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सन्निहित तीर्थ स्थित कमल कुंज में महर्षि दधीचि के त्याग की कहानी बयां करेंगी प्रतिमाएं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 02:39 AM IST
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The statues will tell the story of Maharishi Dadhichi's sacrifice in the Kamal Kunj located in the embodied shrine.
सन्निहित तीर्थ स्थित कमल कुंज में करीब एक करोड़ की लागत से महर्षि दधीचि, इंद्र, बज्र और सूर्यदेव की जीवंत प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इन प्रतिमाओं में इंद्र देव हाथ जोड़कर खड़े नजर आएंगे, वहीं महर्षि दधीचि कमल पर विराजमान होंगे। प्रतिमाओं की पृष्ठभूमि में 10 फुट व्यास का सूर्य भी नजर आएगा। कमल कुंज में स्थापित होने के बाद ये प्रतिमाएं जहां तीर्थ की शोभा बढ़ाएंगी वहीं महर्षि दधीचि के त्याग का पूरा प्रसंग बयां करेंगी।
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प्रतिमा के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की ओर से टेंडर इनवाइट किए जा चुके हैं। कई फर्मों ने टेंडर भरे भी हैं। केडीबी के पास अपना टेक्निकल विंग न होने के कारण फर्म के रेट बारे बीएंडआर से परामर्श कर रिपोर्ट मांगी गई है। इस रिपोर्ट के आते ही सब फाइनल हो जाएगा। महर्षि दधीचि ने देवताओं का अमोघ अस्त्र बनाने के लिए धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के सन्निहित तीर्थ पर अपनी अस्थियां दान कर दी थीं। इन्हीं से इंद्र के बज्र का निर्माण हुआ, जिससे वृत्रासुर राक्षस का संहार किया गया। महर्षि दधीचि के इस त्याग की गौरव गाथा को सन्निहित सरोवर पर प्रदर्शित किया जाएगा।
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परमवीर चक्र पर अंकित है महर्षि की हड्डियों से बना बज्र
भारत रत्न के बाद देश के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र पर अंकित बज्र के पीछे की कहानी का सीधा संबंध कुरुक्षेत्र और यहां के महत्वपूर्ण तीर्थ सन्निहित सरोवर से है। सात दशक पहले इस पदक को स्विट्जरलैंड में जन्मी ईवावोन लिंडा मेडे डे मारोस ने डिजाइन किया था। विदेशी मूल की महिला ने भारत के इस सर्वोच्च वीरता पदक पर बज्र को अंकित किया।
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इस प्रकार की होगी प्रतिमा
कमल पर विराजमान दधीचि की 6 फुट ऊंची प्रतिमा, पृष्ठभूमि में 10 फुट व्यास का सूर्य, हाथ जोड़कर खड़े भगवान इंद्र की 9 फुट ऊंची प्रतिमा और 4 फुट ऊंचे बज्र की स्थापना की जाएगी। प्रतिमा के बेस से लेकर सूर्य तक की कुल ऊंचाई 15 फुट छह इंच होगी।

प्रतिमाएं बढ़ाएंगी सरोवर का आकर्षण: सीईओ
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महर्षि दधीचि की प्रतिमा के साथ, भगवान इंद्र और बज्र की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। ये उस कहानी को चित्रित करने का एक प्रयास है जहां दधीचि ने अपने जीवन का बलिदान दिया और अपनी हड्डियों को बज्र के लिए दे दिया। प्रतिमाएं सरोवर के आकर्षण को और बढ़ा देंगी। सन्निहित सरोवर प्रमुख ‘तीर्थों’ में से एक है।
अनुभव मेहता, सीईओ, केडीबी
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