भी तो इसी समाज के थे। इस समाज के लोगों के साथ हुई घटना बड़ी दुखदाई है।