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केयू के प्रतिभागियों ने लूर नृत्य से मचाया धमाल
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राज्यपाल व मुख्यमंत्री के साथ हरियाणा दिवस के उपलक्ष्य में राजभवन में आयोजित किए गए सांस्कृतिक ?
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा 28 से 31 अक्तूबर तक आयोजत रत्नावली महोत्सव में पहली बार प्रस्तुत किए गए लूर नृत्य की धूम हरियाणा दिवस पर राजभवन में भी देखने को मिली। प्रदेश सरकार के कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा राजभवन में हरियाणा दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में केयू के लूर नृत्य की प्रस्तुति दी गई, जिसकी जमकर सराहना की गई।
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा के स्थापना दिवस के अवसर पर राजभवन में सांस्कृतिक संध्या में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से तैयार किया गया लूर नृत्य राजभवन के मंच पर प्रस्तुत किया गया। केयू के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से लूर नृत्य पहली बार रत्नावली के मंच पर प्रस्तुत किया गया और दूसरी बार राजभवन के मंच पर।
केयू के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के लिए यह बड़ी उपलब्धि है कि उसकी पूरी टीम द्वारा तैयार किए गए इस नृत्य की हरियाणा में शुरूआत हुई। इससे पूर्व खोडिय़ा, धमाल, घुम्मर, गुग्गा आदि नृत्य की हरियाणा में परंपरा रही है और अब इस कडी में लूर नृत्य भी जुड़ गया है। इससे पूर्व हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय गत वर्ष लूर नृत्य का ब्रोशर भी जारी कर चुके हैं।
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रत्नावली के अवसर पर राज्यपाल द्वारा लूर नृत्य के 15 लोकगीत भी जारी किए जा चुके हैं। राजभवन में लूर नृत्य की प्रस्तुति को मुख्यमंत्री सहित सभी अधिकारियों ने सराहा। केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विश्वविद्यालय का हरियाणवी संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। इस कड़ी में लूर नृत्य भी शामिल हो गया है।
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा 28 से 31 अक्तूबर तक आयोजत रत्नावली महोत्सव में पहली बार प्रस्तुत किए गए लूर नृत्य की धूम हरियाणा दिवस पर राजभवन में भी देखने को मिली। प्रदेश सरकार के कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा राजभवन में हरियाणा दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में केयू के लूर नृत्य की प्रस्तुति दी गई, जिसकी जमकर सराहना की गई।
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा के स्थापना दिवस के अवसर पर राजभवन में सांस्कृतिक संध्या में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से तैयार किया गया लूर नृत्य राजभवन के मंच पर प्रस्तुत किया गया। केयू के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से लूर नृत्य पहली बार रत्नावली के मंच पर प्रस्तुत किया गया और दूसरी बार राजभवन के मंच पर।
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केयू के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के लिए यह बड़ी उपलब्धि है कि उसकी पूरी टीम द्वारा तैयार किए गए इस नृत्य की हरियाणा में शुरूआत हुई। इससे पूर्व खोडिय़ा, धमाल, घुम्मर, गुग्गा आदि नृत्य की हरियाणा में परंपरा रही है और अब इस कडी में लूर नृत्य भी जुड़ गया है। इससे पूर्व हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय गत वर्ष लूर नृत्य का ब्रोशर भी जारी कर चुके हैं।
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रत्नावली के अवसर पर राज्यपाल द्वारा लूर नृत्य के 15 लोकगीत भी जारी किए जा चुके हैं। राजभवन में लूर नृत्य की प्रस्तुति को मुख्यमंत्री सहित सभी अधिकारियों ने सराहा। केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विश्वविद्यालय का हरियाणवी संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। इस कड़ी में लूर नृत्य भी शामिल हो गया है।