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जेनरेशन जेड की प्राथमिकताएं पूर्ववर्ती पीढ़ियों से हैं अलग : प्रो. तेजेंद्र
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने नीदरलैंड के विख्यात मास्ट्रिच विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में अपना शोध पत्र सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया। कॉन्फ्रेंस में 40 देशों से आए करीब 250 शिक्षाविद एवं शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
प्रो. शर्मा ने प्रस्तुत शोध में जेनरेशन जेड यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं की बदलती सोच और मूल्य-प्रणाली का विश्लेषण किया गया है। इस अंतरराष्ट्रीय टीम में भारत, कोलंबिया, दक्षिण कोरिया, स्पेन, नीदरलैंड और अमेरिका के वरिष्ठ शोधकर्ता शामिल थे। उन्होंने छह देशों के कुल 583 युवाओं से डेटा एकत्र किया, जिसमें सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय कारकों के प्रभाव का विश्लेषण किया गया। प्रो. तेजेंद्र की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने उन्हें बधाई दी और कहा कि इससे वैश्विक अकादमिक मंच पर कुरुक्षेत्र विवि की भागीदारी और सशक्त हुई है।
शोध में रोकेच वैल्यू सर्वे के माध्यम से यह पाया गया कि जेनरेशन जेड की प्राथमिकताएं पूर्ववर्ती पीढ़ियों से अलग हैं। यह पीढ़ी सामाजिक मूल्यों की तुलना में व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मूल्यों की तुलना में क्षमता को अधिक महत्त्व देती है। भारत के युवाओं में विशेष रूप से यह प्रवृत्ति देखी गई कि वे अपने कौशल और योग्यता पर भरोसा करते हैं तथा सामाजिक उत्थान को भी समान रूप से महत्व देते हैं, जबकि अन्य देशों की तुलना में भारतीय युवाओं की सोच में ज्यादा व्यापक बदलाव दिखाई दिया। पश्चिमी देशों के युवा अभी भी व्यक्तिगत उन्नति को प्राथमिकता देते हैं, वहां भी सामाजिक सोच धीरे-धीरे उभर रही है।
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जेनरेशन जेड मानव मूल्यों का वैश्विक समायोजन
प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने बताया कि जेनरेशन जेड की वैश्विक सोच में एक किस्म की समानता देखी जा रही है, जो पूर्व की पीढ़ियों में नहीं थी। उन्होंने इस बदलाव को मानव मूल्यों का एक वैश्विक समायोजन बताया, जो दुनिया को एक साझा मूल्य प्रणाली की ओर ले जा रहा है।
सामाजिक पहचान सिद्धांत और व्यक्तिगत मूल्य सिद्धांत जैसे सैद्धांतिक ढांचों को और समृद्ध करते हैं। उनका कहना है कि यह संगठनों के लिए भी व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करता है कि वे जेनरेशन जेड के मूल्यों को ध्यान में रखकर अपनी कार्य नीतियां विकसित करें।
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प्रो. शर्मा ने प्रस्तुत शोध में जेनरेशन जेड यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं की बदलती सोच और मूल्य-प्रणाली का विश्लेषण किया गया है। इस अंतरराष्ट्रीय टीम में भारत, कोलंबिया, दक्षिण कोरिया, स्पेन, नीदरलैंड और अमेरिका के वरिष्ठ शोधकर्ता शामिल थे। उन्होंने छह देशों के कुल 583 युवाओं से डेटा एकत्र किया, जिसमें सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय कारकों के प्रभाव का विश्लेषण किया गया। प्रो. तेजेंद्र की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने उन्हें बधाई दी और कहा कि इससे वैश्विक अकादमिक मंच पर कुरुक्षेत्र विवि की भागीदारी और सशक्त हुई है।
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शोध में रोकेच वैल्यू सर्वे के माध्यम से यह पाया गया कि जेनरेशन जेड की प्राथमिकताएं पूर्ववर्ती पीढ़ियों से अलग हैं। यह पीढ़ी सामाजिक मूल्यों की तुलना में व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मूल्यों की तुलना में क्षमता को अधिक महत्त्व देती है। भारत के युवाओं में विशेष रूप से यह प्रवृत्ति देखी गई कि वे अपने कौशल और योग्यता पर भरोसा करते हैं तथा सामाजिक उत्थान को भी समान रूप से महत्व देते हैं, जबकि अन्य देशों की तुलना में भारतीय युवाओं की सोच में ज्यादा व्यापक बदलाव दिखाई दिया। पश्चिमी देशों के युवा अभी भी व्यक्तिगत उन्नति को प्राथमिकता देते हैं, वहां भी सामाजिक सोच धीरे-धीरे उभर रही है।
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जेनरेशन जेड मानव मूल्यों का वैश्विक समायोजन
प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने बताया कि जेनरेशन जेड की वैश्विक सोच में एक किस्म की समानता देखी जा रही है, जो पूर्व की पीढ़ियों में नहीं थी। उन्होंने इस बदलाव को मानव मूल्यों का एक वैश्विक समायोजन बताया, जो दुनिया को एक साझा मूल्य प्रणाली की ओर ले जा रहा है।
सामाजिक पहचान सिद्धांत और व्यक्तिगत मूल्य सिद्धांत जैसे सैद्धांतिक ढांचों को और समृद्ध करते हैं। उनका कहना है कि यह संगठनों के लिए भी व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करता है कि वे जेनरेशन जेड के मूल्यों को ध्यान में रखकर अपनी कार्य नीतियां विकसित करें।