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Kurukshetra News: श्रद्धालुओं को पिंडदान एवं श्राद्ध कर्म की महिमा बताई
Tue, 29 Sep 2026 02:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 29 Sep 2026 02:30 AM IST
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कुरुक्षेत्र। सपड़ा कॉलोनी में कथा के दौरान मंच पर नमन कर आशीर्वाद लेते श्रद्धालु। स्वयं
- फोटो : samvad
कुरुक्षेत्र। सपड़ा कॉलोनी स्थित ट्यूबवेल पार्क में पितृपक्ष अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा कराई जा रही है। इस दौरान कथावाचक अनिल शास्त्री ने श्रद्धालुओं को पिंडदान एवं श्राद्ध कर्म की महिमा बताई।
उन्होंने कहा कि पिंडदान केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा है। सनातन धर्म में पितरों का विशेष महत्व माना गया है। मनुष्य अपने पूर्वजों के संस्कारों और परंपराओं से जुड़ा होता है। इसलिए पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक उनका स्मरण किया जाता है। पिंडदान के माध्यम से पितरों के निमित्त अर्पण किया जाता है और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट की जाती है।
शास्त्री ने भगवान श्रीराम से जुड़ी पौराणिक कथा का वर्णन करते हुए बताया कि महाराज दशरथ के देहांत के बाद भगवान श्रीराम ने भी अपने पिता के निमित्त पितृ कर्म किया था। गया जी को पिंडदान के प्रमुख तीर्थों में माना जाता है। पितरों का स्मरण केवल पितृपक्ष तक सीमित न रखते हुए सदैव अपने माता-पिता और पूर्वजों का सम्मान करना चाहिए। उनके बताए संस्कारों और सद्मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान का स्मरण किया और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर समाजसेवी विजय सोही, पंडित लालचंद शर्मा, अजय बजाज, ज्ञानचंद बजाज, वीना सैनी, गुलशन गाबा, राजेश सिंगला, रामपाल गर्ग, छाया शर्मा, चारु बजाज, पूर्व पार्षद पिंकी गाबा, सरिता शर्मा और आचार्य रंगनाथ शास्त्री सहित अन्य मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि पिंडदान केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा है। सनातन धर्म में पितरों का विशेष महत्व माना गया है। मनुष्य अपने पूर्वजों के संस्कारों और परंपराओं से जुड़ा होता है। इसलिए पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक उनका स्मरण किया जाता है। पिंडदान के माध्यम से पितरों के निमित्त अर्पण किया जाता है और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट की जाती है।
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शास्त्री ने भगवान श्रीराम से जुड़ी पौराणिक कथा का वर्णन करते हुए बताया कि महाराज दशरथ के देहांत के बाद भगवान श्रीराम ने भी अपने पिता के निमित्त पितृ कर्म किया था। गया जी को पिंडदान के प्रमुख तीर्थों में माना जाता है। पितरों का स्मरण केवल पितृपक्ष तक सीमित न रखते हुए सदैव अपने माता-पिता और पूर्वजों का सम्मान करना चाहिए। उनके बताए संस्कारों और सद्मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान का स्मरण किया और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर समाजसेवी विजय सोही, पंडित लालचंद शर्मा, अजय बजाज, ज्ञानचंद बजाज, वीना सैनी, गुलशन गाबा, राजेश सिंगला, रामपाल गर्ग, छाया शर्मा, चारु बजाज, पूर्व पार्षद पिंकी गाबा, सरिता शर्मा और आचार्य रंगनाथ शास्त्री सहित अन्य मौजूद रहे।
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