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Kurukshetra News: कैबिनेट मंत्री के गांव के स्कूल में पर्याप्त कमरे नहीं, बरामदे में लगतीं हैं कक्षाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी के गांधी नगर स्थित मूल निवास से कुछ कदम दूरी पर स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय गांधीनगर में कमरों के अभाव में बच्चों को दो बरामदे में कक्षाएं लगानीं पड़ रहीं हैं। ये स्कूल दो शिफ्टों में संचालित किया जा रहा है। पहली पारी में कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों की पढ़ाई करवाई जाती है। जिसके लिए स्कूल सुबह 6:50 बजे लगाया जाता है तो दोपहर 12:30 बजे छुट्टी कर दी जाती है। इसके बाद प्राथमिक स्कूल दोपहर 12:30 बजे लगाया जाता है तो शाम 6:15 बजे तक लगाया जाता है। इसलिए दूसरी पारी के बच्चे पहली पारी की छुट्टी का गेट पर इंतजार करने को मजबूर रहते हैं।स्कूल में न तो खेल ग्राउंड है, न ही पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे। कभी बरामदे में तो कभी एक ही कक्ष में दो-दो कक्षाएं लगती है। स्कूल को सांस्कृतिक माॅडल बनाए जाने की भी कोसों दूर तक उम्मीद नहीं है, जिसका भी यहां हर शिक्षक को मलाल है। स्कूल शिक्षकों के मुताबिक 24 मार्च 2014 को कीर्ति नगर के प्राथमिक स्कूल को इस स्कूल में मर्ज कर दिया गया था। वर्ष 1990 से पहले यह प्राथमिक स्कूल बनाया गया था। उस समय दूसरे स्कूल के 224 बच्चे भी आए तो इस पर भार बढ़ा। यहां पहले ही 294 बच्चे थे। इसके बाद वर्ष 2008 में इसे अपग्रेड किया गया तो उसी समय से ही यहां दोहरी पारी में पढ़ाई कराई जाने लगी।
जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक का कहना है सभी स्कूलों से समस्याओं को लेकर रिपोर्ट व एस्टीमेट मांगे गए हैं ताकि जल्द सुविधा मुहैया हो सके।
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कुरुक्षेत्र। कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी के गांधी नगर स्थित मूल निवास से कुछ कदम दूरी पर स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय गांधीनगर में कमरों के अभाव में बच्चों को दो बरामदे में कक्षाएं लगानीं पड़ रहीं हैं। ये स्कूल दो शिफ्टों में संचालित किया जा रहा है। पहली पारी में कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों की पढ़ाई करवाई जाती है। जिसके लिए स्कूल सुबह 6:50 बजे लगाया जाता है तो दोपहर 12:30 बजे छुट्टी कर दी जाती है। इसके बाद प्राथमिक स्कूल दोपहर 12:30 बजे लगाया जाता है तो शाम 6:15 बजे तक लगाया जाता है। इसलिए दूसरी पारी के बच्चे पहली पारी की छुट्टी का गेट पर इंतजार करने को मजबूर रहते हैं।स्कूल में न तो खेल ग्राउंड है, न ही पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे। कभी बरामदे में तो कभी एक ही कक्ष में दो-दो कक्षाएं लगती है। स्कूल को सांस्कृतिक माॅडल बनाए जाने की भी कोसों दूर तक उम्मीद नहीं है, जिसका भी यहां हर शिक्षक को मलाल है। स्कूल शिक्षकों के मुताबिक 24 मार्च 2014 को कीर्ति नगर के प्राथमिक स्कूल को इस स्कूल में मर्ज कर दिया गया था। वर्ष 1990 से पहले यह प्राथमिक स्कूल बनाया गया था। उस समय दूसरे स्कूल के 224 बच्चे भी आए तो इस पर भार बढ़ा। यहां पहले ही 294 बच्चे थे। इसके बाद वर्ष 2008 में इसे अपग्रेड किया गया तो उसी समय से ही यहां दोहरी पारी में पढ़ाई कराई जाने लगी।
जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक का कहना है सभी स्कूलों से समस्याओं को लेकर रिपोर्ट व एस्टीमेट मांगे गए हैं ताकि जल्द सुविधा मुहैया हो सके।