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पवित्र ग्रंथ गीता में मानव की हर समस्या का हल निहित: प्रो. सचदेवा
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कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर की आरती करते केयू वीसी प्रो. सोमनाथ सचदेवा व अन्य।
- फोटो : Kurukshetra
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के तीसरे दिन सांध्यकालीन आरती में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा बतौर मुख्य यज्ञमान पहुंचे। कुलपति सचदेवा ने ब्रह्मसरोवर की पूजा अर्चना व महाआरती की।
इससे पहले उन्होंने दीप शिक्षा प्रज्ज्वलित करके महाआरती का शुभारंभ किया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए कुलपति प्रो. सचदेवा ने कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पवित्र स्थली ज्योतिसर से पूरे विश्व को गीता का ज्ञान मिला। गीता में दिए ज्ञान में मानव की हर समस्या का समाधान निहित है। गीता के श्लोकों का स्मरण करने से जहां मन को शांति मिलती है वहीं हमारे आध्यात्मिक ज्ञान में भी वृद्धि होती है।
कुरुक्षेत्र स्थित ब्रह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर के जल के आचमन मात्र से ही मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है। सूर्य ग्रहण, सोमवती अमावस्या, चौदस सहित अन्य धार्मिक अवसरों पर इन सरोवरों के पवित्र जल में स्नान करने से हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की पावन धरा से पूरे विश्व को गीता के उपदेश दिए। इस पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश आज भी पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है। इसलिए कुरुक्षेत्र का महत्व पूरे विश्व में है। इस सांध्यकालीन महाआरती को देखने पर सुखद अहसास होता है।
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इस कार्यक्रम के अंत में केडीबी की तरफ से सभी मेहमानों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. संजीव वर्मा, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ. देबरॉय, केडीबी मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, डॉ. बलदेव सेतिया, डॉ. पंकज चांदना, डॉ. आरके देसवाल, डॉ. भगत सिंह, डॉ. सुचि स्मिता मौजूद रहे। इस महाआरती का गुणगान पंडित बलराम गौतम, पंडित सोमनाथ शर्मा, गोपाल कृष्ण गौतम, अनिल व रुद्र ने किया।
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इससे पहले उन्होंने दीप शिक्षा प्रज्ज्वलित करके महाआरती का शुभारंभ किया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए कुलपति प्रो. सचदेवा ने कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पवित्र स्थली ज्योतिसर से पूरे विश्व को गीता का ज्ञान मिला। गीता में दिए ज्ञान में मानव की हर समस्या का समाधान निहित है। गीता के श्लोकों का स्मरण करने से जहां मन को शांति मिलती है वहीं हमारे आध्यात्मिक ज्ञान में भी वृद्धि होती है।
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कुरुक्षेत्र स्थित ब्रह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर के जल के आचमन मात्र से ही मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है। सूर्य ग्रहण, सोमवती अमावस्या, चौदस सहित अन्य धार्मिक अवसरों पर इन सरोवरों के पवित्र जल में स्नान करने से हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की पावन धरा से पूरे विश्व को गीता के उपदेश दिए। इस पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश आज भी पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है। इसलिए कुरुक्षेत्र का महत्व पूरे विश्व में है। इस सांध्यकालीन महाआरती को देखने पर सुखद अहसास होता है।
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इस कार्यक्रम के अंत में केडीबी की तरफ से सभी मेहमानों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. संजीव वर्मा, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ. देबरॉय, केडीबी मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, डॉ. बलदेव सेतिया, डॉ. पंकज चांदना, डॉ. आरके देसवाल, डॉ. भगत सिंह, डॉ. सुचि स्मिता मौजूद रहे। इस महाआरती का गुणगान पंडित बलराम गौतम, पंडित सोमनाथ शर्मा, गोपाल कृष्ण गौतम, अनिल व रुद्र ने किया।