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वर्दी की चाह में दौड़ा 307 का अंडर ट्रायल बंदी, दो किमी दौड़ भी नहीं कर पाया पूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Thu, 23 Jun 2016 12:02 AM IST
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पुलिस भर्ती में दौड़ लगाता कैदी।
- फोटो : Amar Ujala
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वर्दी पहनने की चाह में बुधवार को एक विचाराधीन बंदी ने दौड़ लगाई। हालांकि यह बंदी दो किमी तक भी दौड़ पूरी नहीं कर पाया और गिर गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दौड़े यह बंदी जान से मारने का प्रयास सहित मारपीट करने के मामले में आरोपी है। अंडर ट्रायल होने के कारण भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुआ यह बंदी 2004 में पुलिस भर्ती के लिए इंटरव्यू तक दे चुका था, लेकिन भर्ती निरस्त होने से दोबारा प्रक्रिया में शामिल हुआ।
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एचएसएससी की ओर से आयोजित पुलिस भर्ती प्रक्रिया में करनाल जेल में बंद धारा 307 के आरोपी निखिल ने भी फर्राटा भरा। निखिल मूल रूप से पानीपत का रहने वाला है। पुलिस के पहरे में जैसे ही निखिल ने दौड़ना शुरू किया सबकी निगाहें उसी पर थी। लेकिन पांच किलोमीटर का दायरा आधे से भी कम करीब दो किलोमीटर तक ही दौड़ पूरा कर पाया। इस दौरान उसकी सांसें फूलने लगी और वह नीचे गिर गया। पुलिसकर्मियों ने उसे तुरंत उठाया और उसे बाहर ले गए।
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अकेले दौड़ाया गया बंदी को
प्रदेश भर से बुलाए गए हजारों अभ्यर्थियों की दौड़ प्रक्रिया खत्म होने के बाद विशेष सुरक्षा घेरे में बंदी को दौड़ा गया। सुबह करीब 10 बजे निखिल की दौड़ कराई गई। पूरा ट्रैक खाली था उसके आगे पीछे पुलिसकर्मियों की दो मोटरसाइकिल चल रही थी। खास बात यह है कि निखिल जिलास्तर पर कई मैडल जीतने वाला धावक रहा है। उसने बताया कि वह 2004 में हुई भर्ती प्रक्रिया में भी शामिल हुआ था और इंटरव्यू तक दे दिया था, उसका चयन भी हो गया था, लेकिन भर्ती पर रोक लगने के बाद इसे रद्द कर दिया गया था।
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इसलिए पूरी नहीं कर पाया दौड़
वहां मौजूद भर्ती अधिकारियों का कहना था कि एक बार चयनित हो चुका युवक दूसरी बात मात खा गया बड़ी बात है। इसका कारण अभी प्रेक्टिस नहीं होना है। विशेषज्ञों की माने तो निखिल ने दौड़ शुरू होते ही तेज भागना शुरू कर दिया था। जिससे उसकी सांसें जल्दी फूल गई। जबकि लंबी दौड़ पूरी करने के लिए पहले धीरे धीरे भागना जरूरी होता है। ताकि स्टेमिना बना रहे।